बालाघाट, 12 सितंबर 2026: इंस्टाग्राम पर कॉकरोच जनता पार्टी नाम के पेज के संचालक श्री अभिजीत दीपके को बालाघाट में जैसा एक्सपीरियंस मिला, भारत में शायद ही कहीं मिला होगा। शायद उन्होंने सोचा था कि आदिवासी एरिया है, लेकिन वह यह नहीं जानते कि, यह बालाघाट का आदिवासी एरिया है। पहले पत्रकारों ने इतने तीखे सवाल किया कि, माफी मांग कर भागना पड़ा और अब एक नया वीडियो वायरल हुआ है। आदिवासियों ने घर के दरवाजे से भगा दिया।
Even the tribals of Balaghat chased Abhijit Deepke away
लेटेस्ट वायरल वीडियो में श्री अभिजीत दीपके एक आदिवासी परिवार से बातचीत करते हुए दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने पूछा कि क्या बच्चे स्कूल जाते हैं। वीडियो में जिस प्रकार से बच्चों को दिखाया गया था, सामान्य तौर पर कहा जा सकता था कि बच्चे स्कूल नहीं जाते, लेकिन जैसा कि हमने कहा, यह आदिवासी एरिया है। यहां त्वचा का रंग और फैशन देखकर अंदाज नहीं लगा सकते। बच्चों की माता ने बताया कि बच्चे स्कूल जाते हैं। फिर पूछा आपको राशन मिलता है। महिला ने कहा - हो, मिलता है। फिर नेताजी अभिजीत दीपके ने कुछ और सवाल किए। इस दौरान कुछ ऐसा हुआ कि, वीडियो में कट लगाना पड़ा। इसके बाद बस इतना दिखाई दिया कि, लाखों युवाओं के आइडियल होने का दावा करने वाले, श्री अभिजीत दीपके विनम्रता पूर्वक कहते सुने गए, अच्छा ठीक है मैं बाहर जाता हूं।
अभिजीत दीपके को बालाघाट के पत्रकारों ने खदेड़ा, माफी मांग कर सवालों से भागे
सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। श्री विजय सिंह लिखते हैं, जब भी कहीं कोई दुखद हादसा होता है, अभिजीत दीपके अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने वहां पहुंच जाते हैं। सोशल एक्टिविस्ट राजेंद्र वर्मा ने लिखा, सवाल बिल्कुल जायज़ है - किसी भी त्रासदी को राजनीतिक मुद्दा बनाने से पहले यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि घटना के इतने समय बाद वहां पहुंचने का उद्देश्य क्या है? सोशल मीडिया एक्टिविस्ट रानी पुरोहित ने लिखा, जनता अब सिर्फ बयान नहीं सुनती, जवाब भी मांगती है। हर घटना को राजनीतिक अवसर समझने वालों को याद रखना चाहिए। इंजीनियर श्री राजेश सिंह का कहना है कि अभिजीत दीपिके इसलिए भागे क्योंकि, उनसे सवाल पूछने वाली उनकी प्रिय मीडिया उनके साथ नहीं थी। इस बार लोकल के पत्रकार थे, जिनको मर्ज भी पता है और उसका इलाज भी पता है।
मध्य प्रदेश को किसी अभिजीत-अखिलेश की जरूरत नहीं
दरअसल, यह लोग नहीं जानते कि मध्य प्रदेश उनके राज्यों से अपना बॉर्डर शेयर जरूर करता है लेकिन पॉलीटिकल कल्चर बिल्कुल अलग है। अभिजीत दीपके महाराष्ट्र से आते हैं, उन्होंने दिल्ली में काम किया है लेकिन वह नहीं जानते कि मध्य प्रदेश में महाराष्ट्र और दिल्ली टाइप की पॉलिटिक्स नहीं चलती। उनसे पहले भी कई लोग प्रयास कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश के अखिलेश यादव ने तो मध्य प्रदेश में पैर जमाने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। मध्य प्रदेश की राजनीति में पॉजिटिविटी है, प्रेम है और सबसे अधिक मर्यादा भी है। यहां कांग्रेस, एक विपक्षी पार्टी के रूप में काफी शक्तिशाली है। अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए या फिर किसी अन्य के खिलाफ आवाज उठाने के लिए मध्य प्रदेश की जनता को किसी अभिजीत या अखिलेश की जरूरत नहीं है।

