CM डॉ मोहन यादव ने 1 इंच जमीन नहीं खरीदी, पार्टी उनके साथ खड़ी है: भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा

Updesh Awasthee
भोपाल, 23 जून 2026:
इंडियन एक्सप्रेस जैसे अखबार द्वारा इन्वेस्टिगेशन के नाम पर डाटा प्रेजेंटेशन और कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी द्वारा गंभीर आरोप लगाए जाने के बावजूद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, बिना विचलित हुए दिनभर काम करते रहे। सरकार और संगठन के सभी निर्धारित कार्यक्रम संपन्न हो जाने के बाद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल ने इस मामले में पार्टी का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि डॉ मोहन यादव ने मुख्यमंत्री बनने के बाद एक इंच जमीन नहीं खरीदी। वह तेजी से मध्य प्रदेश का विकास कर रहे हैं और पार्टी उनके साथ खड़ी हुई है। 

CM Mohan Yadav property assets details 2023 nomination vs current status 

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल ने अपना बयान वीडियो जारी करते हुए कहा कि, 2023 के विधानसभा चुनाव नामांकन के समय मुख्यमंत्री के पास 17 एकड़ कृषि भूमि थी, जिसमें आज तक कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसी तरह, उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम पर 12 एकड़ जमीन है, और 2023 से अब तक इस संपत्ति में भी कोई परिवर्तन नहीं आया है। अधिकांश भूमि डॉ. मोहन यादव जी के मुख्‍यमंत्री बनने से काफी पहले, वर्ष 2008 से 2019 के बीच खरीदी गई थी। विपक्ष द्वारा संपत्ति बढ़ाने के दावे पूरी तरह से बेबुनियाद हैं क्योंकि आधिकारिक रिकॉर्ड्स में संपत्ति की स्थिति स्थिर बनी हुई है। 

Siddhi Vinayak Company land dispute facts and CM Mohan Yadav resignation 

आरोपों में जिक्र की गई सिद्धि विनायक कंपनी के बारे में भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। यह कंपनी वर्ष 2008 में कृषि कार्यों के लिए स्थापित हुई थी। डॉ. मोहन यादव एवं श्रीमती सीमा यादव वर्ष 2017 में ही इसके निदेशक पद से अलग हो चुके थे तथा मार्च 2026 में अपने सभी शेयर भी त्याग चुके हैं। कंपनी के पास डॉ मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने से पहले नवंबर 2023 में 68.43 एकड़ भूमि थी, जो जून 2026 में डॉ मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद घटकर 65.69 एकड़ रह गई है। 

डॉ मोहन यादव के पुत्र वैभव यादव के पास भी मुख्यमंत्री बनने से पहले की 16 एकड़ जमीन है, ग्राम सांवरखेड़ी में 2019 से मार्च 2023 के बीच 16.38 एकड़ कृषि भूमि का क्रय किया गया था। जिसमें उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद कोई इजाफा नहीं हुआ है। 

Shalini Yadav agricultural land purchase outside Master Plan area details 

मास्टर प्लान (Master Plan) के उल्लंघन के आरोपों पर यह स्पष्टीकरण दिया गया है कि परिवार की अधिकांश जमीनें मास्टर प्लान लागू होने से पहले की हैं। मुख्यमंत्री की पुत्रवधू शालिनी यादव, जिनका हाल ही में विवाह हुआ है, उन्होंने अवश्य 10 एकड़ कृषि भूमि खरीदी है, लेकिन यह जमीन विकसित मास्टर प्लान एरिया के पूरी तरह से बाहर स्थित है। 

प्रदेश अध्यक्ष श्री खंडेलवाल ने रिश्तेदारों पर लगाए गए आरोपों को भी स्वतंत्र अस्तित्व का मामला बताते हुए खारिज कर दिया है और यह भी बताया है कि वे इन गलत तथ्यों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं। 

Congress conspiracy against OBC Chief Ministers in Madhya Pradesh politics 

भाजपा ने कांग्रेस पर पिछड़े वर्ग (OBC) के नेताओं के खिलाफ षड्यंत्र करने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का तर्क है कि जब भी प्रदेश को उमा भारती, शिवराज सिंह चौहान या मोहन यादव जैसा लोकप्रिय ओबीसी मुख्यमंत्री मिला, समाज के कुछ तत्वों और कांग्रेस ने उन्हें कमजोर करने की कोशिश की। प्रदेश के विकास और किसानों की प्रगति में मुख्यमंत्री के योगदान को कमतर दिखाने के लिए यह राजनीतिक स्टंट किया जा रहा है, जिसे मध्य प्रदेश की जनता बर्दाश्त नहीं करेगी। 

उज्जैन मास्टर प्लान-2035 मुख्यमंत्री बनने से पहले लागू हो चुका था

यह मास्टर प्लान मई 2023 से प्रभावशील है, जबकि डॉ. मोहन यादव ने 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद ग्रहण किया। अतः सड़क, हाईवे या विकास योजनाओं को मुख्यमंत्री बनने के बाद विशेष रूप से प्रभावित करने का आरोप निराधार है।

कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ का आरोप तथ्यहीन

डॉ. मोहन यादव की संपत्तियों का पूरा विवरण विधानसभा निर्वाचन 2023 के शपथ-पत्र में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। किसी भी प्रकार के पद के दुरुपयोग अथवा हितों के टकराव का आरोप बेबुनियाद है।

कुल मिलाकर यह पूरा मामला, किसी साजिश का हिस्सा लगता है। जो आंकड़े पहले से ही सार्वजनिक हैं, उनके आधार पर जमीन घोटाले का आरोप लगाया गया है। पहले इंडियन एक्सप्रेस ने इस तरह की रिपोर्ट प्रस्तुत की ताकि, लोगों को ऐसा लगे कि कुछ गड़बड़ हुई है। फिर कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी (जिनको इंग्लिश पढ़ना, लिखना और बोलना ठीक प्रकार से नहीं आता) ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के आधार पर जमीन घोटाले के आरोप लगा दिए और फिर सोशल मीडिया के जरिए एक नॉरेटिव क्रिएट किया गया। जो जानकारी चुनावी शपथ पत्र में मौजूद है, उसके आधार पर तमाम प्रकार की बातें और बतंगड़ बना दिए गए।

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