व्यापम घोटाला: इस बार 12 टॉपर्स रतलाम पब्लिक स्कूल से, सिर्फ आधे घंटे में 100 सवाल हल, 100% प्राप्तांक

Updesh Awasthee
भोपाल, 3 मार्च 2026
: ऑनलाइन परीक्षा प्रक्रिया में जब तक परीक्षा का आयोजन करने वाली एजेंसी शामिल रहेगी, तब तक घोटाले को रोक नहीं जा सकता। आबकारी आरक्षक भर्ती परीक्षा 2024 में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। केवल एक परीक्षा केंद्र - रतलाम पब्लिक स्कूल से परीक्षा देने वाले 12 उम्मीदवारों ने 90% से अधिक प्राप्तांक हासिल किया। सबने 100 सवाल हल करने में सिर्फ आधा घंटा खर्च किया। बाकी समय आराम से बैठे रहे।
 

Vyapam Scam Revisited: 12 Toppers From Ratlam Public School Trigger Fresh Scrutiny

हालांकि यह गड़बड़ी मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल भोपाल द्वारा ही पकड़ी गई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि, परीक्षा के दौरान जितनी भी गड़बड़ी होती है, उन सबको पकड़ लिया जाता है। यही मामला क्यों पकड़ा गया इसके पीछे लंबी डिबेट हो सकती है। फिलहाल लेटेस्ट न्यूज़ यह है कि मामला पकड़ लिया गया है और जांच शुरू हो गई है। कर्मचारी चयन मंडल भोपाल द्वारा 12 कैंडिडेट्स के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया है। अब इनके हेल्पर की तलाश की जा रही है और हेल्पर के माध्यम से सिंडिकेट तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।

MPESB तरफ से बताई गई कहानी: 'ऑर्गेनाइज्ड क्राइम' की ओर इशारा

5 फरवरी को रिजल्ट जारी होने से पहले मंडल ने हाई पर्सेंटाइल वाले टॉपर्स का डेटा चेक किया। पता चला कि ये 12 अभ्यर्थी पहले पुलिस भर्ती और अन्य परीक्षाओं में भी बैठे थे, लेकिन तब इनके 50 अंक भी नहीं आए थे। आबकारी भर्ती में अचानक इन्होंने 90 से ज्यादा अंक (100 पर्सेंटाइल) हासिल कर लिए। सीसीटीवी और एग्जामिनेशन डेस्क के डेटा से साफ हुआ कि इन्हें केंद्र पर किसी एक व्यक्ति ने मदद की है। हैरत की बात है कि ये 12 लोग एक ही दिन नहीं, बल्कि अलग-अलग तारीखों और अलग-अलग शिफ्ट में परीक्षा दे रहे थे। इसके बावजूद सबका मददगार एक ही व्यक्ति था और सबका सेंटर एक ही था। यह 'ऑर्गेनाइज्ड क्राइम' की ओर इशारा करता है।

1,10,032 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए थे

बता दें कि ईएसबी ने परीक्षा 9 सितंबर 2025 से 21 सितंबर 2025 के बीच भोपाल, इंदौर, रतलाम सहित 11 शहरों में आयोजित की थी। भर्ती के लिए 2,40,010 अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र जारी किए गए थे। इनमें से 1,10,032 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। शेष अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। रिजल्ट 5 फरवरी को जारी किया गया।

रतलाम पब्लिक स्कूल को पहली बार परीक्षा केंद्र बनाया गया था

मंडल ने पहली बार ‘रतलाम पब्लिक स्कूल’ को परीक्षा केंद्र बनाया और पहले ही प्रयास में वहां से 12 ‘सस्पेक्टेड टॉपर’ निकल आए। सीसीटीवी फुटेज से पुष्टि हुई है कि इन सभी को एक ही बाहरी व्यक्ति द्वारा गाइड किया जा रहा था। मंडल अब इस बात की जांच कर रहा है कि इस स्कूल को सेंटर बनाने की सिफारिश किसने की थी और इसके पीछे कौन सा ‘सिंडिकेट’ सक्रिय है।

