5000 साल तक चाँद, पृथ्वी से भी ज़्यादा शक्तिशाली था, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च

Updesh Awasthee
साइंस न्यूज़ ब्यूरो, 28 फरवरी, 2026
: चंद्रमा के बारे में अब तक आप जो कुछ भी जानते हैं, यह न्यूज़ उससे बिल्कुल अलग है और आपकी जानकारी में कुछ नया जोड़ देगी। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में हुई एक रिसर्च के बाद खुलासा हुआ है कि, 5000 साल तक हमारा अपना चंद्रमा, हमारी अपनी पृथ्वी से ज्यादा शक्तिशाली था। 

Moon Was More Powerful Than Earth for 5,000 Years, Says University of Oxford Research

लंबे समय से वैज्ञानिकों के बीच दो गुट थे। एक पक्ष का मानना था कि 3.5 से 4 अरब साल पहले चंद्रमा का चुंबकीय क्षेत्र बहुत शक्तिशाली था, जबकि दूसरे पक्ष का तर्क था कि चंद्रमा का केंद्र (Core) इतना छोटा है (उसकी त्रिज्या का लगभग 1/7 हिस्सा) कि वहां से एक मजबूत चुंबकीय क्षेत्र पैदा होना नामुमकिन है। अब, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के 'डिपार्टमेंट ऑफ अर्थ साइंसेज' की ताज़ा रिपोर्ट कहती है कि दोनों ही पक्ष अपनी जगह सही थे।

टाइटेनियम का जादू और Sampling Bias

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों एवं वैज्ञानिकों ने नासा के अपोलो मिशन (Apollo missions) द्वारा लाए गए 'मेयर बेसाल्ट' (Mare basalts) नामक पत्थरों का विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि जिन पत्थरों में टाइटेनियम (Titanium) की मात्रा अधिक थी, उनमें चुंबकीय शक्ति बहुत अधिक रिकॉर्ड की गई थी।

असल में, अपोलो मिशन के अंतरिक्ष यान चंद्रमा के उन सपाट हिस्सों पर उतरे थे जहाँ टाइटेनियम से भरपूर पत्थर अधिक मात्रा में मौजूद थे। इसे वैज्ञानिक 'सैंपलिंग बायस' कहते हैं। इसका मतलब यह है कि हमने चाँद के केवल उन हिस्सों के पत्थर देखे जहाँ दुर्लभ घटनाएं रिकॉर्ड हुई थीं, और हमें लगा कि पूरा चंद्रमा वैसा ही रहा होगा।

मुख्य खोज: केवल 5,000 साल की चमक

एसोसिएट प्रोफेसर क्लेयर निकोल्स और उनकी टीम ने बताया कि चंद्रमा का चुंबकीय क्षेत्र हमेशा शक्तिशाली नहीं था। असल में:
  • चंद्रमा का चुंबकीय क्षेत्र अपने अधिकांश इतिहास में कमज़ोर ही रहा है।
  • शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र की घटनाएँ बहुत दुर्लभ थीं और केवल 5,000 साल या उससे भी कम समय के लिए रहीं।
यह तब होता था जब चंद्रमा की गहराई से टाइटेनियम युक्त चट्टानें पिघलकर कोर-मेंटल सीमा पर पहुँचती थीं, जिससे अस्थायी रूप से एक अत्यंत शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता था, जो कभी-कभी पृथ्वी से भी अधिक शक्तिशाली हो जाता था।

अब आगे क्या?

सह-लेखक डॉ. साइमन स्टीफनसन के अनुसार, अब वैज्ञानिक यह अनुमान लगा सकते हैं कि चंद्रमा पर किस तरह के पत्थर कहाँ मिलेंगे और उनकी चुंबकीय शक्ति क्या होगी। आने वाले आर्टेमिस मिशन (Artemis missions) इन खोजों का परीक्षण करेंगे और हमें चंद्रमा के अनसुलझे इतिहास के और करीब ले जाएंगे।
तो अगली बार जब आप चाँद को देखें, तो याद रखिएगा कि वह केवल एक शांत सफेद गोला नहीं है, बल्कि उसके अंदर टाइटेनियम के रहस्यों भरे शक्तिशाली इतिहास के पन्ने छिपे हैं!
भोपाल समाचार से जुड़िए
कृपया गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें यहां क्लिक करें
टेलीग्राम चैनल सब्सक्राइब करने के लिए यहां क्लिक करें
व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए  यहां क्लिक करें
X-ट्विटर पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
फेसबुक पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
समाचार भेजें editorbhopalsamachar@gmail.com
जिलों में ब्यूरो/संवाददाता के लिए व्हाट्सएप करें 91652 24289

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!