भोपाल, 11 सितंबर 2026: लोकतंत्र का यह सबसे खूबसूरत रंग है, जब विकास की बात होती है और एक छोटा सा व्यक्ति भी, पॉवरफुल पॉलीटिशियन की आंखों में आंखें डालकर सवाल करता है। श्योपुर में ऐसा ही हुआ। राजनीति में पंच-सरपंचों की कोई खास वैल्यू नहीं होती, लेकिन जब वह सामने खड़े हुए और सवाल करने लगे तो माननीय सांसद महोदय को भी ऐसा झटका लगा, उबर नहीं पाए। मंच छोड़कर जाना पड़ा।
तो बात ऐसी है कि 1 सितंबर को मुरैना सांसद शिवमंगल सिंह तोमर का जन्मदिन था। कानों में अभी भी जय जयकार गूंज रही होगी। श्योपुर में भी स्वागत सत्कार हो जाए इसलिए सांसद महोदय ने एक सरकारी कार्यक्रम का आयोजन कर लिया। नाम रखा पंच सरपंच सम्मेलन। मंच पर आए तो उन्होंने राष्ट्रीय स्तर का भाषण देना शुरू कर दिया। देश आगे बढ़ रहा है, कितनी बड़ी-बड़ी शक्तियों से लड़ रहा है। इतने में एक उपसरपंच खड़ा हो गया। उसने कहा - थोड़ी बात अपने संसदीय क्षेत्र की भी कर लेते हैं। फिर वह सांसद महोदय के सामने जाकर सवाल करने लगा। फिर कुछ और पंच सरपंचों ने सवाल शुरू कर दिए। सांसद महोदय स्वागत करवाने आए थे, सवालों के जवाब के लिए तैयार ही नहीं थे।
मंच पर खड़े हुए सांसद महोदय विवेक शून्य की स्थिति में चले गए। एक नेता तब अच्छा कहा जाता है जब वह ऐसी स्थिति को अपने पक्ष में करने में सक्षम हो। कम से कम सामना तो करें, लेकिन शिवमंगल सिंह तोमर ऐसा कुछ भी नहीं कर पाए। उनके मंच छोड़कर भाग गए। अब उनके ऊपर तंज कसे जा रहे हैं।

