मध्य प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री के खिलाफ ABVP का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन

Updesh Awasthee
भोपाल, 27 अगस्त 2026:
जंतर मंतर पर युवा पीढ़ी के आंदोलन की सफलता के बाद काफी कुछ बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। पिछले कई सालों से सत्ता का आनंद भोग रहे संगठन, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की तंद्रा इस आंदोलन के कारण टूट गई। आज मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेज में व्याप्त अव्यवस्थाओं के विरोध में ABVP ने पूरे प्रदेश में प्रदर्शन किया। संगठन की मर्यादा के कारण ABVP ने सीधा नाम नहीं दिया लेकिन यह प्रदर्शन मध्य प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार के खिलाफ था। 

मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेज, अनुपयोगी बिल्डिंग बनकर रह गए हैं

शासकीय महाविद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं की कमी और जर्जर अधोसंरचना के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने गुरुवार को प्रदेशव्यापी ‘विद्यार्थी हुंकार अभियान’ शुरू किया। अभियान के तहत प्रदेश के विभिन्न जिलों में विद्यार्थियों और अभाविप कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर जिला कलेक्टरों के माध्यम से उच्च शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे। भोपाल में भी सैकड़ों विद्यार्थियों ने मार्च निकाला और कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन कर अपनी मांगें रखीं। अभाविप का आरोप है कि प्रदेश के कई सरकारी कॉलेजों में विद्यार्थियों को स्वच्छ पेयजल, साफ शौचालय, व्यवस्थित कक्षाएं, फर्नीचर, बिजली एवं प्रकाश व्यवस्था, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं, खेल सुविधाएं, छात्राओं के लिए आवश्यक सुविधाएं, इंटरनेट, पार्किंग, सुरक्षा और प्राथमिक उपचार जैसी बुनियादी सुविधाएं तक पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं। संगठन ने कहा कि इन व्यवस्थाओं के अभाव में विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण नहीं मिल पा रहा है।

भोपाल के एमवीएम कॉलेज में बड़ी संख्या में शराब की बोतलें मिली थीं

ज्ञापन के माध्यम से अभाविप ने प्रदेश के सभी शासकीय महाविद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति का तत्काल सर्वे कराने की मांग की है। संगठन ने कहा कि जहां सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, वहां आवश्यक व्यवस्थाएं तत्काल शुरू की जाएं। जिन कार्यों के लिए अतिरिक्त बजट की जरूरत है, उनके लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर बजट उपलब्ध कराया जाए। अभाविप के मध्यभारत प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी ने कहा कि प्रदेश के कई सरकारी कॉलेज मूलभूत सुविधाओं के अभाव और जर्जर अधोसंरचना से जूझ रहे हैं। उनके अनुसार, अधिकांश कॉलेजों में बाउंड्रीवॉल या तो क्षतिग्रस्त है या है ही नहीं। इससे कॉलेज परिसर असामाजिक तत्वों का अड्डा बन रहे हैं। उन्होंने भोपाल के एमवीएम कॉलेज में अभाविप के स्वच्छता अभियान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां बड़ी संख्या में शराब की बोतलें मिली थीं।

सरकारी कॉलेज के नाम पर केवल बिल्डिंग है, अंदर कुछ भी नहीं

उन्होंने आरोप लगाया कि कई कॉलेजों में विवेकानंद करियर गाइडेंस सेल ठप पड़े हैं, कैंटीन बंद हैं और पुस्तकालय पठन सामग्री की कमी से जूझ रहे हैं। कंप्यूटर और विज्ञान प्रयोगशालाओं में पर्याप्त संसाधन एवं उपकरण नहीं हैं। विद्यार्थी सहायता केंद्र सक्रिय नहीं होने के कारण छात्रों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए घंटों परेशान होना पड़ता है। चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार को अभाविप की मांगों का तत्काल निराकरण करना चाहिए, ताकि प्रदेश के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और मजबूत संस्थागत अधोसंरचना मिल सके।

विद्यार्थी परिषद अपनी आवाज और संघर्ष जारी रखेगी

अभाविप भोपाल महानगर मंत्री आरती ठाकुर ने कहा कि आज सवाल केवल सुविधाओं का नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य का है। स्वच्छ पानी, बेहतर शौचालय, छात्राओं और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं, अच्छी कक्षाएं, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं, खेल और सुरक्षा विद्यार्थियों का अधिकार हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की मूलभूत जरूरतों का समाधान होने तक विद्यार्थी परिषद अपनी आवाज और संघर्ष जारी रखेगी। अभाविप के अनुसार, ‘विद्यार्थी हुंकार अभियान’ की शुरुआत आज के प्रदेशव्यापी प्रदर्शन से हुई है। संगठन आने वाले दिनों में विभिन्न रचनात्मक और आंदोलनात्मक माध्यमों से अपनी मांगें उठाता रहेगा और मांगें पूरी होने तक अभियान जारी रखने की बात कही है। 

इंदर सिंह परमार, क्यों है जिम्मेदार 

इंदर सिंह परमार, मध्य प्रदेश सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री हैं। सरकारी कॉलेज का प्रबंधन उनकी जिम्मेदारी है। यदि एक भी सरकारी कॉलेज में कोई कमी है तो उसके लिए सिस्टम जिम्मेदार है और सिस्टम का मतलब होता है डिपार्टमेंट का मुखिया। यदि पूरा सिस्टम केवल कॉलेज प्रिंसिपल और उच्च शिक्षा विभाग के सेक्रेटरी या कमिश्नर के भरोसे ही चलाया जाना होता तो कैबिनेट मंत्री की जरूरत ही क्या थी। बड़ा सवाल है कि उच्च शिक्षा विभाग को मिलने वाला फंड, कहां खर्च किया जा रहा है।

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