इंदौर, 5 अप्रैल 2026: शहर की सड़कों पर सफाई है लेकिन सिस्टम में कचरा अभी भी बाकी है। इसको साफ करने के लिए इंदौर हाई कोर्ट को छुट्टी के दिन मामले की सुनवाई करनी पड़ी। मामला एक नाबालिग लड़की के अपहरण का है। लड़की पवन सिंह के घर में है लेकिन पुलिस यह बात मानने को तैयार ही नहीं। शनिवार को हाईकोर्ट ने इंदौर पुलिस को जमकर फटकार लगाई।
Indore High Court Opens on Holiday for Minor Girl, Police Pulled Up
घटना 23 फरवरी 2026 की है। पुलिस का रवैया शुरू से ही किडनैपर की प्रति संरक्षणात्मक रहा। लड़की के पिता और चाचा जब मामला दर्ज करवाने पहुंचे तो पुलिस ने रिपोर्ट लिखने से मना कर दिया। बड़ी मुश्किल से प्रथम सूचना प्रतिवेदन में मामले को दर्ज किया गया लेकिन आरोपी पवन सिंह का नाम नहीं लिखा गया, बल्कि पुलिस ने यह लिखा कि कोई अज्ञात व्यक्ति अपहरण कर के लिए गया है। लड़की के पिता लगातार बताते रहे की लड़की को पवन सिंह ने किडनैप किया है परंतु पुलिस से बात मानने के लिए तैयारी नहीं हुई। पवन सिंह के घर जाकर सामान्य पूछताछ भी नहीं की।
अंत में परेशान होकर लड़की के गरीब पिता ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की। शनिवार को छुट्टी के बाद भी सुनवाई की गई। हाई कोर्ट की डबल बेंच ने मामले की न केवल अवकाश के दिन सुनवाई की, बल्कि पुलिस को जमकर फटकार लगाई।
कोर्ट ने आदेश जारी किया कि पुलिस बालिका के साथ तमाम आरोपितों को भी कोर्ट में 6 अप्रैल को पेश करे। महू के बडगोंदा थाना क्षेत्र में अनुसूचित जाति की नाबालिग का दबंगों द्वारा अपहरण करने की शिकायत मजदूर पिता ने की है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज की, लेकिन पहले दबंगों का नाम गायब किया। महीनेभर में भी बालिका को तलाशने की कोई कोशिश नहीं की। पीड़िता के पिता के अनुसार पवन सिंह उसे उठाकर ले गया है। बालिका की उम्र 17 साल 3 माह है और वह पवन सिंह के कब्जे में है।
एफआईआर में नाम न होने पर नाराजगी
पीड़िता के पिता ने अभिभाषक शुभम मांडिल और गौरव गुप्ता के जरिए हाई कोर्ट के समक्ष बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। कोर्ट में इस दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी सरकार की ओर से उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नामजद एफआईआर नहीं करने को लेकर फटकार भी लगाई। साथ ही पुलिस को निर्देश जारी किए कि सोमवार को नाबालिग लड़की, जो कि पवन सिंह की अवैध हिरासत में है, उसे किसी भी हालत में कोर्ट के समक्ष पेश करे।
कोर्ट के आदेश के बाद बदला पुलिस का रवैया
डेढ़ माह पहले अपनी बेटी के अपहरण की एफआईआर कराने वाले पिता से पुलिस ने कोई जानकारी नहीं ली थी। वहीं शनिवार को हाई कोर्ट में सुनवाई होने और हाई कोर्ट से आदेश के तुरंत बाद पुलिस का रवैया बदल गया। 6 अप्रैल को बालिका को कोर्ट के समक्ष पेश करने के आदेश होने की बात सामने आते ही बडगोंदा पुलिस तुरंत पीड़ित के घर पहुंच गई और उसके परिवारजनों से घटना की जानकारी लेने की कोशिश करती रही।

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