BHOPAL कलेक्टर का ABVP को जवाब, पॉलिटेक्निक चौराहा वाली शराब की दुकान हम नहीं हटा पाएंगे

Updesh Awasthee
भोपाल, 22 जून 2026:
भोपाल कलेक्टर ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद वालों को बड़ी ही चतुराई के साथ जवाब दिया है। प्रेस सूचना क्रमांक/568/06-26/076 के माध्यम से बताया है कि, पॉलिटेक्निक चौराहा वाली शराब की दुकान हम नहीं जाता पाएंगे क्योंकि ठेकेदार ने हाई कोर्ट से स्टे आर्डर ले लिया है। ABVP वालों ने अप्रैल में बड़ा आंदोलन किया था। तब SDM ने 15 दिन में कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था। प्रशासन ने 60 दिन तक कार्रवाई नहीं की और ठेकेदार को हाई कोर्ट से स्टे आर्डर लेने का मौका दिया। 

कलेक्टर कार्यालय द्वारा प्रेस को भेजी गई सूचना

कार्यालय कलेक्टर (आबकारी), जिला भोपाल द्वारा बताया गया है कि, पत्र क्रमांक 2224 दिनांक 03 जून 2026 के माध्यम से लायसेंसी को निर्देशित किया गया था कि क्षेत्र में प्राप्त शिकायतों तथा जनसामान्य द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन को दृष्टिगत रखते हुए वर्तमान संचालन स्थल के स्थान पर निर्धारित परिक्षेत्र में अन्य उपयुक्त एवं आपत्तिरहित स्थल का चयन कर उसकी जानकारी सात दिवस के भीतर प्रस्तुत की जाए।

आबकारी विभाग द्वारा जारी नोटिस में मध्यप्रदेश आबकारी नीति एवं राजपत्र में निहित प्रावधानों का उल्लेख करते हुए यह भी कहा गया था कि आवश्यकता पड़ने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत मदिरा दुकान का स्थान परिवर्तन किया जा सकता है। स्थानीय नागरिकों की आपत्तियों और प्राप्त शिकायतों के आधार पर प्रशासन द्वारा यह कार्रवाई की गई थी।

उक्त नोटिस के विरुद्ध संबंधित लायसेंसी संस्था नॉर्विच ट्रेडर्स प्रा. लि. ने माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर में रिट याचिका दायर की जिसकी सुनवाई के दौरान माननीय उच्च न्यायालय ने निर्देश दिए कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा मामले का अंतिम निराकरण किए जाने तक संबंधित मदिरा दुकान के संचालन को यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिये है। 

आबकारी विभाग ने ठेकेदार को मौका दिया, हाईकोर्ट में पक्ष नहीं रखा

गजब की बात देखिए, जो जानकारी ठेकेदार को देनी चाहिए थी, वह जानकारी कलेक्टर कार्यालय से आ रही है। कलेक्टर कार्यालय की ओर से बताया यह धारा है कि हम कुछ नहीं कर सकते क्योंकि हाई कोर्ट ने यथास्थिति का आदेश दिया है। जबकि असलियत यह है कि अप्रैल में हुए आंदोलन के बाद प्रशासन ने कोई सख्त कार्रवाई नहीं की। ठेकेदार को हाई कोर्ट तक जाने का मौका दिया और जब मामला हाईकोर्ट में पहुंचा तो प्रशासन ने जनता का पक्ष मजबूती से नहीं रखा। नतीजा हाईकोर्ट को स्थगन आदेश देना पड़ा, और आप कलेक्टर कार्यालय, शराब ठेकेदार का प्रवक्ता बनकर हाई कोर्ट के आदेश की जानकारी जनता को दे रहा है, ताकि कोई ठेकेदार को परेशान ना करें? 

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