भोपाल, 15 अगस्त 2026: मध्य प्रदेश में जनजातीय क्षेत्र विकास परियोजना (TADP) की डायरेक्टर IAS नेहा मारव्या के खिलाफ अधिकारियों और कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। स्वतंत्रता दिवस समारोह के ठीक 1 दिन पहले 14 अगस्त शुक्रवार को 100 से अधिक अधिकारियों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और 'pen down' strike शुरू कर दी, जिससे कार्यालयों का काम पूरी तरह ठप हो गया।
Allegations of Misbehavior and Administrative Pressure on TADP Officers
अधिकारियों ने आईएएस नेहा मारव्या पर अमर्यादित व्यवहार (misbehavior) और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। एडिशनल कमिश्नर संजय वार्ष्णेय के अनुसार, एक समीक्षा बैठक के दौरान दो महिला अधिकारियों को अपमानित कर मीटिंग रूम से बाहर निकाल दिया गया था। इसके अतिरिक्त, एक महिला एडिशनल डायरेक्टर ने आरोप लगाया कि लोकसभा प्रश्न (Lok Sabha question) की तत्काल जानकारी न होने पर उन्हें कड़ी फटकार लगाई गई, जबकि उन्होंने स्पष्ट किया था कि वे दिल्ली से जानकारी जुटाकर प्रदान कर देंगी।
Impact on Food Grant Scheme and Delay in Aahar Anudan Yojana Payment
इस प्रशासनिक खींचतान का सीधा असर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ रहा है। Aahar Anudan Yojana (Food Grant Scheme) के तहत बैगा, सहारिया और भारिया समुदायों की लगभग 2.40 लाख महिलाओं को मिलने वाली 30 करोड़ रुपये की सहायता राशि (अगस्त माह की) अभी तक उनके खातों में नहीं पहुंची है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक कार्यप्रणाली में सुधार नहीं होता, तब तक जनकल्याणकारी योजनाओं का संचालन प्रभावित होता रहेगा।
Impractical Deadlines for 50-Year-Old Records and Measurement Books
अधिकारियों ने आईएएस मारव्या की कार्यशैली को "अव्यावहारिक" बताते हुए कहा कि उनसे 40-50 साल पुराने रिकॉर्ड्स तुरंत उपलब्ध कराने की मांग की जाती है। उदाहरण के लिए, यदि कोई योजना 1974 में शुरू हुई थी, तो उसके शुरुआती वर्षों के दस्तावेज मांगे जाते हैं। इसके अलावा, फील्ड वर्क से जुड़ी 'measurement books' की जानकारी मात्र 3 घंटे की समय सीमा (short time) के भीतर मांगी जा रही है, जो कर्मचारियों की कमी के कारण संभव नहीं है। समय पर जानकारी न मिलने पर नोटपैड में प्रतिकूल टिप्पणियां (adverse remarks) दर्ज की जाती हैं।
MP State ST Commission Letter to CM Mohan Yadav Regarding Administrative Issues
इस विवाद के बीच मध्य प्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग (ST Commission) ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। आयोग के अध्यक्ष रामलाल रौतेल ने PM-JANMAN, SPMU और DPMU जैसी योजनाओं के फंड उपयोग और पारदर्शिता (transparency) की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जनजातीय योजनाओं का संचालन निर्धारित प्रशासनिक नियमों के अनुसार होना चाहिए ताकि वास्तविक लाभार्थियों को उनका हक मिल सके।
Gazetted Officers Association Demands and Meeting with Chief Secretary
राजपत्रित अधिकारी संघ (Gazetted Officers' Association) ने भी मुख्य सचिव को पत्र लिखकर आईएएस नेहा मारव्या के व्यवहार पर कड़ी आपत्ति जताई है। संघ ने मांग की है कि अधिकारियों पर बनाया जा रहा अनावश्यक दबाव कम किया जाए और कार्यालय समय के बाद काम करने के निर्देशों को वापस लिया जाए। वर्तमान में, पीड़ित अधिकारी और कर्मचारी अपनी समस्याओं को वरिष्ठ स्तर पर रखने के लिए मुख्य सचिव से मिलने का समय मांग रहे हैं ताकि इस प्रशासनिक गतिरोध को समाप्त किया जा सके।

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