VIDEO NEWS: सरकारी शिक्षकों की पात्रता परीक्षा के बारे में मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान, डेढ़ लाख शिक्षकों की मांग पूरी

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 5 सितंबर 2026:
शिक्षक दिवस के दिन आज मध्य प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने लगभग 2 लाख सरकारी शिक्षकों की नौकरी पर खड़ा संकट टालने के लिए एक बड़ा ऐलान किया है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट भी किया है कि, सरकार का लक्ष्य के सरकारी स्कूल की शैक्षणिक गुणवत्ता, प्राइवेट स्कूल से अच्छी होनी चाहिए। 

Chief Minister Dr Mohan Yadav's statement regarding the offline eligibility test for government teachers

मध्य प्रदेश के डॉ. मोहन यादव आज शिक्षक दिवस के अवसर पर राजधानी भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल मुख्य रूप से उपस्थित थे। सीएम डॉ. मोहन ने कहा कि, हमने टीईटी को लेकर ऑफलाइन परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है। शिक्षा विभाग प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता को और अधिक उत्कृष्ट बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। हमारा प्रयास है कि सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों से भी बेहतर बनाया जाए। इसके लिए विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक एवं सर्वसुविधायुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है।
 

सरकारी शिक्षकों की ऑफलाइन पात्रता परीक्षा के बारे में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के बयान का वीडियो


टीचर्स डे पर सीएम डॉ. मोहन ने शिक्षकों को दी बड़ी राहत, ऑफलाइन होगा TET

भोपाल। 'हमारी सरकार शिक्षकों के लिए जो बेहतर हो सकता है, ऐसे सभी जरूरी निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हो रही शिक्षक पात्रता परीक्षा (The Teacher Eligibility Test-TET) ऑफलाइन मोड पर होगी। शिक्षा विभाग के आधार पर शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए हम प्रयास कर रहे हैं। हमारे शासकीय स्कूल, प्राइवेट स्कूलों से बेहतर होंगे।' टीईटी को लेकर यह बड़ी घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 5 सितंबर को की। वे भोपाल की आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में शिक्षक दिवस पर आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। उससे पहले उन्हें एनसीसी कैडेट्स द्वारा "गार्ड ऑफ ऑनर" दिया गया। शिक्षक सम्मान समारोह में चयनित 33 उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया।

समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत की गौरवशाली गुरुकुल और गुरु-शिष्य परंपरा दुनिया में सबसे प्राचीन है। भारत की मंशा कभी किसी देश को अधीन करने की नहीं रही। हम वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से मानवता को बढ़ाने के लिए कार्य करते आए हैं। प्राचीन काल में भारत ने तक्षशिला, नालंदा और विक्रमजीत शिला विश्वविद्यालयों के माध्यम से दुनियाभर के विद्यार्थियों को शिक्षित किया। वर्तमान समय ऐसा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत शांति और स्थिरता के साथ अर्थव्यवस्था की मजबूती की ओर बढ़ रहा है और दुनिया भारत की ओर बड़ी आशा के साथ देख रही है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भारत ने गुट निरपेक्ष नीति अपनाई थी और वह समय आया है, जब प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के अलग-अलग शक्तिशाली देशों के राष्ट्राध्यक्षों से पूरे सम्मान के साथ मुलाकात और चर्चा करते हैं।

शिक्षकों की मेहनत का सम्मान करती है सरकार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुनिया में देश का मान निरंतर बढ़ रहा है। इसके पीछे गुरु की महिमा है, क्योंकि जहां गुरूर खत्म होता है, जहां गुण शुरू होता है, वहीं गुरु खड़ा होता है। देश का नक्शा कागजों पर बनता है, लेकिन देश की किस्मत हमारे गुरुजन कक्षाओं में बनाते हैं। हमारे शिक्षक और गुरुजन इन कक्षाओं के अधिपति हैं। शिक्षक कई पीढ़ियों तक अपने शिष्य की प्रगति से आनंदित होता है। उसे जीवन में सबसे अधिक गर्व तब महसूस होता है, जब वो शिष्य को स्वयं से आगे बढ़ते हुए देखता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार सभी शिक्षकों की मेहनत का सम्मान करती है। जब बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम सामने आते हैं तो इनकी मेरिट लिस्ट में 50 प्रतिशत से अधिक बच्चे हमारे शासकीय स्कूलों के होते हैं, जो शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिश्रम के कारण वहां तक पहुंच पाते हैं।

गुरुओं ने भगवान को भी तराशा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती ऐसी है, जहां भगवान श्रीकृष्ण स्वयं शिक्षा ग्रहण करने के लिए उज्जैन के सांदीपनि आश्रम आए थे। जहां उन्होंने 64 कलाएं और 14 विद्याओं का ज्ञान प्राप्त किया। श्रीकृष्ण के गुरु महर्षि सांदीपनि ने अपने शिष्य को जगद्गुरु की उपाधि दी। उन्होंने अपने शिष्य में भविष्य का पुरुषार्थ और पराक्रम देख लिया था। इसी प्रकार महर्षि विश्वामित्र ने बाल्यकाल में प्रभु श्रीराम और उनके भाइयों में पराक्रम देखा था। उन्होंने कहा कि वे राजा दशरथ से श्रीराम और लक्ष्मण को अपने साथ ले गए और श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम बनाया।

