भोपाल समाचार, 2 फरवरी 2026: मध्य प्रदेश शासन स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत कक्षा 9 एवं कक्षा 11 की वार्षिक परीक्षाओं के संचालन और मूल्यांकन के लिए लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल द्वारा डिटेल गाइडलाइन जारी कर दी गई है। इस न्यूज़ में हम आपको एग्जाम्स की डेट से लेकर सिक्योरिटी सिस्टम के नए नियमों तक सारी जानकारी देंगे।
MP 9th 11th मूल्यांकन और रिजल्ट की तारीख
इस बार फाइनल एग्जाम्स। 23 फरवरी 2026 से शुरू होंगे और 17 मार्च 2026 तक चलेंगे स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि वैल्यूएशन का काम 1 मार्च 2026 से शुरू हो जाएगा और 23 मार्च 2026 को रिजल्ट घोषित कर दिया जाएगा। इसके बाद नवीन शिक्षण सूत्र 2026-27 के लिए एडमिशन की प्रक्रिया तत्काल शुरू हो जाएगी।
पेपर्स का सिक्योरिटी सिस्टम और नए नियम
परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने के लिए प्रश्नपत्रों को ब्लॉक स्तर पर निर्धारित 'प्रश्नपत्र अभिरक्षा केंद्रों' (जैसे उत्कृष्ट या सांदीपनि विद्यालय) में रखा जाएगा।, इन केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम होंगे:
• प्रश्नपत्रों को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में सुरक्षित स्ट्रॉग रूम में रखा जाएगा।,
• स्ट्रॉग रूम के बाहर रात्रिकालीन सुरक्षा गार्ड तैनात रहेंगे।
• प्रश्नपत्रों के पैकेट परीक्षा शुरू होने के नियत समय से 60 मिनट पूर्व ही निकाले जा सकेंगे, और उस समय केंद्र अध्यक्ष के साथ-साथ पुलिस सुरक्षा की उपस्थिति भी अनिवार्य होगी।
स्टूडेंट्स के लिए गाइडलाइन
- सभी विद्यार्थियों को परीक्षा के पहले दिन परीक्षा केंद्र पर परीक्षा के निर्धारित समय से 45 मिनट पहले पहुंचना पड़ेगा।
- परीक्षा के अन्य दिनों में परीक्षा केंद्र पर 30 मिनट पहले पहुंचना होगा।
- परीक्षा शुरू होने के 15 मिनट बाद किसी भी विद्यार्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
- परीक्षा कक्ष में मोबाइल फोन, कैलकुलेटर, स्मार्ट वॉच या किसी भी प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाना पूर्णतः प्रतिबंधित है।
परीक्षा शुरू होने के 10 मिनट पहले विद्यार्थियों को उत्तर पुस्तिका दी जाएगी और 5 मिनट पहले पेपर दिया जाएगा ताकि वह उसको ध्यानपूर्वक पढ़ सकें।
यदि कोई विद्यार्थी नकल करते हुए अथवा अनुचित साधन के साथ पकड़ा जाता है तो उसकी उत्तर पुस्तिका तुरंत जप्त कर ली जाएगी। उसकी दूसरी उत्तर पुस्तिका दी जाएगी। केंद्र के अध्यक्ष द्वारा विधि के अनुसार कार्रवाई करके ऐसे विद्यार्थी के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा।
मूल्यांकन और बेस्ट फाइव पद्धति पर बड़ा फैसला
इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए EMS पोर्टल का उपयोग किया जाएगा। एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि राज्य शासन के आदेशानुसार कक्षा 9वीं की वार्षिक परीक्षा में 'बेस्ट फाइव' पद्धति की सुविधा अब समाप्त कर दी गई है।
दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष प्रावधान
दृष्टिहीन, मानसिक विकलांग या हाथ की हड्डी टूट जाने के कारण लिखने में असमर्थ छात्रों के लिए 'लेखक' (Writer) की सुविधा प्रदान करने का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा, इन छात्रों के लिए प्रायोगिक परीक्षा के स्थान पर बहुविकल्पीय प्रश्नों के आधार पर मूल्यांकन की सुविधा भी दी जाएगी।
