भोपाल, 23 जून 2026: स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी, मतलब गजब ही करते हैं। श्री अरविंद सिंह, संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण ग्वालियर चंबल संभाग ने ऐलान किया है कि, यदि कोई भी शिक्षक जिला शिक्षा अधिकारी की अनुमति के बिना उनसे मिलने आया तो, अनुशासनात्मक कार्रवाई करूंगा। प्राइमरी जैसा सरल सवाल है- यदि जिला शिक्षा अधिकारी की शिकायत करना हो तो कहां जाएं?
कार्यालय संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण संभाग-ग्वालियर से जारी पत्र
प्रायः ऐसा देखा गया है कि शिक्षक/कर्मचारीगण बिना किसी ठोस कारण के कार्यालय में आते-जाते हैं, साथ ही यह भी पाया जाता है कि संबंधित कर्मचारी/शिक्षकगण बिना किसी सक्षम अनुमति/अवकाश के अधोहस्ताक्षरकर्ता से भेंट/मिलने आते है, जो कि नियमानुसार उचित नहीं है। यदि सक्षम स्वीकृति के साथ लोक सेवक गम्भीरता से अपनी समस्या के समाधान के लिए भेंट करना चाहते तो स्वागत है, किन्तु अनावश्यक समय व्यतीत करने से कार्य सम्पादन अवरूद्व होता है। भविष्य में यदि कोई भी कर्मचारी/शिक्षक बिना किसी सक्षम अनुमति / अवकाश के अधोहस्ताक्षरकर्ता से भेंट/मिलने एवं कार्यालय में आते हुऐ पाये गये तो संबंधित के विरूद्व नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही की जावेगी। अतः आप अपने स्तर से भी उक्त संबंध में सामान्य निर्देश जारी करने का कष्ट करें।
(अरविन्द सिंह) संयुक्त संचालक लोक शिक्षण संभाग-ग्वालियर
ग्वालियर, दिनांक: 2262023
पृ. क्रमांक/निज सहा./सामान्य/2026/2551
मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा में "संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण संभाग" के दायित्व क्या है?
मध्य प्रदेश में, स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत, संयुक्त संचालक लोक शिक्षण संभाग के विभिन्न दायित्व में एक दायित्व शिक्षा विभाग से संबंधित जन शिकायतों का संभागीय स्तर पर निराकरण करना भी है। संयुक्त संचालक का यह पत्र, अपनी निर्धारित जिम्मेदारी "शिक्षकों की शिकायतों की सुनवाई" से इनकार करना जैसा है। कोई भी शिक्षक संभाग स्तर पर शिकायत करने तब आएगा जब उसको जिला स्तर पर न्याय नहीं मिलेगा। मतलब जब जिला शिक्षा अधिकारी पक्षपात कर रहा होगा, तब शिक्षक संभाग स्तर पर न्याय मांगने के लिए आएगा। श्री अरविंद सिंह कहते हैं कि, जिला शिक्षा अधिकारी की अनुमति के बिना कोई भी शिक्षक उनके पास मिलने नहीं आ सकता। सवाल यह है कि जिला शिक्षा अधिकारी की शिकायत करने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी की अनुमति कैसे प्राप्त करें?

.webp)
.webp)