भोपाल, 15 अगस्त 2026: मध्य प्रदेश में एक ऐसा दिव्य शिवलिंग है, जिसकी स्थापना वहां के थानेदार ने की लेकिन बाद में पुलिस उसी शिवलिंग की रक्षा नहीं कर पाई। शिवलिंग को नुकसान पहुंचाने वालों का कुछ नहीं किया बल्कि शिवलिंग को थाने में बंद कर लिया। 1988 से आज तक 38 साल हो गए। इस बीच साध्वी उमा भारती और शिवराज सिंह मुख्यमंत्री रहे परंतु उन लोगों के डर के मारे आज तक पुलिस शिवलिंग को वापस उनके मंदिर में स्थापित नहीं कर पाई है। साल में सिर्फ दो दिन शिवलिंग को लाकर मंदिर में रखा जाता है। तब वह अपने भक्त अपने परिवार से मिल पाते हैं।
Raisen’s Mysterious Shivling: Kept at Bamori Police Station Since 1988 Due to Fear of Theft
मामला मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के थाना बम्होरी का है। यहां के थानेदार ने बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ थाना परिसर में इस दिव्य शिवलिंग की स्थापना करवाई थी। बहुत कम समय में यह शिवलिंग हजारों शिव भक्तों की श्रद्धा का केंद्र बन गया था। लोग शिवलिंग का अभिषेक करने और पूजा करने के लिए पुलिस थाना परिसर में नियमित रूप से आते थे। मतलब पुलिस थाने का एक हिस्सा श्रद्धा और भक्ति से आनंदित हो उठा था। बाद में एक नया थाना भवन परिसर बना। पूरा पुलिस स्टाफ पुराने थाने से नए थाने में ट्रांसफर हो गया लेकिन शिवलिंग पुराने थाने में ही स्थापित रहा। लोग नियमित रूप से पूजा पाठ करते रहे। एक दिन अचानक शिवलिंग गायब हो गया।
सुबह चबूतरा खाली देख दो पक्षों में हंगामा हो गया, पूरे बम्होरी का बाजार अनिश्चित काल के लिए बंद हो गया। कई दिन तनाव रहा। पुलिस तो कुछ नहीं कर पाई लेकिन शिव भक्तों के दबाव का असर दिखाई दिया और एक रात कोई वही शिवलिंग वापस चबूतरे पर रख कर चला गया। लेकिन इसके बाद भी विवाद खत्म नहीं हुआ क्योंकि लोगों को पता चल गया था कि, शिवलिंग को मंदिर से हटाकर उनकी धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाने का काम किया गया है। लोगों ने पुलिस से कठोर कार्रवाई की मांग की। तनाव के कारण प्रशासन को डर था की शिवलिंग वापस चोरी हो सकता है इसलिए एहतियात के तौर पर शिवलिंग एवं उसकी जलहरी को पुलिस अभिरक्षा में नए थाना भवन में रखवा दिया।
इसके बाद प्रशासन और पुलिस किसी ने ध्यान नहीं दिया। एक प्रशासनिक आदेश के अंतर्गत शिवलिंग को पुलिस अभिरक्षा में लिया गया है। प्रशासनिक आदेश के बिना मुक्ति नहीं किया जा सकता और आप तो जानते ही हो मध्य प्रदेश में प्रशासन दबाव के बिना काम नहीं करता, फिर चाहे प्रेशर, पॉलिटिक्स का हो, पब्लिक का हो या फिर....। हिंदू संगठनों की मांग पर पुलिस ने यह व्यवस्था कर दी है कि, साल में केवल दो बार ही महाशिवरात्रि और सावन महीने के रक्षाबंधन के दूसरे रोज कजलियों के त्यौहार पर शिवलिंग एवं जलहरी को उस स्थान पर ले जाया जाता है, जहां उनकी विधि विधान से चबूतरे पर स्थापना की गई थी।
भगवान शिव साल में दो बार पुलिस अभिरक्षा से बाहर आते हैं और शाम को वापस थाने पहुंच जाते हैं।
नए थाने में उन्हें सम्मानपूर्वक स्थान दिया गया है, रोज पूजा भी होती है, लेकिन ना तो उनके भक्त उनका अभिषेक कर पाते हैं और ना ही वह अपने पूरे परिवार (माता पार्वती, कार्तिकेय, श्री गणेश, नंदी महाराज) और भक्तों को दर्शन दे पाते हैं।

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