चेन्नई / मद्रास, 16 सितंबर 2026: मद्रास उच्च न्यायालय (High Court of Judicature at Madras) ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह स्पष्ट किया है कि रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) में किसी प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन हो जाने का मतलब यह बिल्कुल नहीं हो सकता कि जिसने रजिस्ट्रेशन करवाया है वही प्रॉपर्टी का मालिक भी है। यदि कोई सिविल विभाग चल रहा है तब भी संबंधित प्रॉपर्टी का RERA में रजिस्ट्रेशन हो सकता है। स्वामित्व का फैसला सिविल न्यायालय में हुआ, यह बिल्कुल अलग विषय है। मतलब RERA और सिविल न्यायालय के बीच में कोई संबंध नहीं है एवं दोनों की कार्रवाई की दस्तावेज, दोनों के लिए एविडेंस नहीं होते। यह फैसला विद्वान न्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती (Justice D. Bharatha Chakravarthy) की एकल पीठ ने दिया।
मामले की पूरी कहानी
याचिकाकर्ता एन. बालकृष्णन के अनुसार, तांबरम तालुक के तिरुनीरमलाई गांव में स्थित सर्वे नंबर 314/17B की जमीन उनके पिता द्वारा खरीदी गई थी, जिसे बाद में उन्होंने विरासत में प्राप्त किया। उक्त पते पर उनके नाम बिजली, गैस और टेलीफोन कनेक्शन भी मौजूद हैं। दूसरी तरफ, एस. आनंदन (प्रतिवादी संख्या 2) ने पल्लवरम स्थित जिला मुंसिफ कोर्ट में बालकृष्णन के खिलाफ एक दीवानी वाद O.S. No. 1117 of 2023 दायर कर संपत्ति में दखल न देने के लिए स्थायी निषेधाज्ञा (Permanent Injunction) मांगी। इस मामले में I.A. No. 4 of 2023 के तहत एकपक्षीय अंतरिम स्थगन आदेश (Ex-parte Interim Injunction) जारी किया गया। बालकृष्णन ने इस मुकदमे में अपना जवाब (counter) दाखिल कर दिया था, लेकिन मामला पिछले तीन वर्षों से विचाराधीन है।
TNRERA में प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन का आवेदन:
दीवानी अदालत के अंतरिम स्थगन आदेश का लाभ उठाते हुए एस. आनंदन ने उस जमीन पर एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट विकसित करने के लिए TNRERA में पंजीकरण हेतु आवेदन किया। बालकृष्णन को जब इसकी जानकारी मिली, तो उन्होंने 9 सितंबर 2025 को TNRERA के अध्यक्ष को एक विस्तृत पत्र भेजकर प्रोजेक्ट को पंजीकरण न देने का विरोध दर्ज कराया। शुरुआत में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत उन्हें बताया गया कि ऐसा कोई रजिस्ट्रेशन नहीं दिया गया है। बाद में बालकृष्णन को पता चला कि TNRERA ने 10 अप्रैल 2026 के आदेश (पंजीकरण संख्या TNRERA/35/BLG/0126/2026) द्वारा एस. आनंदन के पक्ष में प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन स्वीकृत कर दिया है। इसके बाद आनंदन ने प्लॉट्स का सीमांकन शुरू कर दिया और बिक्री के विज्ञापन जारी कर दिए।
इसके खिलाफ बालकृष्णन ने उच्च न्यायालय में पूर्व में W.P. No. 20891 of 2026 दायर की, जिसमें 11 मई 2026 को अंतरिम आदेश मिला। जब उन्होंने पुनः TNRERA को प्रतिवेदन भेजा, तो TNRERA ने 9 जुलाई 2026 को उन्हें फॉर्म नंबर M (Form No. M) में औपचारिक शिकायत दर्ज करने का निर्देश दिया। आरटीआई के तहत एक अन्य जानकारी में TNRERA ने यह स्वीकार किया कि दफ्तर बदलने के कारण बालकृष्णन का आपत्ति पत्र खो गया था और आनंदन ने आवेदन के समय दीवानी अदालत के मुकदमे की बात छिपाई थी।
