भोपाल समाचार, 18 जुलाई 2026: भोपाल में रहने वाले जमील पुत्र फारुख को लोग शरीफ आदमी समझते थे, लेकिन असल में वह एक डकैत था। रमेश कुशवाह गैंग में छापा मारा हमला करने वाली टीम का लीडर था। 27 साल पहले उसने एक पुलिस थाने पर हमला करके हथियार लूट लिए थे। इस दौरान उसने दो पुलिस वालों की हत्या कर दी थी।
उत्तर प्रदेश की आगरा पुलिस द्वारा बताया गया कि, खेरागढ़ में साल 1999 में दो पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले में 27 साल से फरार चल रहे मुख्य आरोपी को भोपाल से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपी को शुक्रवार रात को गिरफ्तार किया था। आज दोपहर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके खुलासा किया है। पुलिस ने बताया- आरोपी पुलिस से बचने के लिए खुद को मृत घोषित करवा चुका था। नाम बदलकर ट्रक चालक के रूप में जीवन बिता रहा था। पुलिस रिकॉर्ड में भी यह फाइल धूल खा रही थी। पुलिस सारी उम्मीद छोड़ चुकी थी लेकिन कहते हैं ना कि अपराध, और हत्या जैसे अपराध में, अपराधी कितना भी चालक ने क्यों ना हो, एक न एक दिन जेल की सलाहों के पीछे पहुंच ही जाता है। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ:-
भोपाल में 2 महीने तक आगरा पुलिस की टीम रेकी करती रही
दो साल पहले अपने जीजा की बकरीद की एक दावत में शामिल हुआ था। जीजा ने शराब पार्टी के दौरान ये बात अपने एक रिश्तेदार को बता दी। इसकी जानकारी पुलिस को हो गई। आगरा पुलिस ने दो महीने तक भोपाल में रेकी की। कन्फर्म होने पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पर 50 हजार का इनाम भी पुलिस ने रखा था।
डीसीपी पश्चिम आदित्य कुमार के अनुसार गिरफ्तार आरोपी भूरा कुख्यात रमेश कुशवाह गैंग का सक्रिय सदस्य था। यह गैंग लूट, अपहरण और हत्या जैसी घटनाओं में शामिल रहा है। पुलिस द्वारा गैंग के हथियारों का जखीरा पकड़े जाने के करीब 10 दिन बाद 31 दिसंबर 1999 की रात बदमाशों ने पुलिसकर्मियों से हथियार लूटने की साजिश रची। उस रात खेरागढ़ में गश्त पर तैनात तीन पुलिसकर्मी ठंड से बचने के लिए अलाव ताप रहे थे। भूरा अपने साथियों के साथ वहां पहुंचा और अलाव तापने के बहाने पुलिसकर्मियों के पास बैठ गया। मौका मिलते ही उसने तमंचे से तीनों पुलिसकर्मियों पर फायरिंग कर दी।
इस हमले में कांस्टेबल कमल सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कांस्टेबल चरन सिंह ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। तीसरा पुलिसकर्मी घायल हो गया था।
2 पुलिस कर्मियों का हत्यारा भोपाल में बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन मजदूरी करता था
घटना के बाद पुलिस ने गैंग के खिलाफ अभियान चलाया। गैंग लीडर रमेश कुशवाह भिंड में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया, जबकि गैंग का सदस्य नरेंद्र जालौन में हुई कार्रवाई में ढेर हुआ। मामले में पांच अन्य बदमाश गिरफ्तार हुए और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। हालांकि भूरा पुलिस के हाथ नहीं लगा और फरार होकर जंगलों में छिपता रहा। बाद में उसने इटारसी में मजदूरी की, फिर भोपाल में बिल्डिंग निर्माण कार्य से जुड़ा और अंत में ट्रक चालक बन गया।
भोपाल में आकर भूरा से जमील बन गया
पुलिस जांच में सामने आया कि भूरा पुत्र साबू निवासी जैतपुर ने अपनी पहचान छिपाने के लिए खुद को मृत घोषित करा दिया था। भोपाल में धर्मांतरण कर लिया और जमील पुत्र फारुख के नाम से रहने लगा। आगरा पुलिस के मुताबिक उसने अपने परिवार से रिश्ता तोड़ लिया था लेकिन गैंग के सदस्यों से टच में था। हाल ही में जेल से रिहा हुए भूरा के एक पुराने साथी ने बकरीद पर पार्टी दी। यहीं पर उसके जीजा से मुलाकात हुई। शराब पार्टी के दौरान उसने बता दिया कि दो वर्ष पूर्व भूरा से उसकी बात हुई है।
थाना प्रभारी हरीश कुमार को इस बात की जानकारी हो गई। पुलिस ने जाल बिछाया और आरोपी को गिरफ्तार किया। पहले तो वह पुलिस को बरगलाता रहा पर सख्ती करने पर उसने सच कबूल दिया। डीसीपी पश्चिम आदित्य कुमार ने बताया कि आरोपी को न्यायालय भेजा गया है। उसे रिमांड पर लेकर और पूछताछ की जाएगी।
रिमांड पर लेकर होगी पूछताछ
डीसीपी पश्चिम आदित्य कुमार ने बताया- आरोपी को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है। उसे रिमांड पर लेकर फरारी के दौरान बनाई गई पहचान, दस्तावेजों और उसके सहयोगियों के बारे में पूछताछ की जाएगी। पुलिस इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।

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