विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा कितने एक्टिव हैं और जनता के लिए क्या किया, रिकॉर्ड पढ़िए

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 10 मार्च 2026
: नेताओं के बयानों पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि उनके बयान में हमेशा मिलावट होती है लेकिन रिकार्ड में मिलावट नहीं होती। यदि आप जानना चाहते हैं कि आपका विधायक जनता खेत में कितना काम करता है तो विधानसभा का रिकॉर्ड देखिए। आज विजयपुर विधानसभा के विधायक मुकेश मल्होत्रा सुर्खियों में है। तो चलिए पता करते हैं कि विधानसभा के अंदर इन्होंने जनता के खेत में क्या किया था। ताकि जनता को पता चल सके कि उन्होंने जिसको वोट देकर विधायक चुना है, जनता का फैसला सही है या नहीं। 

How Active Is Vijaypur MLA Mukesh Malhotra? Read His Work Record for the Public

सबसे पहले नोट कीजिए कि विधानसभा का बजट सत्र बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसी में विकास के लिए पैसे का आवंटन होता है। जिसको पैसा मिला वह साल भर विकास करेगा, जिसे सरकार से मांगा ही नहीं उसको कुछ नहीं मिलेगा। विधानसभा का रिकार्ड बताता है कि विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा फरवरी 2026 के विधानसभा सत्र में श्योपुर जिले के आदिवासियों, मजदूरों और पंचायत प्रतिनिधियों के मुद्दों को लेकर अत्यंत मुखर रहे:

भाग 1: आदिवासियों के पलायन और विस्थापन का मुद्दा

मुकेश मल्होत्रा ने श्योपुर जिले के आदिवासियों की दुर्दशा पर सरकार को कई बार घेरा। आदिवासियों का पलायन (तारांकित प्रश्न क्र. 14): उन्होंने सवाल किया कि क्या श्योपुर जिले में 50% से अधिक सहरिया आदिवासी परिवार राजस्थान और गुजरात पलायन कर रहे हैं। पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने लिखित जवाब में पलायन से इनकार किया। मुकेश मल्होत्रा ने इस जवाब को "असत्य" बताते हुए सदन में दावा किया कि श्योपुर के गांवों में ताले लटके हैं और लोग काम की तलाश में बाहर जा रहे हैं। इस प्रकार उन्होंने दावा तो किया परंतु अपने दावे के समर्थन में कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाए। जौरा विधायक पंकज उपाध्याय ने मुकेश मल्होत्रा का जोरदार समर्थन की एक्टिंग करते हुए पूरे मामले को अपने क्षेत्र की ओर मोड़ दिया। कहा कि उनके क्षेत्र के गांवों में भी विस्थापन की गंभीर स्थिति है और सरकार के आंकड़े गलत हैं। 

राजस्व व वन भूमि से हटाना (तारांकित प्रश्न क्र. 5): मुकेश मल्होत्रा ने आरोप लगाया कि वन विभाग श्योपुर के विजयपुर, वीरपुर और कराहल क्षेत्र के कई गांवों से आदिवासियों को उजाड़ रहा है, उनकी झोपड़ियों को जलाया जा रहा है और उन पर झूठी एफआईआर दर्ज की जा रही है।

बेचिराग राजस्व ग्राम (तारांकित प्रश्न क्र. 2): मुकेश मल्होत्रा ने श्योपुर के ऊंकाल, सोहनदेह और सारससली जैसे बेचिराग गांवों में आदिवासियों को बसने और खेती करने का अधिकार देने की मांग की। उन्होंने सदन में कहा कि वन विभाग आदिवासियों पर लगातार अत्याचार कर रहा है।

निष्कर्ष: इस मुद्दे पर अध्यक्ष ने हस्तक्षेप करते हुए कलेक्टर को निर्देशित किया कि आदिवासियों को बेवजह परेशान न किया जाए। इस प्रकार मुकेश मल्होत्रा ने एक प्रॉब्लम को सॉल्यूशन तक पहुंचा। एक विधायक को तभी सफल कहा जा सकता है जब वह समस्या का निदान करवा दे। क्योंकि विधानसभा में सभी पार्टियों के विधायक समान होते हैं।

