बड़ी खबर - उत्तरी अमेरिका के द्वीप पर मनु की संतानों के 13000 साल पुराने पद चिन्ह मिले

Updesh Awasthee
श्यामला ज्योतिष पीठ, भोपाल
: यूनिवर्सिटी ऑफ विक्टोरिया में मानव विज्ञानी (Anthropologist) डॉ. डंकन मैकलारेन (Dr. Duncan McLaren) ने वह प्रमाण खोज निकाला है जो भारत की प्राचीन "मनु" की मान्यता को मजबूत करते हैं। उन्होंने कैल्वरट द्वीप पर समुद्र के किनारे मनुष्य के पैरों के 29 निशान खोज निकाले हैं। यह पदचिन्ह 13000 साल पुराने हैं। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि समुद्र के किनारे, किसी के पैरों के निशान, 13000 साल बाद तक अपने अस्तित्व में है? बात सिर्फ इतनी सी नहीं है बल्कि यह प्रमाण भारत के मनु की कथा से कनेक्ट होता है। 

सबसे पहले वैज्ञानिकों को जो मिला वह पढ़िए

मानव विज्ञानी डॉ. डंकन मैकलारेन की टीम उत्तर अमेरिका में प्रशांत महासागर के तट पर कैल्वरट द्वीप (Calvert Island) में खोज करने के लिए निकले थे। उनकी पूरी रिपोर्ट PLOS One पत्रिका में प्रकाशित हुई है। उन्होंने समुद्र के किनारे खुदाई के दौरान मनुष्यों के 29 स्पष्ट पदचिह्न देखें। इन निशानों में पैर की उंगलियों, आर्च (मेहराब) और एड़ी के साफ निशान देखे जा सकते हैं। गहराई से अध्ययन करने पर पता चला कि यह 29 पदचिन्ह 3 मनुष्यों के हैं:- 
  • एक वयस्क (महिला के पैर के आकार 8-9 के बराबर)।
  • एक किशोर (जूनियर साइज 8)।
  • और एक छोटा वयस्क (बालक या बालिका)।
मुख्य शोधकर्ता डंकन मैकलारेन के अनुसार, "पैरों के ये तीन अलग-अलग आकार एक परमाणु परिवार (nuclear family) या लोगों के एक छोटे समूह की छवि पेश करते हैं जो इस क्षेत्र का उपयोग कर रहे थे"। कुछ निशानों में एड़ी घिसटने के संकेत मिले हैं, जिससे पता चलता है कि ये लोग गीली और नरम मिट्टी पर नंगे पैर चलते समय फिसल रहे थे।

Fieldwork in progress as researchers document and extract sediment from a structured excavation grid. Credit: PLOS One


नावों से उतरने के संकेत?

इन पदचिह्नों का स्वरूप किसी सीधी रेखा या रास्ते के बजाय एक स्थान पर केंद्रित या झुंड जैसा है। अधिकांश निशान तट से भीतर (inland) की ओर निर्देशित हैं। शोधकर्ताओं का विश्लेषण है कि यह वह स्थान हो सकता है जहाँ लोग अपनी नावों या जलयानों (watercraft) से उतरकर सूखे इलाके की ओर बढ़ रहे थे।

Dual visualization of a prehistoric footprint. Credit: PLOS One


Big Discovery: 13,000-Year-Old Human Footprints Found on North American Island, Links to Ancient Origins Vaivasvata Manu?

वैवस्वत मनु, जिनके बारे में भारत की प्राचीन कथाओं में बताया जाता है कि उन्होंने पृथ्वी पर आई बाढ़ से जीवन को सुरक्षित किया और उनके कारण ही पृथ्वी पर जीवन का विस्तार हुआ। बाढ़ से जीवन को बचाने के लिए उन्होंने नाव का उपयोग किया था।
वैज्ञानिक मानते हैं कि, लगभग 15000 साल पहले समुद्र का जलस्तर अचानक बढ़ गया था। उत्तरी अमेरिका में जो निशान मिले हैं, उसके आधार पर यह कहा जा सकता है कि मनु की संतानों (मानवों) उनके द्वारा जीवित बचाए गए मनुष्यों का एक दल, नाव के माध्यम से उत्तरी अमेरिका पहुंचा और फिर जीवन की शुरुआत हुई। क्या यह निशान एक मां और उसके दो बच्चों के हैं या फिर एक महिला, दूसरा उसका पुत्र और तीसरी पुत्र वधू है? जिनके कारण उत्तरी अमेरिका में मनुष्यों का विस्तार हुआ। इस आधार पर उनके परमपिता भी मनु हुए। 

समुद्र के किनारे 13000 साल पुराने पदचिन्ह सुरक्षित कैसे रहे?

वैज्ञानिकों के सामने यह एक चुनौती पूर्ण सवाल है। समुद्र के किनारे कोई भी चिन्ह सुरक्षित नहीं रह सकता। समुद्र की लहरें और हवाएं, सब कुछ मिटा देती हैं। जिस प्रकार से समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों का कैलकुलेशन है कि 13000 साल पहले कैल्वरट द्वीप पर समुद्र लगभग 6 फीट नीचे था। इसका मतलब हुआ की 6 फीट पानी ऊपर आ चुका है और 6 फीट जमीन पानी के अंदर चली गई है। इसके बाद भी यह निशान इतने स्पष्ट और सुरक्षित हैं। क्या इसलिए ताकि एक दिन इनको खोजा जा सके और वैवस्वत मनु, की प्राचीन कथा प्रमाणित हो जाए?
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