इसके अतिरिक्त, बालकृष्णन ने पट्टा जारी करने के खिलाफ जिला राजस्व अधिकारी (DRO), चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (CMDA) और भूमि प्रशासन आयुक्त (Commissioner of Land Administration) के समक्ष भी आपत्तियां दर्ज कराई थीं, लेकिन सभी प्राधिकारियों ने उन्हें दीवानी अदालत (Civil Court) जाने का ही निर्देश दिया था।
याचिकाकर्ता एन. बालकृष्णन की ओर से सीनियर वकील श्री जी. राजागोपालन के तर्क:
वरिष्ठ अधिवक्ता जी. राजागोपालन ने तर्क दिया कि RERA अधिनियम, 2016 की धारा 4 के तहत प्रमोटर के लिए यह अनिवार्य है कि वह आवेदन में स्पष्ट करे कि जमीन किसी भार (encumbrance) या कानूनी विवाद से मुक्त है। एस. आनंदन ने TNRERA के समक्ष आवेदन करते समय न तो लंबित मुकदमे की जानकारी दी और न ही बालकृष्णन के साथ चल रहे विवाद का खुलासा किया। जब आनंदन स्वयं सिविल कोर्ट गए थे और रोक का आदेश लिया था, तो यह एक अत्यंत प्रासंगिक तथ्य था जिसे TNRERA के सामने रखा जाना चाहिए था।
एक वैधानिक प्राधिकरण होने के नाते TNRERA का यह कर्तव्य था कि वह तीसरे पक्ष (बालकृष्णन) की लिखित आपत्ति पर विचार करे। आपत्ति पत्र का गुम हो जाना (misplaced) कानून की नजर में मान्य बहाना नहीं हो सकता। जब प्रमोटर द्वारा प्रथम दृष्टया तथ्यों को छुपाया गया और प्राधिकरण ने आपत्तियों पर विचार किए बिना रजिस्ट्रेशन जारी किया, तो ऐसा रजिस्ट्रेशन रद्द कर मामले को पुनः विचार हेतु TNRERA के पास भेजा जाना चाहिए।
याचिकाकर्ता के वकील ने प्रतिवादी द्वारा दिए गए निर्णय रामसुब्रमण्यम बनाम संयुक्त उप-पंजीयक नंबर 1, तेनकासी जिला व अन्य [W.P.(MD).No.13158 of 2024] के संदर्भ में कहा कि उस निर्णय के पैराग्राफ 7 में दिए गए अवलोकन में RERA अधिनियम की वैधानिक आवश्यकताओं पर विस्तार से विचार नहीं किया गया था।
प्रतिवादी एस. आनंदन की ओर से सीनियर वकील श्री टी.वी. रामानुजम के तर्क:
वरिष्ठ अधिवक्ता टी.वी. रामानुजम ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह रिट याचिका दुर्भावनापूर्ण और तंग करने वाली है। आनंदन ही संपत्ति के वास्तविक कानूनी मालिक हैं। याचिकाकर्ता ने पट्टा, CMDA अनुमति और भूमि प्रशासन आयुक्त के समक्ष आपत्तियां लगाई थीं, जहां हर प्राधिकरण ने उन्हें सिविल कोर्ट जाने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता सिविल कोर्ट जाने से कतरा रहे हैं।
सिविल कोर्ट (जिला मुंसिफ कोर्ट, पल्लवरम) में आनंदन के पक्ष में अंतरिम रोक (injunction) वर्तमान में भी लागू है। बालकृष्णन द्वारा वाद खारिज करने (reject plaint) के लिए दिया गया आवेदन खारिज हो चुका है और मुख्य मामले की सुनवाई जारी है। जब बालकृष्णन का संपत्ति पर कोई कानूनी अधिकार, स्वामित्व या हित नहीं है और न ही संपत्ति पर कोई भार (encumbrance) है, तो TNRERA से कुछ भी छिपाने का प्रश्न ही नहीं उठता।
RERA की ओर से वकील सुश्री अमृतापूनकोडी दिनकरन के तर्क:
TNRERA की ओर से पेश वकील ने स्पष्ट किया कि यद्यपि कार्यालय का स्थानांतरण (transfer of office) हुआ था, लेकिन अथॉरिटी ने उपलब्ध सभी सामग्रियों और अभिलेखों का अवलोकन करने तथा अपना मन लगाने (applied its mind) के बाद ही नियमानुसार प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन प्रदान किया था।
उच्च न्यायालय का निर्णय एवं कानूनी व्याख्या
मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती ने निम्नलिखित मुख्य बिंदु तय किए और फैसला सुनाया:
