वेटिंग शिक्षक संघ भोपाल में तीन दिवसीय महापड़ाव डालने जा रहे हैं

Updesh Awasthee
भोपाल, 21 अगस्त 2026:
प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार का सपना संजोए हजारों योग्य युवाओं का धैर्य अब जवाब दे गया है। 'वेटिंग शिक्षक संघ, वर्ग-1 भर्ती 2023' के बैनर तले प्रदेश भर के अभ्यर्थी राजधानी के अंबेडकर पार्क, टीटी नगर में 24 अगस्त से 26 अगस्त 2026 तक तीन दिवसीय महापड़ाव डालने जा रहे हैं। भर्ती प्रक्रिया में पदवृद्धि और द्वितीय काउंसलिंग की मांग को लेकर पिछले तीन वर्षों से जारी यह संघर्ष अब एक निर्णायक मोड़ पर आ पहुंचा है। धैर्य की सीमा लांघ चुके अभ्यर्थी अब प्रशासनिक आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस नियुक्ति आदेश के लिए भोपाल की सड़कों पर उतरने को विवश हैं।

कानूनी पेच या प्रशासनिक लकवाग्रस्तता?

जांच और साक्ष्यों से स्पष्ट होता है कि भर्ती प्रक्रिया में वर्तमान गतिरोध 'अमोल सोले प्रकरण' और उससे जुड़ी SLP डायरी नंबर 14600/2025 की आड़ में पैदा किया गया है। विभाग द्वारा न्यायालय के 'यथास्थिति' (Status-quo) आदेश को एक 'ढाल' के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि पूरी प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाला जा सके। विडंबना यह है कि यह कानूनी विवाद प्रत्यक्ष रूप से केवल 11 अभ्यर्थियों तक सीमित है, लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग ने इसे आधार बनाकर हजारों पात्र उम्मीदवारों की नियुक्ति पर अघोषित रोक लगा दी है।

11 बनाम हजारों का अन्याय: क्या मुट्ठी भर 11 अभ्यर्थियों के न्यायिक प्रकरण की आड़ में हजारों योग्य शिक्षकों का भविष्य अनिश्चितकाल के लिए कुचला जा सकता है? विभाग का 'यथास्थिति' का बहाना प्रशासनिक विफलता की पराकाष्ठा है।

विभागीय उदासीनता और मानसिक अवसाद का कुचक्र

वर्ष 2023 से शुरू हुआ यह संघर्ष अब अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है, लेकिन परिणाम आज भी शून्य है। प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, पिछले डेढ़ साल से सर्वोच्च न्यायालय की मुख्य पीठ में विभाग द्वारा कोई 'प्रभावी पैरवी' नहीं की गई है। जब भी सुनवाई का अवसर आता है, विभाग की शिथिलता के कारण केवल 'तारीख पर तारीख' का सिलसिला आगे बढ़ जाता है। बार-बार दिए गए ज्ञापनों और विभागीय मंत्रियों के खोखले आश्वासनों ने अभ्यर्थियों को 'मानसिक अवसाद और अनिश्चितता के कुचक्र' में धकेल दिया है। अभ्यर्थी अब यह महसूस करने लगे हैं कि प्रशासन जानबूझकर इस मामले को सुलझाने के बजाय उलझाने में रुचि ले रहा है। 

सत्ता और प्रशासन से सीधे प्रश्न

शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री मोहन यादव, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह और DPI आयुक्त अभिषेक सिंह की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कुछ तीखे प्रशासनिक प्रश्न दागे हैं:
प्रदेश के विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी और हजारों योग्य अभ्यर्थियों की उपलब्धता के बावजूद द्वितीय काउंसलिंग का मार्ग प्रशस्त करने में शासन को क्या आपत्ति है?
क्या सीमित अभ्यर्थियों के प्रकरण के कारण पूरी भर्ती को ठप रखना एक नियोजित प्रशासनिक विफलता नहीं है?
यदि विभाग वास्तव में समाधान चाहता है, तो सर्वोच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ताओं के माध्यम से प्रभावी और गंभीर पैरवी सुनिश्चित क्यों नहीं की जा रही है?

शिक्षक संघ की 5 सूत्रीय प्रमुख मांगें

आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब बिना किसी ठोस निर्णय के वापस नहीं लौटेंगे। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
  • पदों में न्यायसंगत वृद्धि: वर्ग-1 शिक्षक भर्ती 2023 के विज्ञापित पदों में तत्काल सम्मानजनक वृद्धि की जाए।
  • द्वितीय काउंसलिंग का तत्काल शंखनाद: पदवृद्धि के साथ द्वितीय काउंसलिंग की समयबद्ध प्रक्रिया बिना किसी विलंब के शुरू हो।
  • सर्वोच्च न्यायालय में गंभीर पैरवी: अमोल सोले प्रकरण (SLP डायरी नंबर 14600/2025) के शीघ्र निपटारे हेतु विभाग प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करे।
  • पात्र अभ्यर्थियों के हितों का संरक्षण: 11 अभ्यर्थियों के प्रकरण का पृथक समाधान निकालकर शेष हजारों पदों पर भर्ती सुचारू की जाए।
  • नियुक्ति का स्पष्ट रोडमैप: वर्षों से प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों के लिए समयबद्ध नियुक्ति आदेश जारी किए जाएं।

आंदोलन की रणनीति और लोकतांत्रिक संकल्प

पुलिस प्रशासन से प्राप्त विधिवत अनुमति के अनुसार, यह आंदोलन 24 अगस्त 2026 (सोमवार) से 26 अगस्त 2026 (बुधवार) तक चलेगा। संघ के पदाधिकारियों ने संकल्प दोहराया है कि यह प्रदर्शन पूर्णतः शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और अहिंसात्मक होगा। अभ्यर्थी प्रशासन द्वारा निर्धारित सभी नियमों का सम्मान करते हुए अपनी मांगें बुलंद करेंगे। यह आंदोलन किसी दल के खिलाफ नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक सुस्ती के खिलाफ है जिसने हजारों घरों के चिराग बुझाने की कगार पर पहुंचा दिए हैं।

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