भोपाल के बीएस ठाकुर ने IRCTC रेलवे को सबक सिखाया, 2110 काटे थे, 17110 देने पड़ेंगे

Updesh Awasthee
भोपाल, 6 सितंबर 2026:
सरकारी अधिकारी खुद को महान और अपने मुंह से निकले हुए शब्दों को संविधान समझने लगते हैं। IRCTC के मनमाने नियमों से लगभग हर रेल यात्री परेशान हुआ होगा, लेकिन हर रोज लाखों लोग इग्नोर कर देते हैं। इसलिए रेलवे के अधिकारियों और IRCTC की हिम्मत बढ़ जाती है। वह ऐसे नियम बनाते हैं, जो कानून का उल्लंघन कर रहे हों। उन्हें लगता है कि सब इग्नोर कर देंगे लेकिन भोपाल के बीएस ठाकुर ने इग्नोर नहीं किया। उन्होंने मुकदमा ठोका। लगभग 2 साल तक कैसे चला लेकिन भोपाल के ठाकुर साहब ने IRCTC को सबक सिखा कर माना। रेलवे ने उनके 2110 काटे थे, अब 17110 देने पड़ेंगे। 

रेलवे रिफंड विवाद: बीएस ठाकुर बनाम IRCTC

भोपाल निवासी भवानी शंकर उर्फ बीएस ठाकुर परिवार के साथ आगरा गए थे। भोपाल लौटने के लिए उन्होंने 24 सितंबर 2023 की निजामुद्दीन-रानी कमलापति शान-ए-भोपाल सुपरफास्ट एक्सप्रेस में कन्फर्म टिकट कराया था। टिकट की कुल राशि 4,160 रुपए थी। यात्रा से पहले 9 सितंबर को रेलवे की ओर से उन्हें मैसेज मिला कि ट्रेन कैंसिल कर दी गई है। परिवार के साथ वापस आना था, इसलिए उन्होंने इंतजार नहीं किया। अगले ही दिन यानी 10 सितंबर को परिवार के सदस्यों के लिए केरला एक्सप्रेस में नई टिकट करा ली। यात्री का मानना था कि पहली ट्रेन रेलवे ने कैंसिल की है, इसलिए उसकी टिकट का पूरा रिफंड मिल जाएगा। 

11 सितंबर 2023 को रेलवे ने पहली ट्रेन के दोबारा संचालन की जानकारी दी। हालांकि, यात्री के अधिवक्ता के मुताबिक कैंसिलेशन की जानकारी तो यात्री को मिली थी, लेकिन ट्रेन रीस्टोर होने की सूचना उसके पास नहीं पहुंची। इस बीच यात्री दूसरी ट्रेन की टिकट करा चुका था। उसके पास पहली ट्रेन के कैंसिलेशन का मैसेज था और उसी आधार पर उसने वैकल्पिक यात्रा की व्यवस्था की थी। रिफंड नहीं मिलने पर उसने DRM ऑफिस और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की। काफी समय बाद 4,160 रुपए में से केवल 2,050 रुपए वापस किए गए। यानी 2,110 रुपए काट लिए गए। रिफंड में कटौती को लेकर रेलवे की ओर से तर्क दिया गया कि बाद में ट्रेन का संचालन बहाल हो चुका था। यात्री ने इसके बाद टिकट कैंसिल कराया, इसलिए रेलवे के नियमों के अनुसार कैंसिलेशन चार्ज काटकर रिफंड किया गया।

IRCTC ने भी बताया कि ऑनलाइन टिकट बुकिंग और कैंसिलेशन की प्रक्रिया उसके प्लेटफॉर्म के जरिए होती है। रिफंड के लिए TDR प्रक्रिया का भी जिक्र किया गया। हालांकि, आयोग ने घटनाक्रम को अलग नजरिए से देखा। आयोग ने कहा कि यात्री ने ट्रेन अपनी इच्छा से कैंसिल नहीं की थी, बल्कि रेलवे की ओर से ट्रेन निरस्त होने की सूचना मिलने के बाद वैकल्पिक ट्रेन में टिकट कराया था।

रेलवे की रिफंड प्रक्रिया अनुचित

लगातार परेशान होने के बाद बीएस ठाकुर ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, भोपाल बेंच-2 में 17 मार्च 2024 को प्रकरण क्रमांक 147/2024 दर्ज कराया था। भोपाल जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने रेलवे की रिफंड प्रक्रिया को अनुचित माना। आयोग ने कहा कि यात्री ने रेलवे के कैंसिलेशन मैसेज के आधार पर वैकल्पिक टिकट कराया था, इसलिए बाद में ट्रेन रीस्टोर होने का हवाला देकर टिकट राशि में कटौती नहीं की जा सकती। 6 अगस्त 2026 को दिए फैसले में आयोग ने रेलवे और IRCTC को यात्री की बाकी राशि 2,110 रुपए 7% ब्याज के साथ लौटाने के आदेश दिए। इसके अलावा 15 हजार रुपए क्षतिपूर्ति और 5 हजार रुपए वाद-व्यय भी देने को कहा है। 

मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने सेवा में कमी पाई। 6 अगस्त 2026 को आयोग ने रेलवे और IRCTC को अलग-अलग या संयुक्त रूप से टिकट की शेष राशि 2,110 रुपए, क्षतिपूर्ति के 15 हजार रुपए और वाद-व्यय के 5 हजार रुपए का भुगतान करने के आदेश दिए।
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