भोपाल समाचार, 24 फरवरी 2026: डॉ योगीराज शर्मा को कौन नहीं जानता। आने वाले कई सालों तक जब भी मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार और काला धन की बात होगी, डॉ योगीराज शर्मा मामले का उल्लेख तो करना ही होगा। EOW जैसी संस्थाओं को इस मामले में भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने वाली ईमानदार संस्था माना जाता है। लेकिन योगीराज कांड में EOW की ईमानदारी पर दाग लग गया। EOW ने कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, कोर्ट ने उसको खारिज कर दिया।
डॉ योगीराज शर्मा को नहीं जानते?
जिन लोगों को याद नहीं है, उनके लिए: डॉ योगीराज शर्मा के यहां साल 2007 में इनकम टैक्स की छापामार कार्रवाई हुई थी। इतना पैसा मिला कि लोकायुक्त और EOW द्वारा भी कार्रवाई की गई। डॉ योगीराज शर्मा कांड की सबसे बड़ी मजेदार बात यह है कि, मामले सब जगह दर्द हुए लेकिन इसके बाद कुछ खास नहीं हुआ। भोपाल में तो अभी भी कहा जाता है कि, डॉ योगीराज शर्मा का काला धन मार्केट में ब्याज पर घूम रहा है और कई सीनियर आईएएस ऑफिसर्स के साथ, कई बड़े प्रोजेक्ट में डॉक्टर शर्मा का इन्वेस्टमेंट है। शायद इसके कारण मध्य प्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के अंतर्गत EOW की जांच कभी पूरी नहीं हो पाई।
14 साल तक जांच नहीं की और फिर क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी
14 साल बाद 16 नवंबर 2022 को जांच अधिकारी टीआई अखिल सिंह ने डॉ योगीराज शर्मा मामले में खात्मा रिपोर्ट लगा दी। उस समय एसपी ईओडब्ल्यू राकेश सिंह थे। विशेष न्यायाधीश (ईओडब्ल्यू) राम प्रताप मिश्र ने डॉ. योगीराज शर्मा समेत 21 लोगों के मामले में ईओडब्ल्यू की खात्मा रिपोर्ट खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि शासन को नुकसान और अत्यधिक संपत्ति के आरोपों में स्वतंत्र साक्ष्य जुटाए बिना ही रिपोर्ट पेश कर दी गई। जांच में ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया, जिससे यह साबित हो सके कि अपराध घटित नहीं हुआ। कोर्ट ने दोबारा जांच के आदेश देते हुए चेक पीरियड तय करने, आय-व्यय के संबंध में साक्ष्य एकत्र कर गणना पत्रक तैयार करने और कमियों की स्वतंत्र जांच करने को कहा है।
डॉ योगीराज शर्मा कांड देश-विदेश की मीडिया में हैडलाइंस बना था
मामला NRHM योजना से जुड़ा है। वर्ष 2006 में केंद्र से 23.34 करोड़ रुपए की पहली किश्त जारी हुई थी। आरोप है कि योगीराज ने 20 अन्य के साथ मिलकर करीब 7 करोड़ रुपए का भ्रष्टाचार किया। सितंबर 2007 में आयकर छापे में 14.66 करोड़ की अघोषित आय का खुलासा हुआ। 1.13 करोड़ रुपए नकद और 5,475 अमेरिकी डॉलर, 2,110 यूएई दिरहम, 5,910 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर सहित अन्य विदेशी मुद्रा बरामद हुई। अन्य ठिकानों से 14 लाख रुपए भी जब्त हुए। हाथ से करीब 20 साल पहले यह मामला देशभर की मीडिया में सुर्खियों में रहा था। नेताओं के भाषणों में उल्लेख किया जाता था। 7 साल तक इन्वेस्टिगेशन करने के बाद 12 मार्च 2014 को लोकायुक्त ने 3800 पेज का चालान पेश किया था।
EOW की खात्मा रिपोर्ट में 21 लोगों के नाम
डॉ. योगीराज शर्मा, अशोक नंदा, बसंत शेल्के, सुनील अग्रवाल, जयपाल सचदेवा, राजेश जैन, योगेश पटेरिया, मधु शर्मा, प्रमोद शर्मा, अरुण शर्मा, मनीष व्यास, प्रोपराइटर नेताम इंडस्ट्रीज उमेश कजवे, सत्येंद्र साहू नेप्च्यून रेमेडीज, उमेश कजवे छत्तीसगढ़ फार्मा, अशोक गुप्ता आइडियल मेडिकल डॉक्यूमेंट एवं इलेक्ट्रिकल्स कंपनी, अशोक गुप्ता जयकिट्स उद्योग, रेडिएशन इमेश कम्यूनिकेशन, इमेज एंड सर्विसेज, योगेश पटेरिया ग्लोबल इंटरप्राइजेज, शार्प एंड सर्विसेज और मां जागेश्वरी पब्लिसिटी के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने खात्मा रिपोर्ट पेश की थी।

