25 करोड़ साल पुराने रहस्य का खुलासा: हमारे प्राचीन पूर्वज अंडे देते थे

Updesh Awasthee
ज्ञान विज्ञान न्यूज डेस्क, 11 अप्रैल 2026
: जोहानिसबर्ग, दक्षिण अफ्रीका की यूनिवर्सिटी ऑफ विटवाटर्सरेंड (Wits University) के वैज्ञानिकों की एक खोज ने उन तमाम प्राचीन कहानियां के रहस्य का खुलासा कर दिया जिसमें किसी जीव का जन्म गर्व से नहीं बल्कि किसी और प्रक्रिया से हुआ था। 25 करोड़ साल पुराना एक भ्रूण मिला है जो एक अंडे के अंदर सुरक्षित है। हमारे पूर्वजों में कोई प्राणी ऐसा भी था जो गर्भ से जन्म नहीं लेता था बल्कि माता द्वारा अंडे दिए जाते थे और अंडों के अंदर भ्रूण विकसित होता था। बिल्कुल वैसे ही जैसे पक्षियों के जन्म की प्रक्रिया होती है। 

शाकाहारी था इसलिए पृथ्वी के महाविनाश में भी जीवित रहा

यह भ्रूण Lystrosaurus (लिस्ट्रोसॉरस) नाम के एक शाकाहारी जीव का है, जो करीब 252 मिलियन साल (25 करोड़ साल) पहले हुए 'ग्रेट डाइंग' (End-Permian mass extinction) के विनाशकारी समय में भी जीवित रहने में सफल रहा था। 'ग्रेट डाइंग' के समय पृथ्वी के 90% प्राणियों का अंत हो गया था। समुद्र में रहने वाली 96% प्रजातियां और पृथ्वी पर रहने वाली 75% प्रजातियों का अंत हो गया था। यही कारण है कि इस समय चक्र को  "The Great Dying" कहते हैं।

पहले वैज्ञानिकों ने मना किया कोई नवजात है

इस फॉसिल को सबसे पहले 2008 में दक्षिण अफ्रीका के Karoo Basin में एक 'stony nodule' के रूप में खोजा गया था। कई सालों तक शोधकर्ताओं को लगा कि यह एक नवजात (hatchling) है, लेकिन बिना एडवांस तकनीक के इसे साबित करना नामुमकिन था।

The Role of Advanced Technology

इस गुत्थी को सुलझाने के लिए अंतरराष्ट्रीय टीम ने फ्रांस स्थित European Synchrotron Radiation Facility (ESRF) की मदद ली। Scientists used advanced X-ray CT scans to look inside the fossil in extraordinary detail. स्कैन में जीव का निचला जबड़ा (mandibular symphysis) अधूरा और अनफ्यूज्ड (unfused) पाया गया। इसका मतलब है कि वह जीव अभी पैदा नहीं हुआ था और खुद खाना खाने में असमर्थ था, जो साबित करता है कि वह अंडे के भीतर एक भ्रूण था।

जीवित रहने की अनोखी रणनीति (Survival Strategy) 

Lystrosaurus ने उस दौर के कठोर वातावरण में जीवित रहने के लिए एक विशेष प्रजनन रणनीति अपनाई थी। आधुनिक स्तनधारियों के पूर्वज नरम खोल वाले अंडे (सॉफ्ट-शेल अंडे (Soft-shelled eggs)) देते थे, जो जीवाश्म रिकॉर्ड में बहुत दुर्लभ होते हैं क्योंकि वे जल्दी सड़ जाते हैं।
These eggs were relatively large and rich in yolk
इससे निकलने वाले बच्चे 'precocial' होते थे, यानी वे पैदा होते ही स्वतंत्र रूप से जीने और भोजन खोजने में सक्षम थे।
बड़े और नरम खोल वाले अंडे सूखे (drought) के प्रति अधिक प्रतिरोधी थे, जिसने उन्हें विलुप्ति के बाद की दुनिया में पनपने में मदद की। 

Significance of the Discovery

जोहानिसबर्ग दक्षिण अफ्रीका की यूनिवर्सिटी ऑफ विटवाटरसरैंड के प्रोफेसर जूलियन बेनोइट (Julien Benoit) के अनुसार, यह शोध न केवल स्तनपायी प्रजनन (mammalian reproduction) की उत्पत्ति को स्पष्ट करता है, बल्कि यह भी बताता है कि जलवायु परिवर्तन और पारिस्थितिक संकट के दौरान लचीलापन (resilience) और अनुकूलन क्षमता कितनी महत्वपूर्ण है।
This discovery fills a major evolutionary gap and helps scientists predict how modern species might respond to ongoing environmental stress
यह शोध 9 अप्रैल को जर्नल PLOS ONE में प्रकाशित हुआ है। 

निष्कर्ष: 
यह मान लेना कि, प्राणी के जन्म की प्रक्रिया बिल्कुल वैसी ही होती है जैसी वर्तमान में है, गलत होगा। जबकि इस बात की संभावना है कि, जन्म की जितनी प्रक्रियाओं के बारे में पता चला है, इसके अलावा भी कोई प्रक्रिया हो। 

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