भोपाल, 27 फरवरी 2026 : मध्य प्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए 36,696 करोड़ की मांग की थी। विधानसभा में 8 बिंदुओं पर चर्चा हुई। भ्रष्टाचार का मुद्दा उठा। स्कूल शिक्षा मंत्री ने कार्रवाई का आश्वासन दिया और इसी के साथ भाजपा और कांग्रेस के सभी विधायकों ने मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा के संचालन और विस्तार के लिए मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह की 36,696 करोड़ की मांग को मंजूरी दे दी।
1. शाला भवनों के रखरखाव में 'बड़ा घोटाला' और भ्रष्टाचार के आरोप
विधानसभा में मैहर जिले के रामनगर ब्लॉक में स्कूलों की मरम्मत के नाम पर हुए 4 करोड़ रुपये के संगठित घोटाले का मुद्दा छाया रहा। विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि भोपाल में बैठे अधिकारियों और बाहरी ठेकेदारों ने मिलकर बिना काम किए कागजों पर करोड़ों रुपये डकार लिए। विपक्ष ने इसे 'शिक्षा माफिया' करार देते हुए दोषियों के निलंबन की मांग की। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने स्वीकार किया कि 22 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है और जांच पूरी होने तक संबंधित उच्च अधिकारियों को पद से हटाया जाएगा।
2. नामांकन में वृद्धि और 'ड्रॉपआउट' दर में ऐतिहासिक गिरावट
सरकार ने दावा किया कि सत्र 2025-26 में कक्षा पहली में नामांकन में 19.6% की वृद्धि हुई है। सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट रेट 6.8% से घटकर लगभग शून्य (0%) पर आ गया है। मंत्री ने बताया कि 'समग्र आईडी' के माध्यम से 90% बच्चों को ट्रैक किया जा रहा है, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
3. सीएम राइज (सांदीपनि) और पीएम-श्री योजना
• सांदीपनि विद्यालय: राज्य के 'सीएम राइज' स्कूलों का नाम अब महर्षि सांदीपनि के नाम पर रखा गया है। वर्तमान में 275 सांदीपनि स्कूल संचालित हैं, जिनके भवनों के लिए 10,447 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
• पीएम-श्री स्कूल: केंद्र सरकार की मदद से प्रदेश के 799 स्कूलों को 'पीएम-श्री' के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहाँ अंतरराष्ट्रीय स्तर की लैब और स्मार्ट क्लासेस उपलब्ध कराई जा रही हैं।
4. छात्र कल्याण योजनाएं: साइकिल, लैपटॉप और स्कूटी
• साइकिल वितरण: वर्ष 2025-26 में 4.90 लाख छात्र-छात्राओं को साइकिलें दी गईं। आगामी वर्ष के लिए 210 करोड़ का प्रावधान है।
• लैपटॉप और स्कूटी: मेधावी छात्रों को 94,300 लैपटॉप और लगभग 7,890 टॉपर्स को ई-स्कूटी वितरित की गई।
• सुपर-100 योजना: इस योजना के माध्यम से सरकारी स्कूलों के बच्चों ने JEE और NEET में बड़ी सफलता हासिल की है। अब इस योजना का विस्तार ग्वालियर और जबलपुर में भी किया जाएगा।
5. डिजिटल शिक्षा और AI का समावेश
• आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: मध्य प्रदेश बोर्ड ने माइक्रोसॉफ्ट के साथ एमओयू किया है, जिसके तहत 53 स्कूलों में 'एआई' पाठ्यक्रम शुरू किया गया है।
• स्मार्ट क्लासेस: प्रदेश के 5273 स्कूलों में आईसीटी लैब और 4400 से अधिक स्मार्ट क्लास स्थापित की गई हैं। हालाँकि, विधायक हेमंत कटारे ने 10,149 इंटरेक्टिव पैनलों की खरीद में बाजार दर से अधिक भुगतान करने और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए।
6. शिक्षकों की कमी और अतिथि शिक्षकों का मुद्दा
विपक्ष ने घेरा कि प्रदेश के स्कूलों में 1.15 लाख से अधिक शिक्षकों के पद खाली हैं। मंत्री ने जवाब दिया कि 15,000 नई नियुक्तियां प्रक्रियाधीन हैं, जिसमें अतिथि शिक्षकों को 50% आरक्षण दिया जाएगा। शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए 'सार्थक ऐप' अनिवार्य किया गया है, जिससे 88% नियमित और 98% अतिथि शिक्षक जुड़ चुके हैं।
7. निजी स्कूलों और मदरसा शिक्षा पर लगाम
• निजी स्कूल व 'बुक माफिया': सरकार ने घोषणा की कि निजी स्कूलों में महंगी किताबों की समस्या को खत्म करने के लिए सरकारी दर पर किताबें उपलब्ध कराने हेतु 'बुक फेयर' लगाए जाएंगे। 'आरटीई' (RTE) की फीस अब सिंगल क्लिक से सीधे स्कूलों को भेजी जा रही है।
• मदरसा बोर्ड: वर्तमान में मदरसा बोर्ड को कोई बड़ी वित्तीय सहायता नहीं दी जा रही है, केवल मान्यता प्राप्त मदरसों को रखरखाव के लिए 25,000 रुपये दिए जाते हैं।
8. बुनियादी सुविधाओं की कमी और दुखद घटनाएं
• जर्जर भवन: चर्चा के दौरान कटनी (बिजरौघड़) में स्कूल की दीवार गिरने से कक्षा 5वीं के छात्र की मौत का उल्लेख हुआ।
• सुविधाओं का अभाव: विपक्ष ने आरोप लगाया कि 2000 से अधिक स्कूलों में शौचालय नहीं हैं और कई जगहों पर बच्चों को कॉपियों के पन्नों पर मिड-डे मील परोसा जा रहा है।
MP Assembly Approves ₹36,696 Crore Budget for School Education
निष्कर्ष: विधानसभा ने स्कूल शिक्षा विभाग के लिए 36,696 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान मांगों को मंजूरी दी। सरकार ने 2028 तक नई शिक्षा नीति-2020 को पूरी तरह जमीन पर उतारने का संकल्प दोहराया।

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