भोपाल समाचार, 22 जून 2026: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक ऐसा बखेड़ा खड़ा हो गया है, जिसकी कभी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। यहां जीतू पटवारी बड़ी बेसिक सी गलती कर गए और उसके कारण उनका तमाशा बन गया है। पिछले दो-तीन दिनों से जो कुछ भी हो रहा है, यह संजय नगाइच का स्टाइल है। जीतू पटवारी, संजय नगाइच के बिछाए जाल में ट्रैप हो गए। जीतू पटवारी वैसे अक्सर दिग्विजय सिंह के साथ नजर आते हैं, लेकिन यदि श्री पटवारी ने दिग्विजय सिंह से राजनीति की प्राथमिकी भी सीख ली होती तो, आज उनकी यह हालत नहीं होती।
वेयरहाउस कांड में जीतू पटवारी को क्या नुकसान हुआ
वेयरहाउस कांड में जीतू पटवारी को सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ कि वह खुद एक्सपोज हो गए। राजनीति में इमेज सबसे बड़ी बात होती है। इस मामले में जीतू पटवारी की इमेज पर दाग लगा है। एक तरफ जनता की सभाओं में सर पर गमछा बांधकर खुद को एक मिडिल क्लास किसान का बेटा बताते हैं और दूसरी तरफ सरकार से मदद लेकर वेयरहाउस बनाते हैं, फिर मध्य प्रदेश सरकार से वेयरहाउस के लिए 16 लाख रुपए महीने किराया भी लेते हैं। मतलब केवल इसी वेयरहाउस से श्री जीतू पटवारी को 1 साल में लगभग 2 करोड रुपए किराया मिलता है। पता नहीं मध्य प्रदेश में श्री जीतू पटवारी और उनके मित्र एवं रिश्तेदारों के नाम से, ऐसे कितने बिजनेस चल रहे होंगे। मतलब कांग्रेस पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी की सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है और करोड़ों रुपए की कमाई भी कर रहा है।
वेयरहाउस कांड में संजय नगाइच को क्या फायदा हुआ
संजय नगाइच, एक झटके में प्रदेश के चर्चित भाजपा नेताओं में से एक हो गए। अब वह हर बड़े-छोटे टीवी चैनल, यहां तक की यूट्यूब और इंस्टाग्राम के इनफ्लुएंसर्स को भी टाइम दे रहे हैं। बढ़िया ड्रेस पहनकर कैमरे के सामने आ रहे हैं। बार-बार पूरी कहानी बता रहे हैं। उन्होंने आते ही एक रिकॉर्ड बना लिया। इतिहास में दर्ज हो गया। आगे जो भी हो लेकिन आज की तारीख में उन्होंने खुद को भारतीय जनता पार्टी का निष्ठावान और ईमानदार नेता घोषित कर दिया। मतलब हालत यह कर दिया कि कांग्रेस तो क्या, जिन भाजपा नेताओं के वेयरहाउस हैं, उनको भी संजय से डर लगेगा।
यह संजय नगाइच का स्टाइल है
यदि जबलपुर और पन्ना की वीडियो रिपोर्ट्स के थोड़े से पन्ने पलट कर देखेंगे तो समझ में आएगा कि, जो कुछ भी हुआ है। यही संजय नगाइच की पॉलिटिकल स्टाइल है। इस तरह की हरकतों के कारण पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में भाजपा से निष्कासित कर दिए गए थे। जब पन्ना जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष थे तब 13 करोड़ के गबन का आरोप लगा था। IPC धारा 420 के तहत 3 FIR दर्ज हुईं थी। जबलपुर और पन्ना जिलों में कई आपराधिक मामले दर्ज हुए थे। कुल मिलाकर बड़े नेता से पंगा लेना और आगे बढ़ना, यह संजय नगाइच का स्टाइल है।
जीतू भैया, दिग्विजय सिंह से कुछ तो सीख लिया होता है
इस मामले में श्री जीतू पटवारी केवल ट्रैप नहीं हुए हैं बल्कि एक्सपोज हो गए हैं। सिर्फ इतना नहीं कि वह सरकार से करोड़ों की कमाई कर रहे हैं बल्कि इसलिए क्योंकि उनको राजनीति की प्राथमिकी भी नहीं आती। बात वेयरहाउस कि नहीं है, श्री जीतू पटवारी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं। जब निगम मंडल के अध्यक्षों की नियुक्ति हुई थी, ठीक उसी दिन विपक्षी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के पास निगम मंडल के सभी अध्यक्षों की पूरी कुंडली होनी चाहिए थी। श्री पटवारी द्वारा वायरल किए गए वीडियो में जब उन्होंने "संजय नगाइच" के बारे में कहा कि मैं तो उन्हें जानता तक नहीं, तो उन्होंने खुद को बड़ा और संजय को छोटा नहीं बल्कि खुद को एक ...... नेता साबित किया। श्री पटवारी अक्सर श्री दिग्विजय सिंह के साथ दिखाई देते हैं। उनके चरण स्पर्श करते हैं। यदि उनसे थोड़ी सी राजनीति सीख ली होती, तो आज यह हालत नहीं होती।
श्री दिग्विजय सिंह, मध्य प्रदेश नहीं भारतीय राजनीति के एक ऐसे नेता है जो लगभग 80 साल की उम्र में 28 साल के युवा नेता की तरह सक्रिय रहते हैं और 55 साल के रणनीतिकार नेता की तरह हर बारीक चीज का ध्यान रखते हैं। यदि वह होते तो श्री संजय नगाइच की नियुक्ति के साथ ही उनके पास पूरी फाइल होती। उनको मालूम होता कि कितने मामले पेंडिंग है, जिनको पुश करने से श्री संजय नगाइच को दर्द हो सकता है। इससे पहले कि, श्री संजय नगाइच अपनी नियुक्ति के बाद दौरे पर निकल पाते, उनको पता चल चुका होता, राजा साहब के कितने वेयरहाउस हैं जहां पर नहीं जाना है। यह भी पता चल जाता कि यदि राजा साहब की जमीन पर पैर रख तो, पन्ना में क्या होगा, और यह सब कुछ बड़ी विनम्रता, बंधुत्व और सौहार्द के साथ होता।
बहुमूल्य समय के लिए धन्यवाद- उपदेश अवस्थी।

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