भोपाल, 04 अगस्त 2026: मध्य प्रदेश में जब जनसुनवाई की शुरुआत हुई थी तो इसका उद्देश्य था, कलेक्टर के साथ सभी विभागों के अधिकारी एक साथ बैठेंगे और समस्याओं का तत्काल निराकरण किया जाएगा, लेकिन भोपाल में बिल्कुल ऐसा नहीं हो रहा है। आज जनसुनवाई में एक बार फिर वही हुआ। 183 पीड़ितों से केवल आवेदन लिए गए। एक भी प्रॉब्लम सॉल्व नहीं की गई। सब लोग बड़ी उम्मीद से आए थे और एक बार फिर निराश लौट गए। भोपाल के कलेक्टर, प्रशासन के मुखिया नहीं बल्कि एप्लीकेशन कलेक्टर का रोल प्ले करते हुए दिखाई देते हैं।
कलेक्टर कार्यालय द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी
कलेक्टर कार्यालय से प्रेस को दी गई जानकारी के अनुसार, श्री प्रियंक मिश्रा ने मंगलवार को जिले से जनसुनवाई में आए नागरिकों की समस्याएं सुनीं। जनसुनवाई में आए नागरिकों से 183 आवेदन प्राप्त हुए। इस अवसर पर एडीएम श्री सुमित पांडेय, श्री महेंद्र कवचे, श्री पीसी शाक्य, एसडीएम एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। कलेक्टर श्री मिश्रा ने जनसुनवाई में आए हर एक आवेदक से धैर्यपूर्वक उनकी समस्याओं पर चर्चा की और उन्हें उनके शीघ्र निराकरण का आश्वासन भी दिया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को नागरिकों से प्राप्त आवेदनों पर संवेदनशील रूख अपनाते हुए निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने आवेदकों की समस्याओं पर संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों को कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
एक फिक्स फॉर्मेट है, बस एप्लीकेशन नंबर बदलता है
भोपाल में जनसुनवाई का प्रतिवेदन बनाने का एक फिक्स फॉर्मेट है। बस एप्लीकेशन का नंबर बदलता है। ना तो यह बताया जाता है कि पिछली बार जनसुनवाई में जो आवेदन मिले थे उनका क्या हुआ? ना ही यह बताया जाता है कि ऐसा कौन सा मामला है, जिसे तत्काल निराकरण कर दिया गया। जनसुनवाई के कवरेज के लिए मीडिया को पहले से ही प्रतिबंधित किया जा चुका है। अंदर क्या होता है पता ही नहीं चलता है, जबकि जनसुनवाई की योजना में यह स्पष्ट था कि, यह एक खुला दरबार होगा। समस्याओं का फटाफट निराकरण होगा। यदि केवल एप्लीकेशन कलेक्ट करना है तो वैसे भी कलेक्टर कार्यालय में एक शिकायत शाखा होती है। मंगलवार की क्या जरूरत है? कभी भी आवेदन जमा कर सकते हैं।

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