नरोत्तम मिश्रा के मुद्दे पर चर्चा करने नितिन नबीन, अमित शाह के घर पहुंचे

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 14 जुलाई 2026:
भारत में तीन विधानसभाओं में उपचुनाव हो रहे हैं। तीनों विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों का अप्रत्याशित चयन हुआ है। इसमें दतिया का मामला सबसे बड़ा है। आज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नबीन, पार्टी के दूसरे सबसे बड़े नेता श्री अमित शाह से मिलने उनके घर पहुंचे। दिल्ली के सूत्रों का कहना है कि, तीनों विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी की स्थिति के विषय में विचार किया जा रहा है और इसमें दतिया सबसे प्रमुख है। 

गुजरात और बिहार में भी अचानक प्रत्याशी बदल दिए 

भारत में इस समय दतिया (मध्य प्रदेश), मांजलपुर (गुजरात) और बांकीपुर (बिहार) विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं। मांजलपुर गुजरात में कई गद्दावर नेता दावेदार थे और हाई लेवल पर लॉबिंग चल रही थी परंतु अंतिम समय में सब की उम्मीद के बाहर श्री सतीश पटेल को टिकट दे दिया गया। जबकि वह मंजूर के निवासी भी नहीं है। च्हानी इलाके के निवासी हैं। इस फैसले ने सबको हैरान कर दिया था। बांकीपुर बिहार में भी कुछ ऐसा ही हुआ। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के राज्यसभा में चले जाने के कारण यह सीट खाली हुई थी। माना जा रहा था कि वह अपने उत्तराधिकारी का चुनाव स्वयं करेंगे। उन्होंने अभिषेक कुमार उर्फ बंटी को टिकट दिया था और सिन्हा साहब ने नामांकन भी दाखिल कर दिया था, लेकिन दूसरे दिन उन्हें अपना नाम वापस लेना पड़ा एवं पार्टी ने श्री नीरज कुमार सिन्हा को अपना प्रत्याशी घोषित किया। यह बदलाव बहुत अचानक और अप्रत्याशित था। पूरे बिहार से दिल्ली मीडिया में इसकी चर्चा है। 

दतिया का घटनाक्रम देशभर की सुर्खियों में रहा

सबसे बड़ा घटनाक्रम दतिया में हुआ। यहां पर डॉ नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस के विधायक के खिलाफ चल रहे कानूनी मामले में लड़ाई लड़ी और न्यायालय द्वारा सजा दिए जाने के बाद कांग्रेस के विधायक श्री राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त हो गई। यह सब कुछ उन्होंने उपचुनाव के लिए किया था। पार्टी को भी पता था और वह आश्वासन थे कि वही चुनाव लड़ेंगे। नरोत्तम मिश्रा के नाम को लेकर किसी प्रकार की कोई डिबेट नहीं थी लेकिन अंतिम समय में अचानक पार्टी द्वारा श्री आशुतोष तिवारी को टिकट दे दिया। फिर दतिया में जो कुछ हुआ आपको पता ही है। 

Narottam Mishra Issue: Nitin Nabin Holds Meeting with Amit Shah 

दिल्ली की मीडिया में कहा जा रहा है कि यह सब कुछ श्री अमित शाह की अनुमति और जानकारी के बिना हुआ। स्वाभाविक है कि यही स्थिति राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन की भी रही होगी। वास्तविकता जो भी हो लेकिन तीनों विधानसभा सीटों पर चिंता की स्थिति बन गई है। पार्टी के प्रत्याशी को अपने ही कार्यकर्ताओं से खतरा है। भाजपा के इतिहास में दतिया कांड अपने आप में अद्वितीय है। किसी नेता के समर्थन में पूरा का पूरा संगठन इस्तीफा देकर सड़क पर उतर आए और गुस्सा थमने का नाम ना ले, भाजपा में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। दतिया कांड में काफी कुछ नेगेटिव है लेकिन एक बात माननी ही पड़ेगी कि, दतिया सीट जिस पर कांग्रेस का पारंपरिक कब्जा था, नरोत्तम मिश्रा ने न केवल उनसे छीन ली बल्कि दतिया में इतना मजबूत संगठन खड़ा किया कि जब कार्यकर्ताओं को विश्वास में लिए बिना अचानक टिकट बदला तो अप्रत्याशित क्रिया की अप्रत्याशित प्रतिक्रिया हुई। 

उम्मीद की जा रही है कि दोनों नेता मध्यप्रदेश और बिहार की परिस्थितियों को अपने अनुकूल बनाने के लिए रणनीति पर विचार कर रहे हैं।

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