भोपाल का नवाब पाकिस्तान के लिए इतना पागल था, अपनी ही बेटी पर बंदूक तान दी थी

Updesh Awasthee
भोपाल, 5 अगस्त 2026:
जब भी भारत में स्वतंत्रता समारोह की तैयारी शुरू होती है, भोपाल के जख्म हरे हो जाते हैं। पूरा भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ लेकिन पाकिस्तान के प्यार में अंधे हुए भोपाल के नवाब ने भोपाल को भारत के साथ आजाद नहीं होने दिया। वह पाकिस्तान के लिए इतना पागल था कि उसने अपनी ही बेटी की कनपटी पर बंदूक तान दी थी। यह कोई गॉसिप नहीं, इतिहास की किताब में दर्ज घटनाक्रम है और इतिहासकार का भोपाल से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने बहुत सारे सरकारी दस्तावेजों के आधार पर एक किताब लिखी और इस किताब में भोपाल के नवाब का एक छोटा सा किस्सा भी है। 

हिंदू राजाओं को स्विट्जरलैंड की तरह एक स्वतंत्र राज्य का लालच दिया था

भारतीय इतिहास की लोकप्रिय किताबों में से एक Birth of a Nation लिखने वाले इतिहासकार एवं वरिष्ठ पत्रकार Josy Joseph बताते हैं कि, भोपाल के नवाब हमीदुल्लाह एक अत्यंत परिष्कृत (sophisticated) व्यक्ति थे जिन्हें पोलो खेलने का शौक था। वह प्रिंसली स्टेट्स के 'चैंबर ऑफ़ प्रिंसेज़' (Chamber of Princes) के नेता थे। वह ऐसे राजाओं की लॉबिंग कर रहे थे, जो भारत में शामिल नहीं होना चाहते। ऐसे सभी राजाओं को भोपाल के नवाब, पाकिस्तान में शामिल होने के लिए मना रहे थे। जूनागढ़ और हैदराबाद तो पहले से ही इस लिस्ट में थे। इंदौर के होलकर, और जोधपुर के हनुमत सिंह को भी उन्होंने अपने साथ मिल लिया था। रावण कौर के दीवान कर सीपी रामास्वामी अय्यर को उन्होंने अपना मुख्य सलाहकार बनाया था। बड़ी गहरी दोस्ती कर ली थी। उन्होंने हिंदू राजाओं को लालच दिया था कि यदि हम पाकिस्तान के साथ नहीं जाएंगे तो दक्षिण एशिया में स्विट्जरलैंड की तरह एक स्वतंत्र राज्य बना सकते हैं। जबकि रणनीति यह थी कि एक बार भारत से अलग हो गए तो सबको मजबूरी में पाकिस्तान में आना पड़ेगा।

जोधपुर के लिए जिन्ना से ब्लैक पेपर रखवा दिया था

नवाब हमीदुल्लाह के मोहम्मद अली जिन्ना के साथ लगातार और करीबी संबंध थे। वह त्रावणकोर के दीवान सर सी.पी. रामास्वामी अय्यर, जूनागढ़ के महाराजा, इंदौर के होल्कर और हैदराबाद के निजाम के साथ लगातार समन्वय (coordination) कर रहे थे। भोपाल के नवाब ने ही जोधपुर के युवा महाराजा हनुमंत सिंह की मुलाकात जिन्ना से करवाई थी। रणनीतिक रूप से जोधपुर बहुत जरूरी था क्योंकि, भोपाल के नवाब के नक्शे में, उनके द्वारा राजी गए किए गए सभी राज्यों और पाकिस्तान के बीच में जोधपुर आता था। यदि जोधपुर शामिल नहीं होगा तो, बाकी सब पाकिस्तान में शामिल नहीं हो पाएंगे। 6 अगस्त 1947 को वह खुद महाराजा को लेकर जिन्ना के पास गए थे, जहाँ जिन्ना ने जोधपुर को पाकिस्तान में शामिल होने के लिए एक खाली कागज (blank paper) पर हस्ताक्षर करके मनचाही शर्तें भरने का प्रस्ताव दिया था। 

भारत की आजादी के समय नवाब ने कुछ विचित्र और महत्वपूर्ण कदम उठाए थे:
उन्होंने अपनी बेटी की क्लासमेट से शादी कर ली थी, जिसके कारण भोपाल की बेगमों के कड़े इतिहास वाले उनके परिवार के अंदर विद्रोह हो गया था।
उन्होंने अपने लिए एक हवाई जहाज (फोकनी) खरीदा था।
उन्होंने कराची में अपने लिए दो इमारतें खरीद ली थी। 

भोपाल के नवाब ने अपनी बेटी की कनपटी पर बंदूक तान दी थी

अगस्त के आते-आते उनकी पकड़ कमजोर होने लगी। जब उनके सलाहकार सर सी.पी. पर हमला हुआ और त्रावणकोर भारत में शामिल हो गया, तो भोपाल भी बैकफुट पर आ गया। 12 अगस्त को दिल्ली से लौटने के बाद उन्होंने अपनी बेटी से कहा कि वह बेगम (भोपाल की शासिका - Ruler - Begum of Bhopal) बन जाए क्योंकि वह पाकिस्तान जा रहे हैं। जब उनकी बेटी ने मना किया, तो उन्होंने अपनी बेटी की कनपटी पर बंदूक तक तान दी थी, लेकिन उनकी बेटी (जो एक सिंगल मदर थी) ने झुकने से मना कर दिया और कहा कि वह भोपाल को भारत से अलग नहीं होने देगी। 

इस वीडियो में 10 मिनट 25 सेकंड के बाद भोपाल की नवाब की कहानी का जिक्र है:-

वरिष्ठ पत्रकार Josy Joseph का परिचय 

जोजी जोसेफ भारत के एक जाने-माने पत्रकार और लेखक हैं। उन्हें उनकी खोजी पत्रकारिता और ऐतिहासिक विश्लेषण के लिए व्यापक रूप से जाना जाता है। उन्होंने कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं जिन्हें काफी सराहना (critical acclaim) मिली है। उनकी चर्चित किताबों में 'द साइलेंट कू' (The Silent Coup) और 'द फीस्ट ऑफ द वल्चर्स' (The Feast of Vultures) शामिल हैं। 

वर्तमान में उनकी नई पुस्तक 'बर्थ ऑफ ए नेशन: 21 डेज़ दैट मेड इंडिया' (Birth of a Nation: 21 Days That Made India) पूरे भारत में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस पुस्तक को लिखने के लिए उन्होंने और उनकी टीम ने लगभग 10 से 12 वर्षों तक विभिन्न फाइलों और प्राथमिक स्रोतों (primary sources) से जानकारी इकट्ठा की है। 

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