Singrauli, Madhya Pradesh, 20 April 2026: मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में शिक्षा विभाग (Education Department) के भीतर एक बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। लोकायुक्त रीवा (Lokayukta Rewa) ने करोड़ों रुपये के सरकारी धन के दुरुपयोग और खरीद प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
Singrauli Education Scam: FIR Registered Against DEO and Several Officials in Lokayukta Action
मुख्य बिंदु: Singrauli Education Department Procurement Scandal
आरोप: नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों की अवैध खरीदारी।
दोषी: DEO सूर्यभान सिंह और अन्य तीन प्रमुख अधिकारी।
कार्रवाई: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Corruption Prevention Act) के तहत FIR दर्ज।
करोड़ों के घोटाले का गणित
लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच (Preliminary Investigation) में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जहाँ सरकारी बजट का बंदरबांट किया गया। 19 स्कूलों के लिए VR लैब (वर्चुअल रियलिटी लैब - Virtual Reality Labs) की खरीद में लगभग 4 करोड़ 68 लाख 16 हजार रुपये का खर्च दिखाया गया।
बिजली और मरम्मत कार्य: 61 विद्यालयों में बिजली व्यवस्था और सामान्य मरम्मत के नाम पर 3 करोड़ 5 लाख रुपये खर्च किए गए।
स्वच्छता सामग्री (Sanitation Material): 558 स्कूलों के लिए कीटाणुनाशक और स्वच्छता किट की खरीद पर करीब 97 लाख 67 हजार रुपये का भुगतान किया गया।
इन सभी खरीद प्रक्रियाओं में निविदा (Tender Process) और भुगतान के नियमों का गंभीर उल्लंघन पाया गया है।
Key Officials Booked
लोकायुक्त रीवा ने जांच में पुष्टि होने के बाद निम्नलिखित अधिकारियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 43/2026 दर्ज किया है:
सूर्यभान सिंह: जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), सिंगरौली।
राजधर साकेत: सहायक संचालक शिक्षा।
रामलखन शुक्ल: जिला परियोजना समन्वयक (DPC)।
छविलाल सिंह: सहायक परियोजना समन्वयक (वित्त)।
इन सभी पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 और भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
लोकायुक्त की रेड और दस्तावेज जब्त
विवेचना के दौरान 15 अप्रैल 2026 को लोकायुक्त रीवा की टीम ने सिंगरौली DEO कार्यालय में दबिश दी। टीम ने वहां से टेंडर प्रक्रिया, सप्लाई रिकॉर्ड, बिल और भुगतान से जुड़े अहम दस्तावेज (Crucial Documents) जब्त किए हैं। लोकायुक्त रीवा के टीआई संदीप भदौरिया के अनुसार, "शिकायत की जांच में गंभीर अनियमितताएं मिली थीं, जिसके आधार पर मामला दर्ज कर वित्तीय लेनदेन की बारीकी से जांच की जा रही है"।
इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। भ्रष्टाचार के इस बड़े मामले (Multi-Crore Scam) की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, कई और बड़े खुलासों और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।

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