भोपाल समाचार, 1 फरवरी 2026: मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण से संबंधित मामले अंतिम बहस के लिए सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध कर दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 4 फरवरी की तारीख निर्धारित की है। इस दिन सर्वोच्च न्यायालय के कोर्ट रूम नंबर 104 में दोनों पक्षों के अधिवक्ता आमने-सामने होंगे और इस मामले का क्लाइमेक्स शुरू हो जाएगा।
मुख्य मुद्दा, मध्य प्रदेश में 50% से अधिक जातिगत आरक्षण सही या गलत
सुप्रीम कोर्ट में मुख्य मुद्दा योगेश कुमार ठाकुर का है और उसके साथ 16 अन्य मामलों की सुनवाई होनी है। सभी मामले इस प्रकार की है कि उनका एक साथ निराकरण किया जा सकता है। सर्वोच्च न्यायालय में विद्वान न्यायाधीश JUSTICE PAMIDIGHANTAM SRI NARASIMHA एवं JUSTICE ALOK ARADHE द्वारा मामलों की सुनवाई की जाएगी। लिखनी है कि मध्य प्रदेश में पिछड़ा वर्ग को 27% आरक्षण के लिए विवाद चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट को निर्धारित करना है कि क्या सरकारी नौकरी और हायर एजुकेशन में जातिगत आरक्षण की सीमा 50% से अधिक की जा सकती है।
मध्य प्रदेश के सबसे बड़े जमींदार ओबीसी, सरकारी रजिस्टर में रिकॉर्ड ही नहीं
आज की तारीख में मध्य प्रदेश के सबसे बड़े जमींदार पिछड़ा वर्ग के लोग हैं। मध्य प्रदेश की कुल भूमि का 25% से कम अनुसूचित जाति और जनजाति के पास है। वैश्य समाज के पास सबसे कम जमीन है। ब्राह्मणों के पास भी अब जमीन नहीं रही। जो दान में मिली थी उसे भी बेचकर शहरों में चले आए हैं। राजपूतों के पास अच्छी जमीन है लेकिन पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत आने वाली सभी जातियों के सामने राजपूत की जमीन बहुत कम पड़ जाती है। यदि मोटे तौर पर भी देखेंगे तो मध्य प्रदेश में ओबीसी नेताओं के पास सबसे ज्यादा जमीन है।