यह थी मध्य प्रदेश वार्षिक परीक्षाओं पर हमारी विस्तृत रिपोर्ट। परीक्षाओं के सुचारू संचालन के लिए जिला शिक्षा अधिकारियों और संकुल प्राचार्यों को जवाबदेही सौंपी गई है। इसी प्रकार की महत्वपूर्ण और उपयोगी समाचारों के लिए कृपया गूगल न्यूज़ पर भोपाल समाचार को फॉलो करें। सोशल मीडिया पर हमारे साथ कनेक्ट रहे और सबसे फास्ट अपडेट के लिए टेलीग्राम चैनल ज्वाइन करें। सभी लिंक नीचे दिए गए हैं।
परीक्षा में नकल रोकने के लिए क्या कड़े नियम बनाए हैं
लोक शिक्षण संचालनालय, मध्य प्रदेश ने कक्षा 9वीं और 11वीं की वार्षिक परीक्षाओं में नकल और अनुचित साधनों (Unfair Means) के उपयोग को रोकने के लिए अत्यंत कड़े और विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग की रणनीति परीक्षा केंद्र की सुरक्षा से लेकर छात्रों की व्यक्तिगत जांच तक फैली हुई है। नकल रोकने के लिए बनाए गए मुख्य नियम निम्नलिखित हैं:
1. परीक्षा केंद्र और कक्ष की सुरक्षा व्यवस्था
• प्रतिबंधित क्षेत्र: घनी आबादी वाले क्षेत्रों में स्थित परीक्षा केंद्रों के बाहर 100 मीटर के भीतर अनधिकृत व्यक्तियों का प्रवेश वर्जित रहेगा और वहां "सावधान परीक्षा केंद्र है" का सूचना बोर्ड लगाया जाएगा।
• कक्ष की जांच: परीक्षा प्रारंभ होने से पूर्व पर्यवेक्षकों को परीक्षा कक्षों की गहन जांच करनी होगी ताकि वहां कोई चिट, हस्तलिखित कागज या पुस्तक का अंश न छिपा हो।
• बैठक व्यवस्था: छात्रों के बीच पर्याप्त दूरी रखी जाएगी ताकि वे एक-दूसरे की कॉपी न देख सकें और न ही आपस में बातचीत कर सकें।
2. इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध
• परीक्षा कक्ष में मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, कैलकुलेटर, पेजर या किसी भी प्रकार के डिजिटल उपकरण ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। यदि कोई छात्र इन सामग्रियों के साथ पाया जाता है, तो इसे 'अनुचित साधन' (UFM) की श्रेणी में माना जाएगा।
3. पर्यवेक्षकों के लिए सख्त निर्देश
• पर्यवेक्षकों को परीक्षा शुरू होने से 45 मिनट पूर्व केंद्र पर उपस्थित होना होगा और वे स्वयं भी मोबाइल का उपयोग नहीं कर सकेंगे।
• उन्हें परीक्षा कक्ष में निरंतर घूम-घूमकर निगरानी करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्र आपस में कोई बातचीत न करें या संदेशों का आदान-प्रदान न करें।
4. प्रवेश और निकास के नियम
• परीक्षा प्रारंभ होने के निर्धारित समय से 15 मिनट बाद किसी भी छात्र को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
• परीक्षा शुरू होने के बाद शुरुआती 2 घंटे तक किसी भी छात्र को उत्तर-पुस्तिका जमा करके केंद्र से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी।
5. अनुचित साधन नकल पाए जाने पर कठोर कार्यवाही
• परिभाषा: दूसरे छात्र से बातचीत करना, प्रश्न-पत्र बदलना, पास में चिट, पुस्तकें, नोट्स रखना या हाथ-पैरों और कपड़ों पर परीक्षा संबंधी जानकारी लिखकर लाना अनुचित साधन माना जाएगा।
• तत्काल कार्यवाही: नकल करते पकड़े जाने पर छात्र की उत्तर-पुस्तिका तुरंत जब्त कर ली जाएगी और उसे दूसरी उत्तर-पुस्तिका दी जाएगी। छात्र को निर्देश दिया जाएगा कि वह शेष प्रश्नों के उत्तर नई कॉपी में लिखे।
