भोपाल, 7 सितंबर 2026: जंतर मंतर की घटना के बाद देश का माहौल बदल गया है। लोग सरकार पर दवा बनाकर अपनी मांग तुरंत मनवाने की कोशिश करने लगे हैं। दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी संगठन के एक नेता ने आज भोपाल में नगर निगम महापौर की गाड़ी में आग लगा दी। यह उसके विरोध प्रदर्शन का एक तरीका था। जबकि भारतीय न्याय संहिता के अनुसार यह एक गंभीर अपराध है।
कर्मचारी के खिलाफ नियम अनुसार कार्रवाई की जाएगी: वरुण अवस्थी
घटना करीब पौने 3 बजे की है। तब महापौर अपने फर्स्ट फ्लोर स्थित ऑफिस में थीं। इसी दौरान सुनील गायकवाड़ नाम का दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी आया और हंगामा करने लगा। वह नियतिकारण की मांग कर रहा है। वह कर्मचारी संगठन- सम्राट अशोक संगठन का अध्यक्ष भी हैं। जिसने नियमितिकरण की मांग उठाई है। नियमित नहीं करने से नाराज होकर वह सोमवार दोपहर निगम मुख्यालय पहुंचा। इस दौरान कागजों से भरी एक पॉलीथिन को पहले महापौर की कार की छत पर रखा और फिर उसमें आग लगा दी। इसके बाद वो मंत्री, महापौर के विरोध में नारेबाजी भी करने लगा। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी सुनील के एक हाथ में सिरिंज लगी थी। ऐसे में संभावना है कि वे अस्पताल में इलाज करा रहा था और सीधे वहां से यहां आ गया। अपर आयुक्त वरुण अवस्थी का कहना है कि घटना गलत है। दोषी कर्मचारी के ऊपर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
कर्मचारी की मांग
- 29 दिवस वाले कर्मचारियों को स्थायी किया जाए।
- सभी कर्मचारियों को आठवां वेतनमान स्वीकृत किया जाए, जो शासन द्वारा अन्य कर्मचारियों को भुगतान हो रहा है।
- सभी कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन दी जाए।
- नगर निगम भोपाल में कार्यरत कर्मचारियों से दलालों को दूर किया जाए।
भोपाल नगर निगम महापौर की ऑफिस द्वारा बताया गया है कि, पार्किंग में सीसीटीवी कैमरे भी लगे थे। पूरी घटना रिकॉर्ड हुई है। महापौर ने भी रिकॉर्डिंग देखी। संबंधित कर्मचारी पर पुलिस कार्रवाई भी की जा रही है।

