इंदौर, 31 मार्च 2026: दुनिया के 5-10 नेताओं के बीच में लड़ाई चल रही है। वह हर रोज करोड़ों रुपए खर्च कर रहे हैं। हम, हमारा देश और हमारे नेता इसमें शामिल नहीं है लेकिन फिर भी इस लड़ाई का हमारे व्यापारी और सरकार पूरा फायदा उठा रहे हैं। पेट्रोल और रसोई गैस की सप्लाई कम हुई, मूल्य वृद्धि समझ में आती है, लेकिन पब्लिक में महंगाई का माइंडसेट बन गया है, इस बात का फायदा उठाकर दूध के दाम भी बढ़ा दिए गए। इंदौर और आसपास के इलाकों में 1 अप्रैल से दूध महंगा कर दिया गया है।
इंदौर दूध विक्रेता संघ की मीटिंग में मूल्य वृद्धि का फैसला
दुग्ध संघ के अध्यक्ष भारत मथुरावाला की अध्यक्षता में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में दूध की गुणवत्ता और विक्रेताओं की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। मथुरावाला ने बताया कि पिछले कुछ समय में कपास खली, चारा और अन्य पशु आहार की कीमतों में इजाफा हुआ है। साथ ही दुधारू पशुओं को खरीदना भी अब पहले के मुकाबले काफी महंगा हो गया है। इन तमाम इनपुट लागतों को देखते हुए दूध के भाव बढ़ाना अनिवार्य हो गया था ताकि गुणवत्ता से समझौता न करना पड़े। इंदौर दूध विक्रेता संघ की कार्यकारिणी की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि पशु आहार और दुधारू पशुओं की बढ़ती कीमतों के कारण अब दूध के दाम बढ़ाना मजबूरी हो गया है। यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू की जाएंगी। इंदौर में दूध की कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर तक का इजाफा किया गया है। दूध 63 से 65 रुपए प्रति लीटर के भाव पर मिलेगा।
कोई नियम या नियामक नहीं, विक्रेता ही मूल्य का निर्धारण करते हैं
दूध एक आवश्यक उत्पाद है। लोग बिजली और पेट्रोल के बिना जीवन यापन कर सकते हैं लेकिन दूध के बिना जीवन यापन संभव नहीं है। 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए तो दूध अनिवार्य है। पब्लिक के साथ सरकार का बेहूदा मजाक देखिए, इतनी महत्वपूर्ण वस्तु के मूल्य निर्धारण के लिए कोई नियम और नियामक नहीं है। विक्रेताओं ने एक मीटिंग करके मूल्य वृद्धि की घोषणा कर दी और सबको स्वीकार करना होगा, क्योंकि विक्रेताओं की यूनियन बन गई है और ग्राहकों का कोई संरक्षण नहीं है।

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