भोपाल, जुलाई 2026: मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान महिलाओं से संबंधित विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और सेवा संबंधी मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। महिला विधायकों ने संविदा महिला कर्मचारियों के अधिकारों से लेकर ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं और छात्राओं की सुरक्षा तक के विषयों पर सरकार से जवाब मांगे।
मध्य प्रदेश विधानसभा मानसून सत्र की महिला केंद्रित प्रमुख गतिविधियों की विस्तृत रिपोर्ट:-
1. संविदा महिला कर्मचारियों को 'चाइल्ड केयर लीव' का सवाल
विधायक श्रीमती अनुभा मुंजारे ने संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के साथ-साथ महिला कर्मचारियों के लिए एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार नियमित महिला कर्मचारियों की तरह संविदा महिला कर्मचारियों को भी 730 दिनों का 'चाइल्ड केयर लीव' (संतान पालन अवकाश) देने का प्रावधान करेगी। इसके उत्तर में राज्य मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में महिला संविदा कर्मचारियों को नियमित महिला कर्मचारियों के समान 180 दिनों के प्रसूति अवकाश की पात्रता तो है, लेकिन 'चाइल्ड केयर लीव' के संबंध में वर्तमान नीति के अनुसार ही प्रावधान लागू हैं।
2. मातृ मृत्यु दर और प्रसूति सुविधाएं
प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं, विशेषकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर कई सवाल हुए:
सीधी में मातृ मृत्यु दर: विधायक श्रीमती रीती पाठक ने सीधी जिले में प्रसूताओं की बढ़ती मृत्यु दर पर चिंता जताई। सरकार ने उत्तर दिया कि जिले में हर महीने की 9 और 25 तारीख को पी.एम. मातृत्व सुरक्षा दिवस मनाया जाता है, जहाँ स्त्री रोग विशेषज्ञों द्वारा गर्भवती माताओं का परीक्षण किया जाता है।
मदद के लिए 'सुमन हेल्पडेस्क': सरकार ने बताया कि 'सुमन हेल्पडेस्क' के माध्यम से रक्त की कमी वाली गर्भवती महिलाओं की निगरानी की जाती है और उन्हें सुरक्षित प्रसव के लिए प्रेरित किया जाता है।
मप्र में नए मैटरनिटी विंग: भिंड जिला चिकित्सालय में एक नया मैटरनिटी विंग (प्रसूति विंग) स्वीकृत किया गया है। इसी तरह, सीधी के मझौली में 50 बिस्तरों वाले अस्पताल में प्रसूति सुविधाओं के विस्तार की प्रक्रिया चल रही है।
3. आशा और ऊषा कार्यकर्ताओं का मानदेय
आशा और ऊषा कार्यकर्ताओं (जो पूर्णतः महिला कैडर है) के मानदेय और प्रोत्साहन राशि को लेकर सदन में तीखी बहस हुई:
विधायक श्री बाला बच्चन और श्रीमती चंदा सुरेंद्र सिंह गौर ने बड़वानी और टीकमगढ़ जिलों में आशा कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि लंबित होने का मुद्दा उठाया।
सरकार ने स्पष्ट किया कि आशा कार्यकर्ता ग्राम सभा से चयनित स्वैच्छिक कार्यकर्ता हैं, इसलिए उन्हें राज्य कर्मचारी घोषित करने या निश्चित मानदेय देने का वर्तमान में कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि, दुर्घटना में मृत्यु होने पर उनके परिजनों को 2 लाख रुपये की सहायता का प्रावधान है।
4. छात्राओं की शिक्षा और छात्रावास व्यवस्था
कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास: विधायक श्री प्रदीप पटेल और श्री दिलीप सिंह परिहार ने रीवा और उज्जैन संभाग के बालिका छात्रावासों में वार्डनों की नियुक्ति और वित्तीय अनियमितताओं पर सवाल उठाए। सरकार ने माना कि उज्जैन के छात्रावासों में शिकायतों की जांच लोकायुक्त द्वारा की जा रही है।
शिक्षा के लिए बुनियादी ढांचा: पन्ना और देवास जैसे जिलों में बालिकाओं के लिए अलग शौचालय और पेयजल की व्यवस्था पर चर्चा हुई। विधायक श्रीमती नीना विक्रम वर्मा ने छात्राओं को कॉलेज जाने के लिए सुगम सड़कों और परिवहन की आवश्यकता पर जोर दिया।
5. परिवहन में छूट का मामला
राजधानी भोपाल की बस सेवा BCLL में महिलाओं को मिलने वाली रियायतों पर विधायक श्री सुरेंद्र सिंह हनी बघेल ने सवाल किया। सरकार ने स्वीकार किया कि अप्रैल 2020 (कोविड-19) के बाद से वित्तीय कारणों के चलते महिलाओं को मासिक बस पास में मिलने वाली छूट बंद कर दी गई है।
6. आर्थिक स्वावलंबन और स्वरोजगार
महिला स्व-सहायता समूह: बड़वानी जिले में स्कूल यूनिफॉर्म सिलने वाले महिला समूहों की 2.29 करोड़ रुपये की राशि लंबित होने का मामला उठा। सरकार ने आश्वासन दिया कि सत्यापन के बाद भुगतान किया जाएगा।
लखपति बहना: सरकार ने बताया कि 'लखपति बहना' योजना के तहत धार, भिंड और अन्य जिलों में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।
निष्कर्ष: विधानसभा सत्र के दौरान महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार ने अपनी उपलब्धियां गिनाईं, लेकिन विपक्ष ने विशेष रूप से संविदा महिला कर्मियों के लाभ, आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय और बस किराए में छूट जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा। सदन में महिला मंत्रियों और विधायकों की सक्रिय भागीदारी ने इन चर्चाओं को और अधिक प्रभावी बनाया।

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