भोपाल, 14 अगस्त 2026: मध्य प्रदेश में सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के लिए 'दो संतान' की बाध्यता से जुड़ा मामला एक बार फिर गरमा गया है। मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेशचन्द्र शर्मा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर वर्ष 2000 में लागू किए गए इस नियम को निरस्त करने की घोषणा को जल्द से जल्द अमल में लाने का आग्रह किया है।
पत्र के माध्यम से अध्यक्ष रमेशचन्द्र शर्मा ने मुख्यमंत्री का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है कि विभिन्न शासकीय संगठनों की निरंतर मांग के बाद सरकार ने इस नियम को निरस्त करने की घोषणा की थी। हालांकि, आज दिनांक 14 अगस्त 2026 तक इस संबंध में कोई भी आधिकारिक या समुचित आदेश जारी नहीं किए गए हैं। आदेशों के अभाव में उन कर्मचारियों के बीच सेवा से पृथक किए जाने का भय बना हुआ है, जिन पर यह नियम लागू होता है।
नियम की पृष्ठभूमि
मध्य प्रदेश में सरकारी सेवा हेतु अर्हता और सेवा शर्तों में दो संतान की बाध्यता का नियम वर्ष 2000 में लाया गया था। सामान्य प्रशासन विभाग के 10 मार्च 2000 के राजपत्र और 05 जुलाई 2000 के परिपत्र के माध्यम से इसे प्रभावी किया गया था।
नियम को बताया 'असंवैधानिक' कर्मचारी कल्याण समिति ने पत्र में इस प्रावधान को तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा जारी किया गया 'असंवैधानिक प्रावधान' करार दिया है। समिति का कहना है कि इसी कारण लंबे समय से विभिन्न कर्मचारी संगठन इसे हटाने की मांग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील
समिति के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करें ताकि वर्ष 2000 के इन नियमों को निरस्त करने की उनकी घोषणा को तत्काल प्रभाव से लागू किया जा सके। इससे हजारों कर्मचारियों को राहत मिलेगी और उनके करियर पर मंडरा रहा खतरा समाप्त हो जाएगा। रिपोर्ट: शोएब सिद्दीकी।

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