भोपाल, 28 मई 2026: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी श्री संजीव कंचन की 17 वर्षीय दत्तक पुत्री की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु के पीछे एक अज्ञात मोबाइल की कहानी सामने आई है। पुलिस द्वारा परिवारजनों से की गई पूछताछ के दौरान अज्ञात मोबाइल के कारण तनाव की स्थिति का प्रसंग सामने आया है।
Bhopal IPS Officer’s Adopted Daughter Death: Mystery Mobile Phone Emerges
पुलिस पूछताछ के दौरान मृत लड़की की दत्तक मां ने बताया कि, हम उसकी पढ़ाई और कैरियर के प्रति काफी गंभीर थे। रातीबड़ स्थित भोपाल शहर के सबसे प्रतिष्ठित स्कूल में उसका एडमिशन करवाया था। हमने उसको निजी उपयोग के लिए मोबाइल फोन नहीं दिया था लेकिन उसके पास से एक स्मार्टफोन मिला। इसके कारण उससे पूछताछ की और उसे समझाइश दी गई। दत्तक मां का कहना है कि इसी बात से नाराज होकर उसने आत्महत्या कर ली। हालांकि अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई है और यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि उसने आत्महत्या की है या फिर किसी व्यक्ति द्वारा गलत दिए जाने के कारण उसकी मृत्यु हो गई है। संभावना से इनकार नहीं कर सकते क्योंकि घटना के समय माता-पिता घर में नहीं थे। दोपहर करीब दो बजे नौकर ने आईपीएस संजीव कुमार को कॉल करके सूचना दी। बताया कि, सेकंड फ्लोर पर बेटी के रूम में उसे फांसी के फंदे पर लटका देखा। सवाल तो बनता है कि जब घर में कोई नहीं था तो नौकर सेकंड फ्लोर पर क्या कर रहा था? अभी तक पुलिस ने किसी भी सीसीटीवी वीडियो रिकॉर्डिंग की बात नहीं की है। इसलिए मामला और ज्यादा संदिग्ध हो रहा है।
माफीनामे को सुसाइड नोट बताया जा रहा है
एसीपी उमेश तिवारी ने बताया कि मृत छात्रा के पास से एक सुसाइड नोट मिला है। इसमें उसने लिखा, “मम्मी-पापा, मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं, लेकिन मैं आपकी अच्छी बेटी नहीं बन सकी। आईएम सॉरी।” यहां याद रखना होगा कि 26 तारीख को थाना प्रभारी ने किसी भी प्रकार के सुसाइड नोट मिलने की जानकारी नहीं दी थी। आज एसीपी श्री उमेश तिवारी ने जो बताया है, वह एक माफीनाम है। जो कब लिखा गया किसी को नहीं पता। जबकि उसको सुसाइड नोट कहा जा रहा है। बच्चे इस प्रकार की माफी अक्सर अपने पेरेंट्स से मांग लेते हैं। यह माता-पिता और संतान के रिश्ते का इमोशनल हिस्सा होता है। सुसाइड नोट में भी ऐसे ही शब्द लिखे जाते हैं लेकिन कोई भी नोट, तब तक सुसाइड नोट नहीं माना जा सकता जब तक कि, नोट पर सुसाइड करने की बात नहीं लिखी गई हो।
आईपीएस संजीव कंचन ने बेटी को गोद लेकर पाला था। महज तीन महीने की उम्र में बेटी को विधिवत तरीके से अडॉप्ट किया गया था। इसकी पुष्टि पुलिस कमिश्नर संजय सिंह ने की है। पुलिस का कहना है कि आत्महत्या के सही कारणों का अभी खुलासा नहीं हुआ है। दत्तक मां का बयान आ गया है लेकिन यह जानना जरूरी है कि वह स्मार्टफोन लड़की के पास कब से था और क्या उस स्मार्टफोन से उसने कभी अपने पेरेंट्स से फोन पर बातचीत की है या कभी कोई मैसेज किया है? इस मामले का खुलासा तभी हो पाएगा जब, लड़की की सभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच की जाएगी और उसके परिवार के अलावा उसके दोस्तों से भी पूछताछ की जाएगी।

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