• UFM प्रकरण: पकड़े गए मामले को "नकल प्रकरण" के रूप में दर्ज किया जाएगा और उत्तर-पुस्तिका पर लाल स्याही से अंकित किया जाएगा। ऐसी कॉपियों को अलग पैकेट में सील कर मूल्यांकन केंद्र भेजा जाएगा।
इन नियमों के माध्यम से विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षा की शुचिता और गोपनीयता बनाए रखना केंद्र अध्यक्षों और पर्यवेक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
नकल करते पकड़े गए छात्रों के लिए क्या दंडात्मक प्रावधान हैं
लोक शिक्षण संचालनालय, मध्य प्रदेश द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, वार्षिक परीक्षा में नकल या अनुचित साधनों (Unfair Means - UFM) का उपयोग करने वाले छात्रों के लिए अत्यंत कड़े प्रशासनिक और दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं।, इन प्रावधानों का विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है:
1. यदि कोई परीक्षार्थी परीक्षा कक्ष में अनुचित साधनों का उपयोग करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसकी उत्तर-पुस्तिका और नकल संबंधी सामग्री को तत्काल जब्त कर लिया जाएगा। यदि परीक्षार्थी के पास से कोई लिखित पर्ची, पुस्तक का अंश या नोट्स मिलते हैं, तो उन पर पर्यवेक्षक और केंद्र अध्यक्ष के हस्ताक्षर कराए जाते हैं। साथ ही, यदि छात्र ने अपने शरीर या कपड़ों पर कुछ लिखा है, तो उसकी भी जांच कर साक्ष्य के रूप में दर्ज किया जाता है।
2. नकल करते पकड़े जाने पर छात्र को परीक्षा से बाहर नहीं निकाला जाता, बल्कि उसे तत्काल एक दूसरी (नई) उत्तर-पुस्तिका दी जाती है।, छात्र को यह निर्देश दिया जाता है कि वह उन प्रश्नों को छोड़कर, जिन्हें वह पहली कॉपी में हल कर चुका है, शेष प्रश्नों के उत्तर इस नई कॉपी में लिखे।
3. पकड़ी गई पहली उत्तर-पुस्तिका पर लाल स्याही से "नकल प्रकरण" अंकित किया जाता है। इसके साथ ही, उत्तर-पुस्तिका में जहां भी खाली स्थान होता है, उसे लाल स्याही से क्रॉस (काट) दिया जाता है ताकि उसमें बाद में कुछ न लिखा जा सके। रिकॉर्ड के लिए संकलित की जाने वाली चेक लिस्ट और उपस्थिति पत्रक में भी छात्र के रोल नंबर के सामने लाल स्याही से गोला बनाकर (UFM) लिखा जाता है।,
4. नकल करने वाले छात्रों की उत्तर-पुस्तिकाओं को सामान्य छात्रों के बंडल में नहीं रखा जाता है। ऐसे प्रकरणों की दोनों उत्तर-पुस्तिकाओं (पहली जब्त की गई और दूसरी बाद में दी गई) को एक साथ नत्थी कर, साक्ष्य के रूप में पकड़ी गई सामग्री के साथ पृथक पैकेट में सील किया जाता है।, इन पैकेटों को मूल्यांकन केंद्र पर अलग से जमा करना अनिवार्य है।
5. केंद्र अध्यक्ष को प्रत्येक ऐसे मामले की सावधानीपूर्वक जांच कर एक विस्तृत प्रतिवेदन (Report) तैयार करना होता है। इस प्रतिवेदन को जिला शिक्षा अधिकारी को भेजा जाता है और परीक्षा समाप्ति के बाद केंद्र अध्यक्ष द्वारा दी जाने वाली 'परीक्षा संचालन रिपोर्ट' में भी नकल प्रकरणों की कुल संख्या और की गई कार्यवाही का उल्लेख करना आवश्यक होता है।
इन कड़े नियमों का उद्देश्य परीक्षा की शुचिता बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि अनुचित साधनों का प्रयोग करने वाले छात्रों के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा सके।
क्या शिक्षकों के लिए भी अनुशासनात्मक कार्यवाही के नियम हैं?
