शशि थरूर ने दतिया का द भी नहीं जानते और दुनिया को दतिया के संकेत बता रहे हैं

Updesh Awasthee
भोपाल, 28 अगस्त 2026:
बुद्धिजीवियों की सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह होती है कि वह अपने आप को बुद्धिजीवी मान लेते हैं और उसके बाद अपनी बुद्धि को जीवित रखने के लिए कोई प्रयास नहीं करते। शशि थरूर, कांग्रेस पार्टी के बड़े विद्वान नेता हैं। उन्होंने सारी दुनिया देखी है लेकिन गारंटी के साथ कहा जा सकता है कि दतिया नहीं देखा। वह दतिया का द भी नहीं जानते, और लगातार चौथी बार वह अपने आर्टिकल में दतिया का उल्लेख ऐसे कर रहे हैं जैसे उन्होंने दतिया के विधानसभा उपचुनाव पर पीएचडी कर ली हो। 

इंडियन एक्सप्रेस भी ऐसे ही ब्रांडेड विद्वानों को महत्व देते हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने शशि थरूर का एक और आर्टिकल प्रकाशित किया है। वैसे तो इस आर्टिकल में बहुत कुछ लिखा हुआ है लेकिन अपन केवल दतिया मध्य प्रदेश की बात करेंगे। दतिया उपचुनाव के नतीजे ने भारतीय राजनीति की भावी दिशा का एक नया संकेत दिया है। पता नहीं दतिया के चुनाव से श्री थरूर को भारतीय राजनीति की भावी दिशा कैसे दिखाई दे रही है। यहां भाजपा ने ऐसे प्रत्याशी को टिकट दिया, जो दतिया का तथा लेकिन दतिया के लोग उसे जानते नहीं थे। जिस नेता ने चुनाव जीतने के लिए दिन-रात मेहनत की उसका टिकट काट दिया गया, और एक ऐसा कांग्रेस का नेता चुनाव जीत गया, जिसको टिकट की उम्मीद तक नहीं थी। 

श्री थरूर किस दिशा की बात कर रहे हैं। क्या भारतीय राजनीति में सफलता के लिए एक विधानसभा से कई बार चुनाव हार चुके नेताओं को किसी दूसरे विधानसभा से टिकट देना चाहिए? दतिया विधानसभा का उपचुनाव अपने आप में एक कहानी है। दतिया विधानसभा का गणित बिल्कुल अलग है। यहां के लोगों का सोचने और समझने का तरीका बिल्कुल अलग है। किसी भी विधानसभा की समीक्षा करने से पहले, संबंधित विधानसभा का दौरा करना जरूरी होता है। हर विधानसभा में 3-4 इलाके होते हैं और वहां पर लोगों की राजनीति को समझने का तरीका अलग होता है। सोने का चश्मा पहनने से आंखों की रौशनी नहीं बढ़ती। 

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!