नाग पंचमी 2026: जानिए 'नागबिम्ब दान' का विशेष महत्व, शुभ संयोग और पूजन विधि

Updesh Awasthee
सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र मानी गई है। इस वर्ष 17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी का महापर्व बड़े ही श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जाएगा। यह दिन नाग देवताओं की आराधना, सर्प-भय से मुक्ति और राहू-केतु जनित दोषों की शांति के लिए अत्यंत विशेष माना जाता है।
शास्त्र ग्रंथ 'निर्णयसिंधु' और प्राचीन कथाओं के अनुसार, नाग पंचमी का व्रत और पूजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका वैज्ञानिक और प्राकृतिक महत्व भी है।

नाग पंचमी पूजन की शास्त्रीय फलश्रुति

'निर्णयसिंधु' में महर्षि देवल के वचनों का उल्लेख करते हुए नाग पंचमी के पूजन के कई विशिष्ट लाभ बताए गए हैं:
• सर्प-दंश और भय से मुक्ति: ग्रंथों के अनुसार "न तान्दशन्ति पन्नगाः", अर्थात् जो व्यक्ति पंचमी तिथि को विधि-विधान से नागों का पूजन करता है, उसे सर्पों का भय नहीं रहता और वह सर्प-दंश से सुरक्षित रहता है।
• विषैले प्रभावों का नाश: इस दिन नाग देवताओं को दूध (क्षीर) से स्नान कराने और उन्हें अर्पण करने से जीवन से शारीरिक और मानसिक विषैले प्रभाव ("विषाणि तस्य नश्यन्ति") शांत होते हैं।
• वंश की रक्षा और पारिवारिक सुख: चतुर्थी से युक्त पंचमी (नागचतुर्थी का संयोग) को अत्यंत शुभ माना गया है, जो जातक के कुल और वंश की रक्षा कर सौभाग्य प्रदान करती है।
 शास्त्रों के अनुसार नाग पंचमी का पूजन मध्याह्नव्यापिनी (दोपहर के समय रहने वाली) पंचमी तिथि में ही श्रेष्ठ माना जाता है।
• पूजन सामग्री: ताजे दूध, दूर्वा, कुंकुम, अक्षत, और पुष्प से नाग देव का पूजन करें।
• परंपरा:  इस दिन भूमि की खुदाई या जोताई न करने का विधान है ताकि नागों को कोई कष्ट न पहुंचे।

ग्रहण दोष और राहू शांति के लिए 'नागबिम्ब दान' का महत्व:

'निर्णयसिंधु' के अनुसार नाग पंचमी और ग्रहण काल के दौरान नागबिम्ब दान (सोने चांदी या धातु के नाग की मूर्ति का दान) का विशेष विधान है
1. किन्हें करना चाहिए: जिन जातकों की कुंडली में राहू-केतु दोष हो, कालसर्प दोष हो या जिनकी जन्म राशि/नक्षत्र पर ग्रहण का प्रभाव पड़ा हो, उनके लिए यह दान अचूक फलदायी है।
2. दान की विधि: अपनी सामर्थ्य अनुसार स्वर्ण या तांबे की नाग प्रतिमा बनाएं। इसे तांबे या कांस्य के पात्र में घी भरकर स्थापित करें।
विशेष मंत्र: दान करते समय राहू देव से रक्षा की प्रार्थना करते हुए इस मंत्र का जप करें:
"विधुंतुद नमस्तुभ्यं सिंहिकानन्दनाच्युत। दानेनानेन नागस्य रक्ष मां वेधजद्भयात्॥"
यह दान जातक को जीवन की गुप्त बाधाओं, भय और रोगों से मुक्ति दिलाता है।

नाग पंचमी की पौराणिक कथा:

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना नदी को कालिया नाग के विष से मुक्त कराया था और कालिया नाग का मान-मर्दन कर उसे अभयदान दिया था, वह दिन सावन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी ही था। तभी से नागों की पूजा और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है।
कालिया नाग के दमन के अलावा, नाग पंचमी और सर्पों की उत्पत्ति व नाग यज्ञ से रक्षा की मुख्य कथा महाभारत में आती है। राजा जनमेजय के सर्प सत्र (नाग यज्ञ) को आस्तिक मुनि द्वारा सावन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ही समाप्त कराया गया था और नागों की रक्षा हुई थी।
नाग पंचमी से जुड़ी पौराणिक कथाओं का मुख्य उल्लेख 'महाभारत' (विशेषकर 'आदि पर्व' के अस्तिक पर्व), 'भविष्य पुराण', और 'स्कन्द पुराण' में विस्तार से मिलता है
17 अगस्त 2026 को पड़ने वाली यह नाग पंचमी आपके जीवन में सुख, समृद्धि और आरोग्य लेकर आए। नाग देव की पूजा और भक्ति भाव से किया गया दान आपको हर प्रकार के भयों से मुक्त रखेगा। 
प्रस्तुति: श्री गीतांजलि ज्योतिष केंद्र, इंदौर।

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