भोपाल, 11 मार्च 2026 : कुछ लोग सीएम हेल्पलाइन और जनसुनवाई में मनमानी शिकायत करके सरकारी अधिकारियों पर प्रेशर क्रिएट करते हैं। मंगलवार को भोपाल कलेक्टर की जनसुनवाई में एक ऐसा ही मामला सामने आया। जिस डॉक्टर ने प्रसव पीड़िता की जान बचाई, महिला के पति ने उसी डॉक्टर के खिलाफ शिकायत कर दी और ₹80000 व्यक्तिगत मुआवजे की मांग की है।
पहले शिकायत पढ़िए फिर शिकायत का पोस्टमार्टम करेंगे
प्रशांत कुशवाह ने कलेक्टर को शिकायत करते हुए बताया कि वह पिछले साल फरवरी में पत्नी पूजा कुशवाहा को प्रसव के लिए इंदिरा गांधी अस्पताल लेकर पहुंचे थे, लेकिन मौके पर मौजूद डॉ. पूजा तिवारी ने बिना जांच किए ही जच्चा बच्चा को जान का खतरा बता दिया साथ ही हमीदिया अस्पताल भेज दिया। अस्पताल में सिजेरियन व सर्जिकल उपकरणों की कमी बता दी, ऐसे में पत्नी की नाजुक स्थिति को देखकर वे निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां सिजेरियन डिलीवरी पर 80 हजार रुपये खर्च हो गए। उनके पास रुपये नहीं थे, इससे उधारी कर अस्पताल का बिल चुकाया है। साथ ही शासन की तमाम योजनाओं के बाद भी उनका लाभ नहीं ले पाया और कर्जा हो गया, जिसकी जिम्मेदार डॉ. पूजा तिवारी हैं। इस कारण उनके वेतन से 80 हजार रुपए की राशि काटकर उन्हें दी जाए, ताकि वे सिजेरियन पर खर्च हुई राशि चुकाकर कर्ज मुक्त हो सकें। कलेक्टर ने इस मामले की जांच सीएमएचओ (गैस राहत) को सौंपी गई है।
शिकायत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट
- डॉ पूजा तिवारी ने जांच की या नहीं, इसका फैसला प्रशांत कुशवाहा तय नहीं कर सकते, क्योंकि वह मेडिकल एक्सपर्ट नहीं है।
- डॉक्टर पूजा तिवारी ने पूजा कुशवाहा को हमीदिया हॉस्पिटल (सरकारी अस्पताल) ले जाने के लिए कहा था। प्रशांत कुशवाहा ने अपनी पत्नी को डॉक्टर के मार्गदर्शन और परामर्श का उल्लंघन करते हुए प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया। इसके लिए डॉक्टर पूजा तिवारी जिम्मेदार कैसे हो सकती है।
- डॉ पूजा तिवारी ने जच्चा बच्चा की जान के लिए खतरा बताया था। यह भी बताया था कि जान बचाने के लिए सर्जिकल ऑपरेशन करना पड़ेगा। डॉक्टर पूजा तिवारी का डायग्नोसिस सही निकला। प्राइवेट अस्पताल में नॉर्मल डिलीवरी नहीं हुई बल्कि सिजेरियन डिलीवरी हुई। जच्चा बच्चा को जान का खतरा था। डॉक्टर पूजा तिवारी के परामर्श के कारण प्रशांत कुशवाहा की पत्नी और बच्चे की जान बची।
Bhopal: Complaint Filed Against the Doctor Who Saved a Patient’s Life
शिकायत करने वाले प्रशांत कुशवाहा का रवैया देखिए, जिस डॉक्टर के परामर्श के कारण उसकी पत्नी और बच्चे की जान बच गई है, उसके खिलाफ इंटेंशनली शिकायत कर रहे हैं। वह सरकारी अस्पताल में इलाज करवाने के लिए गए थे, जहां पर उन्हें सरकारी डॉक्टर मिली। यदि प्रशांत कुशवाहा सेवा से असंतुष्ट हैं तो उनको सरकार से मुआवजा की मांग करनी चाहिए। सरकार, डॉक्टर के वेतन से वसूले या नहीं वसूल, यह सरकार का पॉलिसी मैटर है लेकिन प्रशांत कुशवाहा अपने हिसाब से कानून निर्धारित करना चाहते हैं। वह न केवल शिकायत कर रहे हैं बल्कि शिकायत पर किस प्रकार से कार्रवाई करना है, कलेक्टर को डिक्टेट भी कर रहे हैं।

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