भाग 2: पंचायत प्रतिनिधियों का मानदेय

विधायक मुकेश मल्होत्रा ने स्थानीय प्रशासन और गरीब तबके के लिए निम्नलिखित सवाल उठाए:
सरपंच और पंचों का मानदेय (तारांकित प्रश्न क्र. 20): उन्होंने सरपंचों (4,250 रुपये) और वार्ड पंचों (300 रुपये प्रति बैठक) के कम मानदेय का मुद्दा उठाते हुए इसे क्रमशः 25,000 और 15,000 रुपये करने की मांग की। मंत्री प्रहलाद पटेल ने दावा किया कि मानदेय नियमित दिया जा रहा है। मुकेश मल्होत्रा ने पलटवार करते हुए कहा कि वह स्वयं सरपंच रहे हैं और उन्हें केवल 4 महीने का मानदेय मिला था। (इस मामले का कोई निष्कर्ष नहीं निकला। मुकेश मल्होत्रा ने बहुत पुराना रेफरेंस दिया। वह अपने दावे के समर्थन में कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाए।)

मजदूर सम्मान निधि (अतारांकित प्रश्न क्र. 28): उन्होंने मांग की कि किसानों की तरह मजदूरों के लिए भी "मजदूर सम्मान निधि" का प्रावधान किया जाए और कार्य के दौरान मृत्यु होने पर परिवार को सहायता मिले। (यह एक अच्छा प्रस्ताव है लेकिन सरकार ने मंजूर नहीं किया क्योंकि मध्य प्रदेश में संबल योजना पहले से ही चल रही है।)

पिछड़ी जनजातियों की भर्ती (अतारांकित प्रश्न क्र. 1): उन्होंने सहरिया, बैगा और भारिया जनजातियों के शिक्षित युवाओं के लिए पुलिस आरक्षक और SAF के पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की मांग की। (मांग को मंजूर नहीं किया गया और मुकेश मल्होत्रा ने भी जोर नहीं दिया।)

भाग 3: स्वास्थ्य, शिक्षा और भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई

चिकित्सा सुविधाओं की कमी (अतारांकित प्रश्न क्र. 11): उन्होंने विजयपुर, वीरपुर और कराहल के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों, एक्स-रे मशीनों और सीटी स्कैन की कमी का मुद्दा उठाया, जिसके कारण मरीजों की जान जा रही है।
जर्जर स्कूल भवन (अतारांकित प्रश्न क्र. 10): उन्होंने कराहल और विजयपुर के उन दर्जनों गांवों की सूची दी जहां स्कूल भवन क्षतिग्रस्त हैं या खुले आसमान के नीचे कक्षाएं लग रही हैं।
अवैध रेत उत्खनन (अतारांकित प्रश्न क्र. 13): उन्होंने विजयपुर क्षेत्र में चंबल नदी से हो रहे अवैध रेत उत्खनन और माफिया द्वारा एसडीएम को कुचलने के प्रयास का गंभीर मामला सदन में रखा।
लीज पट्टे की अनियमितता (अतारांकित प्रश्न क्र. 4): उन्होंने कराहल में कस्तूरबा गांधी छात्रावास और पीएम आवासों के पास नियमों के विरुद्ध स्वीकृत किए गए उत्खनन पट्टे को निरस्त करने की मांग की।
जाति प्रमाण पत्र (अतारांकित प्रश्न क्र. 15): उन्होंने वर्ष 2005-06 से श्योपुर के आदिवासियों (भील, भिलाला, पटेला) के जाति प्रमाण पत्र न बनने का मुद्दा उठाया।

भाग 4: अन्य गतिविधियां और समर्थन

प्रश्नों की संख्या: उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, मुकेश मल्होत्रा ने कुल 17 महत्वपूर्ण सवाल (4 तारांकित और 13 अतारांकित) पूछे हैं।
मुद्दों का समर्थन: विपक्ष (कांग्रेस) के सदस्य होने के नाते उन्होंने जनजातीय हितों और कानून व्यवस्था के मुद्दों पर विपक्षी प्रदर्शनों और बहीर्गमन (Walkout) में भाग लिया। उन्होंने कूनो नेशनल पार्क में चीतों के भोजन (मांस) और सुरक्षा में लापरवाही का मुद्दा उठाकर वन्यजीव संरक्षण के प्रति भी अपनी सक्रियता दिखाई।
जवाबदेही: उनके अधिकांश सवालों के जवाब पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने दिए, जिनसे वे कई बार असंतुष्ट दिखे और सदन में तीखी बहस की। 

कुल मिलाकर मुकेश मल्होत्रा ने बजट सत्र का अपनी विधानसभा के लिए ठीक उपयोग करने की कोशिश की। 17 सवाल उठाना अच्छी बात है। मुद्दों पर बहस करना और सदन में अपनी विधानसभा की जनता की समस्याओं को बुलंद आवाज में प्रस्तुत करना भी अच्छी बात है। यदि मुकेश मल्होत्रा के पास आंकड़े होते, एविडेंस होते तो शायद उन्हें और भी सफलता मिलती। रिसर्च एंड एनालिसिस डेस्क, भोपाल समाचार डॉट कॉम
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