भोपाल के प्राचीन इतिहास के पन्नों के बीच बैठेगी कैबिनेट, मोदी के विजन को मोहन का देसी टच

Updesh Awasthee
भोपाल, 18 जुलाई 2026:
मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक नया 'टूरिज्म गाइड' चर्चा में है, और मजे की बात यह है कि यह गाइड कोई और नहीं, बल्कि खुद सूबे के मुखिया डॉ. मोहन यादव हैं। मुख्यमंत्री ने वल्लभ भवन की पांचवीं मंजिल के 'एसी कमरों' वाली फाइल-संस्कृति को ऐसा झटका दिया है कि अब मंत्रियों को भी अपनी सुख-सुविधा छोड़कर इतिहास के पन्नों के बीच बैठना पड़ रहा है। 

इसे आप मुख्यमंत्री का 'इनोवेशन का मास्टर स्ट्रोक' कहिए या फिर उनकी घुमक्कड़ी वाली कार्यशैली, लेकिन सच यह है कि डॉ. मोहन यादव ने कैबिनेट बैठकों को बोरियत भरे सरकारी आयोजनों से निकालकर 'डेस्टिनेशन इवेंट' बना दिया है। अब जनता अखबारों में यह नहीं पढ़ती कि बैठक में क्या हुआ, बल्कि यह भी देखती है कि इस बार मुख्यमंत्री ने कौन सा ऐतिहासिक कोना ढूंढ निकाला है। 

जगदीशपुर: विरासत में सियासत का तड़का 

19 जुलाई को भोपाल के पास स्थित ऐतिहासिक स्थल जगदीशपुर में कैबिनेट सजने वाली है। रानी महल और चमन महल जैसे विरासतीय स्थलों पर होने वाली यह बैठक केवल चाय-नाश्ते तक सीमित नहीं रहेगी। मानसून सत्र से ठीक पहले हो रही इस बैठक में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है। यानी मुख्यमंत्री का सीधा फंडा है, इतिहास को जीवंत भी करो और भविष्य की 'लकीर' भी खींचो। 

सिर्फ सैर-सपाटा नहीं, 'फील्ड गवर्नेंस' का नया मॉडल 

बिना किसी भारी-भरकम प्रशंसा के यह कहना गलत नहीं होगा कि डॉ. मोहन यादव ने शासन की पारंपरिक शैली को 'अपडेट' कर दिया है। पहले जहां सरकार वल्लभ भवन की चहारदीवारी में कैद रहती थी, वहीं अब अधिकारी और मंत्री जनता के करीब पहुंच रहे हैं। महेश्वर, सिंग्रामपुर और ओरछा जैसे शहरों में हुई बैठकों ने न केवल उन जगहों की तकदीर बदली है, बल्कि वहां के स्थानीय पर्यटन को भी नए पंख लगा दिए हैं। 

प्रधानमंत्री के विजन को 'देसी टच' 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' के सपने को मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में 'विरासत से विकास' के मंत्र के साथ जोड़ दिया है। यह मॉडल अब दूसरे राज्यों के लिए भी एक 'केस स्टडी' बन सकता है कि कैसे बिना किसी अतिरिक्त तामझाम के, केवल बैठने की जगह बदलकर प्रशासन में नई ऊर्जा भरी जा सकती है।

तो तैयार रहिए, क्योंकि मोहन सरकार की यह 'डेस्टिनेशन कैबिनेट' मध्यप्रदेश को इन्वेस्टमेंट और कल्चरल डेस्टिनेशन बनाने की राह पर निकल पड़ी है। अब देखना यह है कि अगली कैबिनेट बैठक के लिए मुख्यमंत्री कौन सा ऐतिहासिक किला या आदिवासी अंचल चुनते हैं! रिपोर्ट: आलोक शर्मा।

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