भोपाल/उज्जैन/ओरछा: आज दिनांक 31 अगस्त 2026 का दिन सनातन धर्म की पावन परंपरा के अनुसार अत्यंत मंगलकारी और आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण था। कजरी तीज, बहुला चतुर्थी, महा संकष्टहर चतुर्थी और हेरम्ब संकष्टी के इस परम शुभ महायोग तथा द्वितीय चातुर्मास के सप्तम दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दिनचर्या भी अत्यंत अलौकिक रही। उन्होंने प्रातः काल बुंदेलखंड के हृदयस्थल ओरछा में प्रभु श्रीरामराजा सरकार के दिव्य 'श्री रामराजा लोक' के प्रांगण में उपस्थिति दर्ज कराई। संध्याकाल की वेला में वे अवंतिकापुरी (उज्जैन) के महाकाल दरबार पहुँचे और क्षिप्रा तट के रामघाट पर पालकी में विराजित भगवान चन्द्रमोलेश्वर का पूर्ण विधि-विधान से पूजन-अर्चन और जलाभिषेक किया। इस प्रकार, एक ही पावन दिवस पर 'हरि' (राजाराम सरकार) और 'हर' (बाबा महाकाल) दोनों के श्रीचरणों में मुख्यमंत्री की यह वंदना लोक-कल्याण और लोक-समृद्धि की कामना का एक अनुपम अनुष्ठान बन गई।"
ओरछा बनेगा अद्भुत टूरिस्ट डेस्टिनेशन: 'नेचुरल एयर कंडीशनिंग' का दिखेगा
जादू सीएम मोहन यादव ने ओरछा में चल रहे कंस्ट्रक्शन और रेनोवेशन वर्क्स का बारीकी से मुआयना किया। उन्होंने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि सभी काम बेहतरीन क्वालिटी के साथ तय डेडलाइन (समय-सीमा) के अंदर पूरे किए जाएं। सीएम ने बताया कि ओरछा के प्राचीन भवनों में तत्कालीन समय की बहुत ही एडवांस टेक्नोलॉजी और आर्किटेक्चर का इस्तेमाल हुआ था। मिसाल के तौर पर, पुराने समय में एअर कंडीशनर नहीं होते थे, लेकिन यहां के महल इस तरह वातानुकूलित (एयर-कंडीशंड) बने हैं कि वे गर्मी में ठंडे और ठंड में गर्म रहते हैं।
'सावन-भादो' पिलर्स का रखा जाएगा खास ख्याल, ओरिजिनल लुक में होगा रेनोवेशन
इस पूरे प्रोजेक्ट में ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा को लेकर विशेष ध्यान रखा जा रहा है। सीएम ने जुझार सिंह महल और जहांगीर महल का विजिट किया। आर्किटेक्ट्स ने उन्हें जानकारी दी कि मंदिर परिसर के प्राचीन 'सावन-भादो' पिलर्स (स्तंभों) को बिना कोई नुकसान पहुंचाए उनके आसपास के एरिया को सुंदर और सुगम (कंफर्टेबल) बनाया जा रहा है। भवनों के जीर्णोद्धार (रेस्टोरेशन) में उसी मटेरियल का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे वे मूल रूप से बने थे, ताकि उनका ओरिजिनल लुक बना रहे।
धार्मिक सर्किट से बूस्ट होगी लोकल इकॉनमी और जॉब्स
सीएम ने कहा कि उज्जैन के महाकाल लोक के बनने के बाद वहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और वहां की इकॉनमी में बहुत बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है। इसी पैटर्न पर अब ओरछा, चित्रकूट, दतिया, नलखेड़ा, और मंदसौर जैसे बड़े धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को आपस में कनेक्ट किया जा रहा है। इससे लोकल लेवल पर टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं के लिए जॉब्स (रोजगार) के नए रास्ते खुलेंगे।
उज्जैन में दिखा परंपरा और मॉडर्न टेक्नोलॉजी का को-ऑर्डिनेशन
इससे पहले सीएम डॉ. मोहन यादव उज्जैन में बाबा महाकाल की पांचवी सवारी (राइड) में शामिल हुए। वे दत्त अखाड़े से बोट के जरिए रामघाट पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान चन्द्रमोलेश्वर का पूरे विधि-विधान से पूजन किया। इस भव्य आयोजन में परंपरा और आधुनिक टेक्नोलॉजी का शानदार तालमेल (को-ऑर्डिनेशन) दिखा। जब भगवान की पालकी रामघाट पहुंची, तो हेलीकॉप्टर से फ्लॉवर शावर (पुष्पवर्षा) की गई। इसके साथ ही 1100 बटुकों (युवा पुजारियों) ने वैदिक मंत्रोच्चार किया, 84 महादेव की थीम पर सवारी की प्लानिंग की गई और 500 से अधिक कलाकारों वाले 8 जनजातीय दलों ने अपनी शानदार सांस्कृतिक परफॉर्मेंस दी।

