भोपाल, 14 जुलाई 2026: एक तरफ कांग्रेस कह रही है कि मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के ट्रांसफर में मंत्रियों ने जमकर पैसा बनाया वहीं दूसरी तरफ भाजपा के एक मंत्री का कहना है कि, डिपार्टमेंट के टॉप मोस्ट आईएएस ऑफिसर ने उनके द्वारा भेजी गई लिस्ट को होल्ड करके अपनी मर्जी से ट्रांसफर लिस्ट जारी कर दी। यहां तक की भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की सिफारिश वाला ट्रांसफर भी नहीं किया। इस मामले की लिखित शिकायत हुई है और जांच भी शुरू हो गई है।
MP Bureaucracy vs Politics? Cabinet Minister Narayan Singh Kushwaha in Dispute With Senior IAS John Kingsly
यह विवाद मध्य प्रदेश सरकार के सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी विभाग के मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाहा और सचिव जॉन किंग्सली (सीनियर आईएएस) के बीच है। दोनों के बयानों से स्पष्ट होता है कि दोनों के बीच में तनाव पहले से ही चल रहा था। विभाग के मंत्री और सचिव के बीच औपचारिक सम्मान का भाव भी नहीं था। मंत्री श्री कुशवाहा ने अपनी नोटशीट पर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को इसके बारे में सूचना दी है। डॉक्यूमेंट पर जांच के आदेश तो नहीं दिए गए हैं लेकिन जांच शुरू हो गई है। बात सिर्फ मंत्रालय और मुख्यमंत्री के सचिवालय तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि मीडिया में भी आ गई है। दोनों एक दूसरे के खिलाफ बयान बाजी कर रहे हैं।
मंत्री श्री कुशवाहा ने बताया कि, उन्होंने सचिव जॉन किंग्सली से विधिवत बातचीत करके लिस्ट फाइनल की थी। इस लिस्ट में तीन विधायक और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल की एक सिफारिश भी थी। विभागीय मंत्री के कार्यालय से 15 जून को ट्रांसफर लिस्ट भेजी गई लेकिन सचिव जॉन किंग्सली ने उसको जारी नहीं किया। फिर 16 जून को दोबारा लिस्ट भेजी गई लेकिन उसको भी जारी नहीं किया गया। मंत्री श्री कुशवाहा का कहना है कि सचिव जॉन किंग्सली नहीं जो लिस्ट जारी की उसके बारे में उनको पता ही नहीं था। उनके परामर्श और अनुमति के बिना लिस्ट जारी कर दी गई।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान विभाग के सचिव जॉन किंग्सली ने स्वीकार किया है कि हां उन्होंने मंत्री जी के कार्यालय से प्राप्त हुई ट्रांसफर लिस्ट को रोक दिया था। इसके पीछे तर्क दिया कि चर्चा के दौरान जो लिस्ट फाइनल की गई थी, बाद में मंत्री जी ने लिस्ट बदल दी। इसलिए उनकी ओर से भेजी गई लिस्ट को जारी नहीं किया गया। मंत्री श्री कुशवाहा ने जो नोट शीट चलाई है उसमें एक व्हाट्सएप चैट का स्क्रीनशॉट भी है। इसमें विभाग के सचिव जॉन किंग्सली द्वारा ट्रांसफर के बदले रिश्वत मांगे जाने का उल्लेख है। श्री जॉन किंग्सले का कहना है कि, जिस व्यक्ति ने व्हाट्सएप का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए शिकायत की है, उसके खिलाफ आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करवा दिया है।
यह पूरा घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि, मध्य प्रदेश शासन के उड़ने की विभाग में मंत्री और सचिव के बीच गहरे मतभेद हैं और भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री जॉन किंग्सले इनको अपनी तरफ से दूर करने का प्रयास नहीं कर रहे हैं। यदि मंत्री जी के कार्यालय से प्राप्त हुई लिस्ट में, कुछ नए नाम थे तो इसकी जानकारी मंत्री जी को दी जानी चाहिए थी। कैबिनेट मंत्री द्वारा भेजी गई लिस्ट को रोक देना, यह उचित व्यवहार नहीं माना जा सकता। यदि मंत्री जी द्वारा दबाव बनाया जा रहा था या फिर वह कुछ ऐसा करवाना चाहते थे जो नियम के अंतर्गत नहीं था, तो इसकी जानकारी मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री को दी जानी चाहिए थी।
यहां एक बात लिखना और जरूरी है कि, केवल मामला दर्ज करवा देने से शिकायत में अटैच किया गया व्हाट्सएप का स्क्रीनशॉट कूट रचित साबित नहीं होता है। इन्वेस्टिगेशन के बाद पता चलेगा, जो स्क्रीनशॉट लगाया गया है वह सही है या गलत। इसलिए कोई भी FIR की जानकारी को इस प्रकार से प्रस्तुत करना उचित नहीं है कि, शिकायत करने वाले के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया गया है। मतलब शिकायत करने वाला गलत है।
जो कुछ भी हो रहा है उसकी उचित नहीं कहा जा सकता क्योंकि भारतीय प्रशासनिक सेवा में पटरी से उतरने वाले मंत्रियों को पटरी पर लाने की रणनीति सिखाई जाती है। शासन में अनुशासन आईएएस अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है, मंत्रियों की नहीं। और सबसे बड़ी बात, उद्यानिकी विभाग, मध्य प्रदेश के राज्यपाल महोदय द्वारा मंत्री को आमंत्रित किया गया है। विभाग में सचिव के तौर पर एक भारतीय प्रशासनिक सेवा का अधिकारी होगा, यह व्यवस्था है लेकिन वह अधिकारी श्री जॉन किंग्सले होंगे, ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। आईएएस अधिकारियों को विभाग आवंटित नहीं होते। यदि मंत्री ने नोट शीट पर शिकायत की है तो यह भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी के तौर पर श्री जॉन किंग्सले का फेलियर है, फिर चाहे वह शिकायत गलत ही क्यों ना हो।

.webp)