सस्ती दवाओं और बेहतर इलाज के लिए सरकार के बड़े कदम: कोई ज्यादा पैसे मांगे तो शिकायत करें

Updesh Awasthee
नई दिल्ली, 11 अगस्त 2026
: बीमारियों के इलाज और दवाओं पर होने वाले खर्च को कम करने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हाल ही में राज्य सभा में दी गई जानकारी के अनुसार, National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA) दवाओं की कीमतों को नियंत्रित (Regulate) करने के लिए 'Drugs (Prices Control) Order 2013' के तहत कड़े नियम लागू कर रही है। 

यहाँ कुछ मुख्य बातें हैं जो हर उपभोक्ता के लिए जानना जरूरी हैं:

1. दवाओं की कीमतों पर लगाम (Price Control): सरकार जरूरी दवाओं के लिए एक 'अधिकतम कीमत' (Ceiling Price) तय करती है। कोई भी कंपनी इस तय कीमत (प्लस GST) से ज्यादा दाम पर दवा नहीं बेच सकती। यहाँ तक कि जिन दवाओं की कीमत सरकार तय नहीं करती, उनमें भी कंपनियाँ साल भर में 10% से ज्यादा दाम नहीं बढ़ा सकतीं।
2. MRP का रखें ध्यान: नियम के मुताबिक, हर दवा बनाने वाली कंपनी को पैकेट पर MRP (Maximum Retail Price) लिखना अनिवार्य है। दुकानदार आपसे पैकेट पर लिखे दाम या सरकारी रेट लिस्ट, दोनों में से जो भी कम हो, उससे ज्यादा पैसे नहीं ले सकता। अगर कोई आपसे ज्यादा पैसे वसूलता है, तो आप इसकी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
3. सस्ती और अच्छी दवाओं के विकल्प:जन औषधि केंद्र (Janaushadhi Kendras): देश भर में 20,000 से ज्यादा जन औषधि केंद्र खुल चुके हैं, जहाँ जेनेरिक दवाएँ बाजार की ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले 50% से 80% तक सस्ती मिलती है।
AMRIT फार्मेसी: कैंसर और दिल की बीमारियों जैसी गंभीर समस्याओं के लिए 'AMRIT' स्टोर्स पर दवाएँ और इंप्लांट्स औसतन 50% डिस्काउंट पर उपलब्ध हैं।
4. मुफ्त इलाज और बीमा की सुविधा: आयुष्मान भारत (AB-PMJAY): इस योजना के तहत पात्र परिवारों को अस्पतालों में भर्ती होने और दवाओं के लिए हर साल 5 लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा मिलता है।
मुफ्त दवा सेवा (Free Drugs Service): सरकारी अस्पतालों (जैसे PHC और जिला अस्पताल) में जरूरी दवाएँ बिना किसी शुल्क के मुफ्त दी जाती हैं।
आर्थिक मदद: गंभीर बीमारियों से जूझ रहे गरीब मरीजों के लिए 'राष्ट्रीय आरोग्य निधि' के तहत वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है।
बदल रही है तस्वीर: सरकार की इन कोशिशों का असर दिखने लगा है। आँकड़ों के मुताबिक, आम आदमी की अपनी जेब से होने वाला स्वास्थ्य खर्च (Out-of-pocket expenditure) जो 2014-15 में 62.6% था, वह 2022-23 में घटकर 43.4% रह गया है।
इन सुविधाओं का लाभ उठाएं और जागरूक बनें! किसी भी तरह की धोखाधड़ी या ओवरचार्जिंग होने पर आप संबंधित विभाग में शिकायत जरूर करें।

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