हाँ, शिक्षकों, पर्यवेक्षकों और अन्य परीक्षा अधिकारियों के लिए भी अनुशासनात्मक कार्यवाही के स्पष्ट नियम निर्धारित किए गए हैं। यदि शिक्षक अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहते हैं, तो उनके विरुद्ध निम्नलिखित स्थितियों में कार्यवाही की जा सकती है:
• यह पर्यवेक्षक (Invigilator) का कर्तव्य है कि वह सुनिश्चित करे कि उसके कमरे में कोई भी छात्र अनुचित साधनों का उपयोग न करे और पूर्ण अनुशासन बना रहे। यदि निरीक्षण दल (Inspection Team) को किसी कमरे में नकल का मामला मिलता है, तो इसे इस बात का साक्ष्य माना जाएगा कि संबंधित पर्यवेक्षक ने अपने कर्तव्य का समुचित पालन नहीं किया है। इस आधार पर उस शिक्षक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा सकेगी।
• परीक्षा के दौरान पर्यवेक्षकों के लिए मोबाइल का प्रयोग करना कड़ाई से प्रतिबंधित है। उन्हें परीक्षा शुरू होने से 45 मिनट पहले उपस्थित होना होता है और कक्ष में निरंतर सक्रिय रहकर निगरानी करनी होती है।
• विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी और उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य पर यह बड़ी जिम्मेदारी है कि वे परीक्षा की शुचिता और मूल्यांकन की गोपनीयता बनाए रखें। किसी भी स्तर पर गोपनीयता भंग होने या निर्देशों का उल्लंघन करने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
• सभी सहायक केंद्र अध्यक्षों और पर्यवेक्षकों के लिए केंद्र अध्यक्ष के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। निर्देशों की अवहेलना को भी अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखा जाता है।
इसके अतिरिक्त, परीक्षा संचालन के दौरान सामूहिक नकल जैसे गंभीर मामलों में केंद्र अध्यक्ष को विस्तृत प्रतिवेदन देना होता है, जिसके आधार पर आगे की कठोर कार्यवाही की जा सकती है।
सामूहिक नकल के मामले में क्या कार्रवाई होगी
लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, सामूहिक नकल (Mass Copying) के मामलों को अत्यंत गंभीरता से लिया जाता है और इसके लिए दस्तावेजीकरण से लेकर जवाबदेही तय करने तक की सख्त प्रक्रिया निर्धारित की गई है। सामूहिक नकल के मामलों में विभाग द्वारा की जाने वाली मुख्य कार्यवाहियाँ निम्नलिखित हैं:
• यदि किसी परीक्षा केंद्र के निरीक्षण के दौरान सामूहिक नकल का मामला पाया जाता है, तो निरीक्षण दल (जो संचालनालय, जिला कलेक्टर या जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा नियुक्त हो सकता है) के लिए यह अनिवार्य है कि वे निरीक्षण पंजी में सामूहिक नकल की पूर्ण स्थिति का विस्तृत विवरण अंकित करें।
• परीक्षा समाप्ति के उपरांत केन्द्राध्यक्ष द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी को एक 'परीक्षा संचालन प्रतिवेदन' भेजा जाता है। इस प्रतिवेदन के बिंदु क्रमांक 10 में केन्द्राध्यक्ष को स्पष्ट रूप से यह जानकारी देनी होती है कि क्या केंद्र पर सामूहिक नकल का कोई प्रकरण बना है, और यदि हाँ, तो उसका पूरा विवरण प्रस्तुत करना होता है।
• यदि किसी परीक्षा कक्ष में सामूहिक नकल या अनुचित साधनों का उपयोग पाया जाता है, तो इसे संबंधित पर्यवेक्षक (Invigilator) की लापरवाही का साक्ष्य माना जाता है। विभाग के नियमों के अनुसार, ड्यूटी में इस प्रकार की चूक होने पर संबंधित शिक्षक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।
• विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी और संकुल प्राचार्य की यह मुख्य जिम्मेदारी है कि वे परीक्षा की शुचिता बनाए रखें। सामूहिक नकल जैसी स्थिति उत्पन्न होने पर केंद्र की शुचिता भंग होने के आधार पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाती है और जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से इसकी रिपोर्ट आयुक्त लोक शिक्षण को भेजी जाती है,।
