भोपाल, 2 मार्च 2026 : भोपाल में हृदय रोगों के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच चिंता पैदा कर दी है। हाल ही में सामने आए मामलों, जैसे कि 44 वर्षीय सुयश मल्होत्रा, में देखा गया कि कोलेस्ट्रॉल और अन्य रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद शरीर में होमोसिस्टीन (Homocysteine) का बढ़ा हुआ स्तर धमनियों में थक्का बनने और हार्ट अटैक का मुख्य कारण बन रहा है।
Doctors Flag Rising Vitamin D and B12 Deficiency Among Bhopal Residents
भोपाल के एम्स, हमीदिया और निजी अस्पतालों की कार्डियोलॉजी ओपीडी के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। डॉक्टरों के अनुसार, करीब 70 से 80 प्रतिशत मरीजों में विटामिन डी और विटामिन बी-12 का स्तर सामान्य से काफी कम पाया जा रहा है। यह समस्या अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि 22 से 45 साल के युवाओं में भी विटामिन की भारी कमी और बढ़ा हुआ होमोसिस्टीन स्तर मिल रहा है।
क्यों खतरनाक है होमोसिस्टीन का बढ़ना?
होमोसिस्टीन एक अमीनो एसिड है, जो शरीर में विटामिन बी-12 और फोलिक एसिड की कमी होने पर बढ़ जाता है। वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. किसलय श्रीवास्तव के अनुसार, हार्ट अटैक के लगभग 60 प्रतिशत मामलों में होमोसिस्टीन का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया है। जब इसका स्तर 50 माइ्रोमोल प्रति लीटर से अधिक हो जाता है, तो स्थिति अत्यंत गंभीर हो जाती है, क्योंकि यह धमनियों की भीतरी परत को नुकसान पहुंचाता है और रक्त का थक्का जमने की संभावना बढ़ा देता है।
विभिन्न अंगों पर दुष्प्रभाव विटामिन डी और बी-12 की कमी से शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो रहे हैं:
हृदय: धमनियों में सूजन और ब्लॉकेज का बढ़ता खतरा।
मस्तिष्क: स्ट्रोक की आशंका में वृद्धि।
किडनी: लंबे समय तक उच्च होमोसिस्टीन स्तर से किडनी की कार्य क्षमता प्रभावित होना।
नसें और हड्डियां: नसों में सुन्नपन, संतुलन बिगड़ना और हड्डियों का कमजोर होकर फ्रैक्चर होना।
'वलनरेबल ब्लॉक' का छिपा हुआ खतरा
गांधी मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अजय शर्मा ने चेतावनी दी है कि सामान्य टेस्ट जैसे ईसीजी, ईको या ट्रेडमिल टेस्ट केवल तभी ब्लॉकेज पकड़ पाते हैं जब वे 80 प्रतिशत से अधिक हों। लेकिन 20 से 30 प्रतिशत के ब्लॉकेज, जिन्हें 'वलनरेबल ब्लॉक' कहा जाता है, सामान्य टेस्ट में पकड़ में नहीं आते और अचानक मानसिक तनाव होने पर ये फट सकते हैं, जिससे सडन कार्डियक अरेस्ट या हार्ट अटैक हो सकता है।
बचाव के लिए क्या करें?
विशेषज्ञों के अनुसार, बिगड़ती जीवनशैली, जंक फूड, तनाव और धूप में कम समय बिताना इस कमी के मुख्य कारण हैं। आयुर्वेद के प्रोफेसर डॉ. नितिन उज्जलिया बताते हैं कि पानी में घुलनशील होने के कारण विटामिन बी-12 पकाने की गलत विधि से भी नष्ट हो जाता है।
डॉक्टरों की सलाह:
- 30 वर्ष की उम्र के बाद नियमित अंतराल पर होमोसिस्टीन, विटामिन, बीपी और शुगर की जांच कराएं।
- रोजाना 15-20 मिनट धूप में बिताएं।
- आहार में हरी सब्जियां, दालें और साबुत अनाज शामिल करें।
- धूम्रपान तुरंत छोड़ें और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को 100 से नीचे रखें।

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