भोपाल, 20 अगस्त 2026: जीतू पटवारी अब तक कृपा पात्र थे, दतिया चुनाव के बाद पहली बार उनके आलोचकों ने उन्हें पात्रता परीक्षा पास मान लिया लेकिन दिल्ली से एक ऐसा संकट आया है जो डर पैदा करता है। कहीं जीतू पटवारी के साथ भी वही सब कुछ तो नहीं हो जाएगा जो अरुण यादव के साथ हुआ था।
अरुण यादव के साथ क्या हुआ था
जिनको नहीं पता उनके लिए संक्षिप्त में, अरुण यादव के बारे में भी कहा जाता था कि वह राहुल गांधी की टीम के सबसे प्रमुख सदस्य हैं। पिता सुभाष यादव की उंगली पड़कर राजनीति सीखी है, इसलिए पॉलिटिक्स के धुरंधर खिलाड़ी भी हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए थे। 2018 के विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे थे, दिन रात एक कर दिया था, घर परिवार छोड़ नहीं था बल्कि पूरे घर परिवार को काम पर लगा दिया था। माहौल बन गया था और पक्का था कांग्रेस पार्टी चुनाव जीतेगी, लेकिन दिल्ली ने धोखा दे दिया और अचानक प्रदेश अध्यक्ष बदल गया। मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार तो बनी लेकिन अरुण यादव का पता नहीं था। वह आज भी निचोड़ जा चुके नींबू की तरह...।
जीतू पटवारी के साथ क्या हो गया?
जब जीतू पटवारी को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया तो सब ने कहा, राहुल गांधी के खास है इसलिए प्रदेश अध्यक्ष पद मिला है, जैसे अरुण यादव को मिला था। 2023 के विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। दिन-रात एक कर दिया है। घर परिवार छोड़ा नहीं है, बल्कि अपने घर को ही कांग्रेस का कार्यालय बना दिया है और पूरे परिवार को काम पर लगा दिया है। दतिया में जब कांग्रेस पार्टी ने चुनाव जीत तो उम्मीद थी, राहुल गांधी दिल्ली बुलाएंगे, शाबाशी देंगे, मिठाई खिलाएंगे, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। उल्टा हाल ही में एक वीडियो जारी हो गया। आम आदमी पार्टी का चुनाव हारा हुआ बेरोजगार नेता, जिसको उसकी विधानसभा की जनता भी पसंद नहीं करती, राहुल गांधी के पास बैठा हुआ था। मध्य प्रदेश के मुद्दे समझा रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे राहुल गांधी उसके चश्मे से मध्य प्रदेश देख रहे हैं। इसका मतलब समझते हो विनोद?
राजनीति में इसका मतलब होता है कि राहुल गांधी को, जीतू पटवारी से उम्मीद नहीं रह गई है। वह मध्य प्रदेश में नए नेता की तलाश कर रहे हैं।