अदालत ने माना कि RERA एक्ट की धारा 4(2)(l) के अनुसार प्रमोटर को यह घोषणा देनी होती है कि उसके पास भूमि का कानूनी अधिकार (legal title) है और जमीन सभी प्रकार के भारों (encumbrances) से मुक्त है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि प्रथम दृष्टया (prima facie) रिकॉर्ड से ही यह दिखे कि प्रमोटर के पास टाइटल नहीं है या भार ऐसा है जिससे पंजीकरण संभव नहीं, तो TNRERA आवेदन खारिज कर सकता है परंतु, जहां संपत्ति के स्वामित्व को लेकर विवादित प्रश्न (disputed questions of title) शामिल हों, वहां TNRERA स्वयं उनकी जांच या फैसला नहीं कर सकता। इसके लिए पक्षों को सक्षम दीवानी अदालत (Civil Court) का रुख करना होगा।
चूंकि पल्लवरम की सिविल कोर्ट ने पहले ही प्रतिवादी एस. आनंदन के पक्ष में प्रथम दृष्टया मामला पाया है और बालकृष्णन के खिलाफ अंतरिम रोक (injunction) लागू है, इसलिए यह ऐसा मामला नहीं है जहां TNRERA को रजिस्ट्रेशन खारिज करना अनिवार्य था।
RERA पंजीकरण से स्वामित्व तय नहीं होता:
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि TNRERA द्वारा प्रोजेक्ट को रजिस्ट्रेशन देने से बालकृष्णन के मालिकाना हक या सिविल कोर्ट में लंबित/नए वाद पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। बालकृष्णन सिविल कोर्ट में काउंटर-दावा (counter-claim) या स्वतंत्र सिविल मुकदमा दायर कर अपना पक्ष रखने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।अदालत ने नोट किया कि प्रोजेक्ट पंजीकृत हो चुका है और निर्माण कार्य काफी उन्नत चरण (advanced stage) में पहुंच चुका है।
मद्रास उच्च न्यायालय ने याचिका में कोई मेरिट न पाते हुए और याचिकाकर्ता एन. बालकृष्णन को सिविल कोर्ट जाने की स्वतंत्रता देते हुए रिट याचिका (W.P. No. 32211 of 2026) का निस्तारण (disposed of) कर दिया तथा बिना किसी लागत के संबंधित मध्यवर्ती याचिकाओं को बंद कर दिया।
मामले में संदर्भित निर्णय (Referred Judgment)
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष द्वारा मद्रास उच्च न्यायालय के ही एक पूर्व निर्णय रामसुब्रमण्यम बनाम जॉइंट सब रजिस्ट्रार नंबर 1, तेनकासी व अन्य [W.P.(MD).No.13158 of 2024] का उल्लेख किया गया। इस निर्णय के पैराग्राफ 7 में दिए गए अवलोकन का हवाला दिया गया था। हालांकि, वर्तमान पीठ ने विचार करते हुए स्पष्ट किया कि RERA अधिनियम के तहत स्वामित्व विवादों और पंजीकरण के दायरे को देखते हुए याचिकाकर्ता को सिविल कोर्ट में ही अपनी राहत मांगनी होगी।
एन. बालकृष्णन बनाम TNRERA व अन्य (W.P. No. 32211 of 2026)
यह निर्णय एन. बालकृष्णन बनाम TNRERA व अन्य (W.P. No. 32211 of 2026) के मामले में 9 सितंबर 2026 को सुनाया गया। (रिट याचिका संख्या W.P. No. 32211 of 2026 एवं संबंधित याचिकाएं W.M.P. Nos. 35399 व 35401 of 2026।)
याचिकाकर्ता: एन. बालकृष्णन।
प्रतिवादी: तमिलनाडु रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (TNRERA), रेरा टावर, अन्ना नगर ईस्ट, चेन्नई।
एस. आनंदन।
संबंधित कानून व धाराएं: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 226 (अनुच्छेद 226 के तहत रिट ऑफ सर्टियोरारी) और रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 (RERA Act) की धारा 4 तथा धारा 4(2)(l)।
विवादित संपत्ति: तांबरम तालुक के तिरुनीरमलाई गांव में स्थित सर्वे नंबर 314/17B (S.No. 314/17B) की भूमि।
रिपोर्ट: उपदेश अवस्थी (लीगल एडवाइजर एवं पत्रकार)।

