सनातन धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व है। सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। यह तिथि दान-पुण्य, व्रत और पितरों की आत्मा की शांति के लिए बेहद फलदायी मानी जाती है। इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा और परिक्रमा का विशेष विधान है।
Somvati Amavasya 2026 on June 15: Powerful Mantras for Divine Blessings and Pitru Dosh Relief
ज्योतिषविदों के अनुसार, यदि इस दिन पूजा के दौरान सही और प्रभावी मंत्रों का जाप किया जाए, तो सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और जीवन के कई दोष समाप्त होते हैं। सोमवती अमावस्या के दिन पीपल वृक्ष की पूजा और व्रत करने का विधान बेहद फलदायी माना जाता है। शास्त्रों में पीपल के पेड़ में त्रिदेव(ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का वास माना गया है।
इस दिन की विस्तृत पूजा और व्रत विधि नीचे दी गई है:
1. प्रातः काल के नियम और संकल्प
• पवित्र स्नान: सुबह सूर्योदय से पहले उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि घर पर स्नान कर रहे हों, तो पानी में गंगाजल मिला लें।
• अर्घ्य दान: तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, और काले तिल मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
• व्रत संकल्प: हाथ में जल लेकर सोमवती अमावस्या व्रत और पितरों की प्रसन्नता के लिए संकल्प लें।
2. पीपल वृक्ष की पूजन विधि
• जलाभिषेक: पीपल के वृक्ष की जड़ में कच्चा दूध, गंगाजल, तिल, और मिश्री मिला हुआ जल अर्पित करें।
• श्रृंगार और तिलक: वृक्ष के तने पर चंदन, कुमकुम, और हल्दी का तिलक लगाएं। अक्षत (चावल) और फूल चढ़ाएं।
• भोग: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के निमित्त पीपल के पास मौसमी फल या सफेद मिठाई का भोग लगाएं।
• दीपदान: पीपल के नीचे घी या सरसों के तेल का एक दीपक और सुगंधित अगरबत्ती जलाएं।
3. परिक्रमा विधि (अश्वत्थ प्रदक्षिणा)
• मौली धागा: पीपल के तने पर कच्चे सूत या मौली (कलवा) के धागे को लपेटते हुए परिक्रमा की जाती है।
• संख्या: इस दिन पीपल की 108 बार परिक्रमा करने का विधान है। यदि 108 बार संभव न हो, तो 7, 11 या 21 बार भी कर सकते हैं।
• फेरे की सामग्री: हर एक परिक्रमा पूरी होने पर पीपल की जड़ में एक वस्तु अर्पित की जाती है। इसके लिए आप मूंगफली, मखाने, फल, सिक्के, मिश्री, या बताशे का उपयोग कर सकते हैं। इन सभी 108 वस्तुओं को बाद में किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को दान कर दिया जाता है।
4. व्रत के नियम और पारण
• आहार: इस दिन पूर्ण रूप से निराहार या फलाहारी व्रत रखा जाता है। व्रत में नमक का सेवन वर्जित माना गया है।
• मौन व्रत: शास्त्रों के अनुसार, इस दिन कुछ समय के लिए मौन रहने या कम बोलने से मानसिक ऊर्जा और पुण्य की प्राप्ति होती है।
• दान: पूजा के बाद किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को अनाज, वस्त्र, या काले तिल का दान करें। इसके बाद ही व्रत का पारण (खोलना) करना चाहिए।
यदि आप भी सोमवती अमावस्या पर व्रत और पीपल पूजन कर रहे हैं, तो अपनी आवश्यकता के अनुसार नीचे दिए गए मंत्रों का चयन कर अपनी पूजा को और अधिक फलदायी बना सकते हैं:
1. पीपल वृक्ष पूजन मंत्र (अश्वत्थ प्रार्थना)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीपल के पेड़ में त्रिदेव-ब्रह्मा, विष्णु और शिव का वास होता है। सोमवती अमावस्या के दिन पीपल की जड़ में जल चढ़ाते समय और रोली-अक्षत से पूजा करते समय इस मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए:
"मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे।
अग्रतः शिवरूपाय वृक्षराजाय ते नमः॥
2. परिक्रमा (फेरे) लेते समय का महामंत्र
सोमवती अमावस्या पर पीपल के वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करने का नियम है। परिक्रमा के दौरान मौली (कलावा) लपेटते हुए भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करना चाहिए। इस समय मन ही मन इस महामंत्र का जाप करते रहें:
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"
इसके साथ ही, यदि आप जीवन में आर्थिक संपन्नता और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा चाहते हैं, तो परिक्रमा के दौरान इस लक्ष्मी मंत्र का जाप भी कर सकते हैं:
"ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं लक्ष्म्यै नमः"
3. पितृ दोष मुक्ति और शांति के उपाय
सोमवती अमावस्या की तिथि पितरों को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए सबसे उत्तम मानी गई है। यदि कुंडली में पितृ दोष हो या कार्यों में बाधा आ रही हो, तो पीपल की जड़ में काले तिल मिलाकर जल अर्पित करें और इस सरल मंत्र का जाप करें:
"ॐ पितृभ्यः नमः"
विशेष लाभ और पितरों की तृप्ति के लिए इस विस्तृत मंत्र का उच्चारण भी अत्यंत फलदायी माना जाता है:
"ॐ आगच्छन्तु मे पितर इमं गृह्णन्तु जलान्जलिम्।
ॐ पितृ देवताभ्यो नमः॥"
4. मानसिक शांति और चंद्र दोष निवारण
चूंकि यह अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है, जिसका संबंध चंद्रमा और भगवान शिव से है। जिन लोगों का मन अशांत रहता है या कुंडली में चंद्रमा कमजोर स्थिति में है, उन्हें मानसिक तनाव दूर करने के लिए भगवान शिव के इस पंचाक्षरी मंत्र का जाप करना चाहिए।
ॐ नमः शिवाय"
इसके अतिरिक्त, चंद्र देव को मजबूती प्रदान करने के लिए उनके इस तांत्रिक मंत्र का जाप भी किया जा सकता है:
"ॐ सों सोमाय नमः"
सोमवती अमावस्या का यह पावन संयोग व्रतियों के लिए सौभाग्य लेकर आता है। पीपल पूजन के साथ इन मंत्रों का श्रद्धापूर्वक किया गया जाप न केवल आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है, बल्कि पारिवारिक सुख-शांति का मार्ग भी प्रशस्त करता है। प्रस्तुति: गीतांजलि ज्योतिष केंद्र, इंदौर।

