मध्य प्रदेश में माध्यमिक शिक्षक भर्ती के लिए IGNOU का 2 वर्षीय डिप्लोमा मान्य: हाई कोर्ट

Updesh Awasthee
जबलपुर, 22 अगस्त 2026
: मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर की माननीय युगलपीठ ने माध्यमिक शिक्षक के पद पर नियुक्ति एवं प्राथमिक शिक्षक से माध्यमिक शिक्षक के पद पर पदोन्नति के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू), नई दिल्ली से प्राप्त दो वर्षीय डी.पी.ई. (डिप्लोमा इन प्राइमरी एजुकेशन) को मान्य योग्यता माना है। माननीय न्यायालय ने राज्य शासन द्वारा प्रस्तुत अपीलों को निरस्त करते हुए एकलपीठ द्वारा अभ्यर्थियों के पक्ष में दिए गए आदेश को बरकरार रखा। 

MP Secondary Teacher Recruitment: High Court Recognises IGNOU’s Two-Year Diploma

मामले में अभ्यर्थीगण ने माध्यमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात दस्तावेज सत्यापन कराया था, किंतु उनकी नियुक्ति इस आधार पर निरस्त कर दी गई कि उनके पास दो वर्षीय डी.पी.ई. (डिप्लोमा इन प्राइमरी एजुकेशन) है, जबकि विभाग द्वारा अन्य योग्यता की आवश्यकता बताई गई थी। अभ्यर्थीगण की ओर से माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष यह पक्ष रखा गया कि माध्यमिक शिक्षक पद के लिए निर्धारित योग्यता में स्नातक डिग्री के साथ दो वर्षीय डिप्लोमा अथवा उसकी समकक्ष योग्यता निर्धारित है। अभ्यर्थीगण के पास स्नातक डिग्री के साथ इग्नू, नई दिल्ली से प्राप्त दो वर्षीय डी.पी.ई. डिप्लोमा है, जिसे संबंधित प्राधिकारियों द्वारा मान्यता प्राप्त है।

मामले में यह भी प्रस्तुत किया गया कि राज्य शासन द्वारा दिनांक 28.02.2013 को जारी परिपत्र के माध्यम से इग्नू द्वारा प्रदान किए गए डी.पी.ई. को डी.एड./डी.एल.एड. के समकक्ष मान्यता प्रदान की गई थी तथा उक्त मान्यता को शासन द्वारा कभी वापस लिए जाने अथवा समाप्त किए जाने का कोई आधार प्रस्तुत नहीं किया गया। इस महत्वपूर्ण तथ्य को ध्यान में रखते हुए माननीय एकलपीठ ने अभ्यर्थीगण के पक्ष में निर्णय पारित करते हुए डी.पी.ई. को मान्य एवं समकक्ष योग्यता माना था। उक्त निर्णय के विरुद्ध राज्य शासन द्वारा माननीय उच्च न्यायालय की युगलपीठ के समक्ष अपील प्रस्तुत की गई।

माननीय युगलपीठ ने समस्त तथ्यों, अभिलेखों एवं दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के पश्चात पाया कि माननीय एकलपीठ द्वारा पारित आदेश पूर्णतः उचित है। न्यायालय ने माना कि इग्नू से प्राप्त दो वर्षीय डी.पी.ई. एक मान्यता प्राप्त व्यावसायिक डिप्लोमा है तथा इसे निर्धारित योग्यता के लिए समकक्ष माना जाना आवश्यक है। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि उक्त डी.पी.ई. कार्यक्रम को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा शैक्षणिक सत्र 2009-2010 से पूर्वव्यापी प्रभाव से मान्यता प्रदान की गई है।

राज्य शासन की अपीलें खारिज

माननीय उच्च न्यायालय की युगलपीठ ने राज्य शासन द्वारा प्रस्तुत रिट अपील क्रमांक 3576/2025, 3554/2025 एवं 328/2026 में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं पाया और सभी अपीलों को खारिज कर दिया।

इस निर्णय से माध्यमिक शिक्षक पद पर नियुक्ति तथा प्राथमिक शिक्षक से माध्यमिक शिक्षक पद पर पदोन्नति के लिए दो वर्षीय डी.पी.ई. डिप्लोमा धारकों को महत्वपूर्ण कानूनी राहत प्राप्त हुई है।

प्रकरण में अभ्यर्थीगण का पक्ष माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष, अधिवक्ता श्री सत्येन्द्र ज्योतिषी, अधिवक्ता श्री अभिषेक मिश्रा, अधिवक्ता श्री अनुज मिश्रा, अधिवक्ता श्री अंकित तिवारी द्वारा रखा गया।

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