आलीराजपुर, नवीन निश्चल, 24 फरवरी 2026: कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर ने अपनी टीम के अधिकारियों को गुरु मंत्र दिया है कि, सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को सॉल्व करो या नहीं करो लेकिन उनको अटेंड जरूर करो। किसी को यह कहने का मौका नहीं मिलना चाहिए कि हमने सुनवाई नहीं की। इस न्यूज़ रिपोर्ट में आपको कलेक्टर की मजबूरी और अधिकारियों की मनमानी पढ़ने को मिलेगी:-
आलीराजपुर के अधिकारी सीएम हेल्पलाइन अटेंड नहीं करते
पीआरओ निशा सोलंकी की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार दिन 23 फरवरी 2026 को कलेक्टर ऑफिस में समय सीमा पत्रों की समीक्षा बैठक के दौरान सीएम हेल्पलाइन के मामलों को लेकर चर्चा हुई। बैठक की शुरुआत सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों की समीक्षा से की गई। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी विभाग शिकायतों को नॉन-अटेंडेंट न रखे।
Under Pressure, Alirajpur Collector Instructs District Officials
इस एक लाइन के निर्देश ने सिस्टम की पोल खोल दी है। कितनी चिंता की बात है कि आलीराजपुर के अधिकारी सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से मिलने वाली शिकायतों को अटेंड ही नहीं करते। कलेक्टर को समीक्षा बैठक में निर्देश देने पड़ रहे हैं।
आलीराजपुर का प्रशासन आउट ऑफ कंट्रोल
आलीराजपुर जिले की प्रशासनिक टीम, कलेक्टर के कंट्रोल में नहीं है। पीआरओ निशा सोलंकी की रिपोर्ट में इस बात को पुख्ता करने के लिए कई संकेत मिलते हैं:-
- सीएम हेल्पलाइन के मामले में कलेक्टर 50 दिन की पेंडेंसी स्वीकार करने को तैयार है, उनका कहना है कि जीन शिकायतों को 50 दिन से ज्यादा हो गया है कम से कम उनका निराकरण कर दीजिए।
- हितग्राही मूलक शिकायतों निराकरण कर दीजिए, इसमें तो कोई विवाद भी नहीं होता।
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली की हालत खराब है। कलेक्टर को सब पता है लेकिन शायद मजबूर है। इसलिए मीटिंग में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत पात्र हितग्राहियों को समय पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
- हालत इतनी गंभीर हो गई है कि, आंगनवाड़ियों में समय पर नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध हो रहा है या नहीं, इसकी रिपोर्ट डायरेक्ट कलेक्टर कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
- आलीराजपुर प्रशासन में लापरवाही और टेंशन की स्थिति देखिए, समय सीमा पत्रों की समीक्षा बैठक का केवल प्रेस नोट जारी किया गया। फोटो वीडियो जारी नहीं किए गए। आखरी फोटो 21 फरवरी को जारी किया गया था। इसके बाद कोई फोटोग्राफिक एविडेंस नहीं है कि कलेक्टर क्या कर रही है।
कुल मिलाकर हालत है कि कलेक्टर के अधीन प्रशासनिक अधिकारी, मनमानी कर रहे हैं और कलेक्टर, जिले को चलाने के लिए डायरेक्ट रिपोर्टिंग और डायरेक्ट मॉनिटरिंग के लिए मजबूर हो गई है।

