भोपाल, 15 सितंबर 2026: क्या आपने कभी सोचा है कि बिना पारंपरिक सीमेंट का इस्तेमाल किए भी कंक्रीट की मजबूत सड़कें बनाई जा सकती हैं? मध्य प्रदेश अब इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में ऐसा ही एक अनोखा और क्रांतिकारी कदम उठाने जा रहा है। भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित 'राज्य स्तरीय अभियंता दिवस समारोह' में राज्य सरकार ने प्रदेश के विकास का एक नया विजन देश के सामने रखा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में हुए इस कार्यक्रम में न केवल उत्कृष्ट कार्य करने वाले इंजीनियर्स को सम्मानित किया गया, बल्कि राज्य के विकास की तस्वीर बदलने वाले कई बड़े फैसलों और एमओयू (MoU) पर मुहर लगाई गई।
बिना सीमेंट की सड़कें और 'ग्रीन बिल्डिंग' का नया मॉडल
समारोह की सबसे बड़ी हाईलाइट रही - मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की पहल पर मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) और CSIR-एम्प्री भोपाल के बीच हुआ एमओयू। देश में अपनी तरह के इस पहले प्रयोग के तहत अब फ्लायऐश आधारित सीमेंट और बिना सीमेंट के कंक्रीट सड़कें बनाई जाएंगी। इसके साथ ही लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने घोषणा की कि मध्य प्रदेश में बनने वाले सभी नए सरकारी भवन अब 'ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी' (Green Building Technology) पर आधारित होंगे। यानी पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए आधुनिक निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा।
अगले 1 साल में 2 लाख करोड़ के रोड प्रोजेक्ट्स
प्रदेश में कनेक्टिविटी को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए बड़ा रोडमैप तैयार किया गया है। PWD के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह ने बताया कि सड़कें केवल रास्ते नहीं हैं, बल्कि ये किसानों को बाजार, युवाओं को स्कूल और नारियों को रोजगार तक पहुंचाती हैं।
MPRDC जहां 30 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य पूरे कर चुका है, वहीं अगले एक साल में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की लागत के नए प्रोजेक्ट्स पर काम करने जा रहा है।
सड़क निर्माण में विशेषज्ञों के सुझाव और ब्लैक स्पॉट्स को ठीक करने की वजह से पिछले 9 महीनों में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है।
भोपाल में खुलेगा 'इंजीनियर्स ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट'
इंजीनियर्स के हुनर और परफेक्शन को और निखारने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में एक समर्पित इंजीनियर्स ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट शुरू करने का संकल्प लिया है। पिछले 9 महीनों के भीतर ही प्रदेश के 85 प्रतिशत इंजीनियर्स को एडवांस ट्रेनिंग दी जा चुकी है। लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि "इंजीनियरिंग केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि चुनौतियों के बीच समस्याओं का समाधान निकालने की क्षमता है"।
प्राचीन कला से प्रेरणा और 'इंजन' का संदेश
समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को नमन करते हुए कहा कि 'इंजीनियर' शब्द में 'इंजन' का आभास होता है जो अपनी पूरी ताकत लगाकर व्यवस्था को आगे बढ़ाता है।
सीएम ने भारत की समृद्ध प्राचीन वास्तुकला का जिक्र करते हुए कहा कि अजंता-एलोरा का कैलाश मंदिर और मंदसौर का धर्मराजेश्वर हमारी महान कला साधना के उदाहरण हैं। उन्होंने याद दिलाया कि:
भारत का पहला संसद भवन मुरैना के पास स्थित प्राचीन मंदिर की प्रेरणा से बना था।
दूसरा संसद भवन विदिशा जिले के बिजासन मंदिर से प्रेरणा लेकर तैयार किया गया।
मतलब 100 साल पहले भी मध्य प्रदेश की सिविल इंजीनियरिंग भारत को प्रेरणा दे रही थी और आज भी मध्य प्रदेश भारत की सिविल इंजीनियरिंग ही भारत की सर्वश्रेष्ठ और एकमात्र प्रेरणा का केंद्र है।
विकसित मध्य प्रदेश का संकल्प
कार्यक्रम में रानी दुर्गावती, सम्राट विक्रमादित्य और राजा भोज के सुशासन और योगदान को याद किया गया। PWD के प्रमुख अभियंता आर.एल. वर्मा ने सर विश्वेश्वरैया के जीवन और उनके द्वारा बनाए गए प्रसिद्ध खड़कवासला जलाशय का उल्लेख किया। अंत में इंजीनियर्स के प्रमोशन और जनकल्याणकारी फैसलों के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया गया। मध्य प्रदेश सरकार का यह नया विजन और टेक्नोलॉजी आधारित प्रयास राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को एक नई ऊंचाई देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
मध्य प्रदेश के इन इंजीनियरों को सम्मानित किया गया
कार्यक्रम में ईश्वर सिंह चंदेली, मानवेंद्र सिंह सेंगर, मनीष कुमार शर्मा, अर्चित लाहौटी, अमन अग्रवाल, नितिन अग्रवाल, नितिन बरसैया, राजेश दायमा, शशांक शर्मा, हर्षिता वार्ष्णेय, दीपक नामदेव, साहित्य तिवारी, अनिल श्रीवास्तव, पुष्कल प्रताप, मोहन किशोर, महेंद्र डोलिया, शिवेंद्र सिंह, रामसिंह रघुवंशी, आशीष मंडल का सम्मान किया गया। इस दौरान सेवानिवृत्त सचिव लोक निर्माण विभाग सतीश चंद्र पांडे और सेवानिवृत्त प्रमुख अभियंता जीएस पल्नितकर को विशेष सम्मान दिया गया।