• नकल के ऐसे गंभीर प्रकरणों की उत्तर-पुस्तिकाओं को सामान्य उत्तर-पुस्तिकाओं के साथ नहीं रखा जाता है। इन्हें 'अनुचित साधन' (UFM) की श्रेणी में रखते हुए साक्ष्यों के साथ पृथक सीलबंद पैकेट में मूल्यांकन केंद्र भेजा जाता है ताकि उन पर नियमानुसार विशेष निर्णय लिया जा सके।
संक्षेप में, विभाग सामूहिक नकल के मामलों में न केवल छात्रों की उत्तर-पुस्तिकाओं पर कार्यवाही करता है, बल्कि उस केंद्र के समस्त जिम्मेदार स्टाफ के विरुद्ध भी कठोर प्रशासनिक कदम उठाता है।
क्या सामूहिक नकल पकड़े जाने पर परीक्षा रद्द हो जाएगी
लोक शिक्षण संचालनालय, मध्य प्रदेश द्वारा शैक्षणिक सत्र 2025-26 की परीक्षाओं के लिए जारी विस्तृत दिशा-निर्देशों के आधार पर यदि किसी परीक्षा केंद्र पर सामूहिक नकल (Mass Copying) का मामला सामने आता है, तो इसे अत्यंत गंभीरता से लिया जाता है। निरीक्षण दल के लिए यह अनिवार्य है कि वे निरीक्षण पंजी में सामूहिक नकल की पूर्ण स्थिति का विस्तृत विवरण दर्ज करें।
केन्द्राध्यक्ष को परीक्षा समाप्ति के बाद जिला शिक्षा अधिकारी को भेजे जाने वाले अपने आधिकारिक प्रतिवेदन में स्पष्ट रूप से उल्लेख करना होता है कि क्या केंद्र पर सामूहिक नकल का कोई प्रकरण बना है। हालांकि DPI की गाइडलाइन में पूरी परीक्षा को 'स्वतः रद्द' करने का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन शुचिता भंग होने की स्थिति में केन्द्राध्यक्ष द्वारा दी गई रिपोर्ट और निरीक्षण दल की टिप्पणियों के आधार पर आयुक्त लोक शिक्षण द्वारा अंतिम निर्णय लिया जाता है।
लापरवाह पर्यवेक्षकों पर विभागीय कार्यवाही
परीक्षा ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों और पर्यवेक्षकों के लिए सख्त प्रावधान किए गए हैं। यदि कोई निरीक्षण दल (Flying Squad) किसी कमरे में नकल का मामला पकड़ता है, तो इसे इस बात का प्रत्यक्ष साक्ष्य माना जाता है कि संबंधित पर्यवेक्षक ने अपने कर्तव्यों का पालन ठीक से नहीं किया है। इस साक्ष्य के आधार पर संबंधित पर्यवेक्षक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही (Disciplinary Action) शुरू की जा सकती है। परीक्षा की शुचिता बनाए रखने की मुख्य जिम्मेदारी विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी और संकुल प्राचार्य की होती है; इसमें किसी भी प्रकार की चूक होने पर उनकी जवाबदेही तय की जाती है।
फ्लाइंग स्क्वाड की भूमिका
नकल रोकने और परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने में निरीक्षण दल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ये दल संचालनालय, कलेक्टर या जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा नियुक्त किए जाते हैं और किसी भी समय परीक्षा केंद्र का आकस्मिक निरीक्षण कर सकते हैं। निरीक्षण दल केंद्र पर बैठक व्यवस्था, कोरी उत्तर-पुस्तिकाओं का स्टॉक, और प्रश्नपत्र अभिरक्षा केंद्र (Strong Room) में रखे गए सीलबंद लिफाफों की भौतिक स्थिति की जांच करता है। वे प्रश्नपत्रों के हिसाब (प्राप्त, प्रयुक्त और शेष) का मिलान 'अभिरक्षा पंजी' से करते हैं। यदि निरीक्षण दल किसी छात्र को नकल करते हुए पकड़ता है, तो वे जब्त की गई नकल सामग्री पर अपने हस्ताक्षर और मुहर अंकित करते हैं ताकि उसे साक्ष्य के रूप में प्रयोग किया जा सके। वे निरीक्षण पंजी में नकल प्रकरणों और सामूहिक नकल की स्थिति पर अपनी अनिवार्य टिप्पणी दर्ज करते हैं, जो भविष्य की कार्यवाही का आधार बनती है।

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