आज शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं 

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह 2026 में आज प्रदेश के 33 शिक्षकों का सम्मान हुआ है। भारत के दूसरे राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जन्म जयंती के अवसर पर सभी प्रदेशवासियों को बधाई देता हूं। यह आयोजन हमारे शिक्षकों को नमन करने का अवसर है, जो ज्ञान और संस्कार का देश का भविष्य गढ़ रहे हैं। माता-पिता और शिक्षक बच्चों को संस्कार देकर बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षा को नए भारत की शक्ति बनाने का संकल्प राष्ट्रीय शिक्षा नीति के रूप में लिया है। शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों से अनुरोध है कि भारत को महाशक्ति बनाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि आज शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है। उसे वैश्विक जरूरतों और रोजगार के अवसरों के अनुरूप अपग्रेड और इनोवेट करने की आवश्यकता है। बच्चों को उनकी रुचि के विषय चुनने का अवसर दिया जाए। शिक्षक विद्यार्थियों की प्रतिभा को खोजें और उसे आगे बढ़ने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि बच्चों को संस्कारित करने में माता-पिता की जिम्मेदारी अहम है। तभी हमें देश के अच्छे नागरिक मिलेंगे। माता-पिता, बड़े भाई-बहन बच्चों से पूछें कि आज स्कूल में क्या पढ़ाया। हमारे लिए सभी शिक्षक सम्माननीय हैं। शिक्षक अपने परिवार के बच्चों की तरह उन्हें पढ़ाएं। उन्होंने कहा बड़े होकर विद्यार्थी अपने शिक्षक को कभी नहीं भूलते हैं। आज सिखाए हुए बच्चे विकसित भारत @2047 के संकल्प में योगदान देंगे। बच्चों को सहनशील बनाएं। कई बच्चे मानसिक परेशानी में गलत कदम उठा लेते हैं। ऐसे बच्चों को प्यार से समझाएं। हमें ऐसी पीढ़ी तैयार करनी है, जो अपने माता-पिता और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी न भूलें।

विकसित भारत @2047 के संकल्प की पूर्ति में शिक्षकों का होगा अहम योगदान 

स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि शिक्षक दिवस को पूरा देश गुरुजनों के सम्मान के रूप में देखता है। भविष्य में हमारी युवा पीढ़ी अगर देश को आगे बढ़ाएगी तो इसमें हमारे अभिभावकों और गुरुजनों का विशेष योगदान होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में देश की शिक्षण पद्धति की चुनौतियां खत्म हो रही हैं। देश में शिक्षा नीति 2020 लागू की गई है। मध्यप्रदेश में यह सबसे पहले उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लागू करवाई थी। उन्होंने कहा कि आज का दिन शिक्षकों के प्रति हमारी कृतज्ञता प्रकट करने का है। राज्य सरकार अच्छा कार्य करने वाले शिक्षकों का सम्मान कर रही है। प्रदेश का हर शिक्षक हमारी शिक्षा व्यवस्था की अहम कड़ी है। नक्सल प्रभावित रहे बालाघाट जिले में शिक्षकों ने स्कूलों के माध्यम से बच्चों को अच्छे संस्कार दिए। उन्होंने कहा कि कई शिक्षक ऐसे हैं, जो अपने वेतन की हिस्सेदारी भी स्कूल को आदर्श विद्यालय बनाने में लगा देते हैं। बच्चों को स्वयं साइकिल की घंटी बजाकर स्कूल आने के लिए प्रेरित करते हैं। हमारी सरकार कानूनी बाधाओं को दूर करने का प्रयास करते हुए शिक्षकों की बेहतरी के लिए कार्य कर रही है। विकसित भारत @2047 के संकल्प की पूर्ति में सभी शिक्षकगणों का अहम योगदान होगा।

इन शिक्षकों का हुआ सम्मान

शिवलाल दांगी, धन्नालाल बिसेन,रीतेश कुमार पथाड़े, सुखनंदन साहू, नरेंद्र कुमार भारद्वाज, ओम प्रकाश विश्वकर्मा, महेंद्र सिंह ठाकुर, राकेश कुमार गुप्ता, शिखा शर्मा, लोकेंद्र सिंह पंवार, ज्योति पाठक, राकेश कुमार वर्मा, सुरेश चंद्र सोनी, शर्मिला उपाध्याय, रीनादेवी कटरे, हेमंत कुमार वैद्य, राकेश द्विवेदी, सीमा परमार, पूनम मिश्रा, बिहारीलाल प्रजापति, अरुण कुमार भादे, बलराम अहिरवार, मुकेश कुमार शर्मा, अरुण कुमार मित्तल, मुकेश प्रजापति, मनीष तिवारी, अजय कुमार मिश्रा, मुकेश नागर, राजेश महेश्वरी, मोहित कुमार गर्ग, पूजा पांडे, सतीश पांडे, श्वेता तिवारी, अजिता, शीला पटेल, भैरूलाल ओसारा को सम्मानित किया गया।

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