आलीराजपुर, 2 मार्च 2026: छकतला भगोरिया महोत्सव इस वर्ष अभूतपूर्व उत्साह, उमंग और सांस्कृतिक वैभव के साथ मनाया गया। आदिवासी परंपरा, रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों और ढोल-मांदल की गूंजती थाप के बीच आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल ने स्वयं मांदल बजाकर भव्य गैर का नेतृत्व किया। हजारों की संख्या में ग्रामीणजन, युवा व कार्यकर्ता गैर में शामिल होकर संस्कृति के रंग में रंग गए।
Historic Crowd at Chakatla Bhogaria, Tourists Dance in Celebration
इस बार छकताला भगोरिया में केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों की संस्कृति की भी झलक नजर आई। गुजरात और महाराष्ट्र से आए समाजजनों की उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक रंगीन बना दिया। पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में गुजरात और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक छाप स्पष्ट दिखाई दी, जिसने भगोरिया को बहुरंगी और अंतरराज्यीय स्वरूप प्रदान किया।
गैर के दौरान युवक कांग्रेस के जिला अध्यक्ष पुष्पराज रावत को कार्यकर्ताओं ने कंधों पर बैठाकर पारंपरिक नृत्य कराया। यह दृश्य पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण बना रहा। युवाओं का जोश, ढोल-मांदल की लय और पारंपरिक गीतों की गूंज ने पूरे वातावरण को उत्सव मय बना दिया। सोंडवा ब्लॉक से हजारों कार्यकर्ता गैर में शामिल हुए, जिससे आयोजन और भी भव्य व ऐतिहासिक बन गया। छकतला क्षेत्र के वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने सामाजिक उच्चएकजुटता का संदेश दिया।
व्हिसिल ब्लोवर के रूप में चर्चित डॉ आनंद राय ने भी भगोरिया में पहुंचकर आदिवासी संस्कृति का आनंद लिया। उन्होंने गैर में शामिल होकर पारंपरिक उत्सव की सराहना की और इसे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बताया।
इस बार भगोरिया महोत्सव में विदेशी सैलानियों का भी विशेष जमावड़ा देखने को मिला। देश-विदेश से आए पर्यटकों ने आदिवासी लोकनृत्य, वेशभूषा और पारंपरिक आभुषणों को पहनकर आई सजी -धजी युवतियों को करीब से देखा। विदेशी पर्यटकों ने ग्रामीणों के साथ नृत्य कर इस उत्सव का आनंद लिया ओर इस पर्व को अंतरराष्ट्रीय रंग प्रदान किया।
आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल ने कहा कि भगोरिया केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी अस्मिता, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। यह पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और भाईचारे का संदेश देता है।
छकतला भगोरिया ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यह सांस्कृतिक आयोजन क्षेत्र की गौरवशाली विरासत, अंतरराज्यीय सांस्कृतिक समन्वय और सामूहिक एकजुटता का प्रतीक है। जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी परंपराओं से जुड़े रहने की प्रेरणा देता रहेगा। रिपोर्ट :नवीन सेन।
— Adhiraj Awasthi (@AdhirajOnline) March 1, 2026

