नई दिल्ली, 22 जून 2026: सुप्रीम कोर्ट ने लेबर कोर्ट और हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें एक कर्मचारी को बकाया वेतन के साथ नौकरी पर वापस रखने (Reinstatement with back wages) का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, नियोक्ता ने जो किया वह सही किया। कर्मचारी की जिम्मेदारी है कि वह यदि अपना निवास बदलता है तो नियोक्ता के रजिस्टर में नया पता विधिवत दर्ज करवाए।
बिना सबूत के बयानों पर कर्मचारी को राहत नहीं दे सकते
M/S Rifilis Engineering Pvt. Ltd. vs. Arjun Gupta के मामले में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि कोई कर्मचारी बिना अनुमति के ड्यूटी से गायब रहता है, तो उसे अपनी अनुपस्थिति को ठोस सबूतों के साथ सही साबित करना होगा। कोर्ट ने माना कि बिना पुष्टि वाले बयानों (unverified statements) के आधार पर कोई भी कर्मचारी कानूनी राहत का हकदार नहीं हो सकता।
Employee responsibility for updating residential address with employer
बिना सूचना अनुपस्थित के कारण कर्मचारी की सेवाएं समाप्त कर दी गई थी। इस मामले में एक मुख्य विवाद कर्मचारी के पते को लेकर था। कर्मचारी का तर्क था कि उसे कंपनी द्वारा भेजा गया 'शो-कॉज़ नोटिस' (Show-cause notice) कभी मिला ही नहीं, क्योंकि इसे उसके नोएडा (गौतम बुद्ध नगर) के पते के बजाय बिहार के स्थायी पते पर भेजा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि updating residential address with employer पूरी तरह से कर्मचारी की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की कि नियोक्ता (Employer) को उस पते पर संचार करने के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता जो स्वयं कर्मचारी ने रिकॉर्ड में दिया है। कर्मचारी को अपनी ही चूक का फायदा उठाकर legal advantage of their own lapse लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
Burden of proof for unauthorized absence due to family illness
कर्मचारी अर्जुन गुप्ता लगभग 24 दिनों तक बिना किसी पूर्व सूचना के काम से अनुपस्थित रहा था। उसका दावा था कि वह अपनी माँ की गंभीर बीमारी के कारण छुट्टी पर था और उसने अपने सीनियर को इस बारे में मौखिक रूप से (verbally) सूचित किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर गौर किया कि burden of proof for unauthorized absence कर्मचारी पर होता है।
बेंच ने कहा कि माँ की बीमारी या ड्यूटी पर लौटने के प्रयासों के समर्थन में कोई भी दस्तावेज़ी सबूत (documentary evidence) पेश नहीं किया गया।
यदि स्पष्टीकरण सही होता, तो कर्मचारी अनुपस्थिति के दौरान कम से कम एक पत्र या लिखित सूचना भेज सकता था, जिसे करने में वह पूरी तरह विफल रहा।
Legal consequences of unauthorized employee absence in India
अंततः, सुप्रीम कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि बिना इजाजत अनुपस्थिति और लिखित सूचना के अभाव में लेबर कोर्ट द्वारा दी गई राहत एक कानूनी गलती थी। Supreme Court rules on employee termination for absence के तहत यह स्पष्ट किया गया कि यदि कर्मचारी अपनी अनुपस्थिति को प्रमाणित करने वाले दस्तावेज़ पेश नहीं कर पाता है, तो उसे नौकरी से हटाने का नियोक्ता का फैसला सही माना जाएगा। कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए कर्मचारी को बहाल करने के पिछले आदेशों को पूरी तरह से निरस्त कर दिया।
यह निर्णय उन सभी मामलों के लिए एक नजीर है जहाँ unauthorized absence from work legal implications को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। रिपोर्ट: उपदेश अवस्थी (विधि पत्रकार एवं सलाहकार)।

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