रिजल्ट से पहले कार्रवाई

ESB का कहना है कि अब मंडल फाइनल रिजल्ट घोषित करने से पहले हाई पर्सेंटाइल अभ्यर्थियों की गतिविधियों का परीक्षण करने लगा है। इसी प्रक्रिया के तहत इन 12 अभ्यर्थियों के खिलाफ रिजल्ट घोषित होने से पहले नकल प्रकरण दर्ज किया गया था, और उसके बाद एफआईआर कराई गई।

लॉग-बुक: इन 12 अभ्यर्थियों ने कम्प्यूटर पर क्या किया?

आशुतोष: महज 15 मिनट में पूरे 100 प्रश्न देख लिए। आखिरी 30 मिनट में सब हल कर दिए। बाकी समय चुपचाप बैठा रहा।
विवेक: 15 मिनट में प्रश्न देखे और 30 मिनट में हल। यानी 45 मिनट में पूरा पेपर खत्म।
कुलदीप: 15 मिनट में सारे सवाल पढ़े, अंतिम 30 मिनट में टिक कर दिया।
सुभाष व रवि: दोनों ने 30-30 मिनट सवाल देखने और 30-30 मिनट हल करने में लगाए।
दयाशंकर: 30 मिनट में 100 सवाल पढ़े, महज 15 मिनट में सारे हल।
अनिल: पहले 15 मिनट स्क्रीन ही नहीं छुई। फिर 30 मिनट में सवाल देखे और अगले 30 मिनट में सब हल।
शैलेंद्र: शुरुआत के 15 मिनट कोई हलचल नहीं। फिर 30 मिनट में सवाल देखे और आखिरी 15 मिनट में 100 सवाल सॉल्व।
अंकित, संजीत, पुष्पेंद्र व आशु: इन्होंने भी 30 मिनट सवाल देखने व 30 मिनट हल करने का पैटर्न अपनाया।
इन अभ्यर्थियों ने प्रश्न हल करने के अलावा बाकी पूरे समय डेस्क पर कोई गतिविधि नहीं की। न रफ वर्क किया, न स्क्रीन टच की। यह साबित करता है कि वे सिर्फ जवाब 'टिक' करने के लिए बैठे थे। 

बोर्ड ने गड़बड़ी पकड़ी है डील में गड़बड़ी हो गई

इस मामले का दूसरा बड़ा सवाल, जिसका उत्तर जानने के लिए शायद कोई जांच नहीं की जाएगी, वह यह है कि, कर्मचारी चयन मंडल ने गड़बड़ी पकड़ी है या फिर डील में कोई गड़बड़ी हो गई है, इसलिए रतलाम पब्लिक स्कूल को एक्सपोज किया जा रहा है। यह सवाल इसलिए उठना है क्योंकि यदि सचमुच कोई गड़बड़ी पकड़ी गई होती तो, माननीय मंत्री जी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे होते। एक पत्रकार को बुलाकर इतने बड़े घोटाले की चुपचाप से जानकारी देना, संदेह पैदा करता है। 
  • क्या कारण है जो कर्मचारी चयन मंडल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की?
  • कर्मचारी चयन मंडल का संचालक मंडल पत्रकारों के सवालों से डरता क्यों है?
  • केवल कैंडिडेट्स के खिलाफ मामला क्यों दर्ज करवाया गया? 
  • क्या गारंटी से कह सकते हैं कि किसी और के अंदर पर कोई गड़बड़ी नहीं हुई थी? 
  • कहीं ऐसा तो नहीं किसी पर प्रेशर क्रिएट करने के लिए यह सब कुछ किया जा रहा है।
अपील: यदि आपके पास इस घोटाले के बारे में कोई नई जानकारी है। तो कृपया हमको ईमेल अथवा व्हाट्सएप के माध्यम से सूचित करें। अपनी सक्रियता जांच अधिकारियों को मददगार होगी।
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