भोपाल/छतरपुर, 20 अगस्त 2026: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा एक्स (X) पर प्रसारित वीडियो में केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर लगाए गए आरोपों का तथ्यात्मक प्रतिवेदन इस प्रकार है। कि प्रभावित आबादी, विस्थापन, मुआवजा, पर्यावरण और कानून-व्यवस्था संबंधी दावे अतिरंजित व असत्य हैं। परियोजना सभी वैधानिक मंजूरियों के साथ आगे बढ़ रही है और प्रभावित परिवारों को विशेष पैकेज के तहत पर्याप्त सहायता दी जा चुकी है।
दावा 1 का खंडन – प्रभावित आबादी 50 हजार नहीं, सिर्फ 23 हजार
वीडियो में मझगांव, रुंझ, केन-बेतवा और नेगुवा परियोजनाओं से लगभग 50,000 लोगों के प्रभावित होने का दावा किया गया था। वास्तविकता यह है कि कुल प्रभावित आबादी लगभग 23,000 है।
मझगांव: 1,450 परिवार (5,640 व्यक्ति)
रुंझ: 730 परिवार (1,906 व्यक्ति)
केन-बेतवा (पन्ना-छतरपुर): 5,039 परिवार (15,661 व्यक्ति)
नेगुवा: शून्य विस्थापन
केन-बेतवा से छतरपुर के 14 और पन्ना के 8 गांव प्रभावित हैं। इन 5,039 परिवारों को ₹12.50 लाख प्रति परिवार के विशेष पैकेज के तहत कुल 604.745 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए, जिनमें से 96 प्रतिशत राशि का भुगतान पहले ही हो चुका है। पन्ना के 8 गांवों का पुनर्वास मानसून से पहले पूरा कर लिया गया। वर्षा ऋतु में जबरन विस्थापन का आरोप पूरी तरह असत्य है। मुआवजा वितरण 1.5 वर्ष पूर्व पूरा हो चुका था।
राज्य सरकार ने 10 जुलाई 2026 को रुंझ और मझगांव परियोजनाओं के प्रभावितों को भी समान ₹12.50 लाख प्रति परिवार का विशेष पैकेज स्वीकृत कर दिया है, जिसका भुगतान प्रक्रियाधीन है।
दावा 2 का खंडन – पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण सुनिश्चित
21 आदिवासी बहुल ग्राम, 40 लाख पेड़ और 100 से अधिक बाघ प्रभावित होने का दावा गलत है। परियोजना शुरू होने से पहले पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) और पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त की गई। पन्ना टाइगर रिजर्व के लिए इंटीग्रेटेड लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान तैयार किया गया। कैचमेंट एरिया ट्रीटमेंट और वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट प्लान वन विभाग द्वारा लागू किए जा रहे हैं। वन स्वीकृति स्टेज-2 के अनुसार एफआरएल से 10 मीटर नीचे तक कोई पेड़ नहीं काटा गया है।
दावा 3 का खंडन – परियोजना पर कोई रोक नहीं थी
2011 में रोक लगाने का उल्लेख भ्रामक है। 2005 में केंद्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच एमओयू हुआ था। 2021 तक सभी वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त होने के बाद 22 मार्च 2021 को समझौता ज्ञापन और 8 दिसंबर 2021 को प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई।
दावा 4 का खंडन – कोई कोर्ट केस लंबित नहीं
सर्वोच्च न्यायालय या राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में परियोजना से संबंधित कोई प्रकरण प्रचलन में नहीं है। 6,017 हेक्टेयर वनभूमि की स्टेज-1 और स्टेज-2 स्वीकृति तथा वाइल्डलाइफ क्लियरेंस की शर्तों का पालन करते हुए निर्माण कार्य शुरू किया गया है।
दावा 5 और 6 का खंडन – कानून का पूरा पालन
लगभग 7,000 परिवार प्रभावित होने का दावा गलत है। भू-अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन अधिनियम 2013 की सभी प्रक्रियाओं (ग्रामसभाओं सहित) का पालन किया गया। निजी भूमि के लिए बाजार मूल्य से अधिक ₹12.50 लाख प्रति हेक्टेयर प्रतिकर दिया गया। वन अधिकार अधिनियम (FRA) के अंतर्गत पात्र परिवारों की संख्या शून्य है।
दावा 7 और 9 का खंडन – पुलिस कार्रवाई और महिलाओं संबंधी आरोप असत्य
2,000 से 5,000 पुलिस बल और 300 से अधिक प्रकरणों का दावा अतिरंजित है। दौधधन बांध स्थल पर पथराव और निर्माण बाधित करने के प्रयासों के दौरान ही न्यूनतम पुलिस मदद ली गई। रात 2 बजे लगभग 50 महिलाओं को 10 किलोमीटर दौड़ाकर भगाने का आरोप पूर्णतः असत्य और भ्रामक है।
दावा 8 का खंडन – स्वैच्छिक पुनर्वास और बुनियादी सुविधाएं
प्रभावित परिवारों ने स्वयं विशेष पैकेज का विकल्प चुना। ₹12.50 लाख प्रति परिवार का एकमुश्त भुगतान किया गया। कटऑफ डेट मार्च 2024 तय कर 313 अतिरिक्त परिवारों को पैकेज स्वीकृत किया गया है। छतरपुर में करीदिया (179 प्लॉट), राईपुरा (154 प्लॉट) और सलैया (70 प्लॉट) में कॉलोनी बसाई जा रही है, जहां बिजली और पानी की व्यवस्था हो रही है।
आंदोलन का घटनाक्रम और राजनीतिक पृष्ठभूमि
अप्रैल 2026 से शुरू हुए आंदोलन में जल, मिट्टी, चिता और फांसी सत्याग्रह किए गए। 19 जुलाई को प्रशासन ने स्थल खाली कराया। आंदोलन के प्रमुख चेहरे अमित भटनागर (पूर्व आप प्रत्याशी, 2023 चुनाव में 2.49 प्रतिशत वोट) और दिव्या अहिरवार (आप पार्षद) रहे। स्थानीय विश्लेषकों के अनुसार, कई प्रभावित परिवार पहले मुआवजा ले चुके हैं और अब बढ़ी सदस्य संख्या के आधार पर अतिरिक्त राशि मांग रहे हैं। पन्ना के अन्य डैम परियोजनाओं के विस्थापितों की संख्या आंदोलन में अधिक है।
11 अगस्त को छतरपुर कलेक्टर ने 14 गांवों में दोबारा सर्वे के आदेश दिए और 59 लोगों के लिए 7.37 करोड़ रुपये स्वीकृत किए। 13 अगस्त को राहुल गांधी से मुलाकात के बावजूद स्थानीय स्तर पर कांग्रेस की सक्रियता नगण्य रही।
प्रशासन का कहना है कि केन-बेतवा परियोजना बुंदेलखंड की जल समस्या का दीर्घकालिक समाधान है। सभी दावों का तथ्यों से खंडन हो चुका है और पुनर्वास प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से जारी है।

