Social issue: भगवान को नहीं मानने वाले वैज्ञानिक फिर कंफ्यूज हो गए

1000 साल पहले वैज्ञानिकों ने कहा था कि भगवान का कोई अस्तित्व नहीं है और पृथ्वी पर जीवन वैज्ञानिक प्रक्रियाओं से शुरू हुआ है लेकिन पिछले 1000 साल में वह इस सवाल का जवाब नहीं खोज पाए हैं की धरती पर जिंदगी शुरू कैसे हुई। एक बार फिर उनकी पिछली थ्योरी को उनके ही वैज्ञानिक बंधु ने गलत साबित कर दिया है। 

पृथ्वी पर लाइफ कैसे शुरू हुई: लेटेस्ट रिसर्च रिपोर्ट

धरती पर जिंदगी की शुरुआत कैसे हुई। इस सवाल का जवाब देने वाली अब एक नई रिसर्च रिपोर्ट प्रकाशित हुई है, जो बताती है कि RNA नाम की एक चीज, जो प्रोटीन बनाने में बड़ा रोल अदा करती है, पुरानी धरती पर आसानी से बन जाती होगी। ये खोज 'RNA वर्ल्ड' वाली थ्योरी को मजबूत सबूत दे रही है, जिसमें माना जाता है कि जिंदगी की शुरुआत में RNA ही मुख्य खिलाड़ी रही होगी।

RNA क्या होता है - फुल फॉर्म और अर्थ भी बताइए

RNA मतलब राइबोन्यूक्लिक एसिड, ये DNA का चचेरा भाई है। DNA तो जेनेटिक जानकारी स्टोर करता है, लेकिन RNA शायद उससे पहले आया होगा क्योंकि ये ज्यादा सिंपल है और खुद की नकल भी कर सकता है। RNA तीन तरह का होता है: 
  • मैसेंजर RNA (mRNA) जो निर्देश लेकर आता है, 
  • राइबोसोमल RNA (rRNA) जो प्रोटीन बनाने के लिए राइबोसोम बनाता है, और 
  • ट्रांसफर RNA (tRNA) जो असली प्रोटीन जोड़ने का काम करता है। 
वैज्ञानिकों का मानना है कि करीब 4.3 अरब साल पहले धरती पर हालात ऐसे थे कि RNA खुद-ब-खुद बन जाता होगा, और यही जिंदगी का पहला कदम रहा होगा।

जापान के वैज्ञानिक ने RNA बनाकर दिखा दिया

पहले वाली दिक्कत ये थी कि RNA के सामान (राइबोज शुगर, फॉस्फेट्स और न्यूक्लियोबेस (एडिनीन, ग्वानीन, साइटोसीन, यूरासिल)) ये सब एक साथ कैसे मिलेंगे। केमिस्ट लोग एक रास्ता बताते थे जिसका नाम डिस्कंटीन्यूअस सिंथेसिस मॉडल (DSM), लेकिन समुद्र में आम बोरेत कंपाउंड को रिएक्शन रोकने वाला मानते थे। लेकिन जापान की तोहोकू यूनिवर्सिटी और फ्लोरिडा की फाउंडेशन फॉर एप्लाइड मॉलेक्यूलर इवोल्यूशन के वैज्ञानिकों की टीम, जिसकी अगुवाई युता हिराकावा कर रहे थे, ने एक्सपेरिमेंट से साबित कर दिया कि बोरेत तो मददगार है। उन्होंने राइबोज, फॉस्फेट्स, न्यूक्लियोबेस को बोरेत और बेसाल्ट के मिश्रण में डाला, गर्म किया और सूखने दिया – जैसे पुरानी धरती पर भूमिगत पानी वाली जगहों में होता होगा। नतीजा? RNA बन गया, और बोरेत ने राइबोज को स्थिर रखा और फॉस्फेट बनाने में मदद की।

500 किलोमीटर चौड़ा प्रोटोप्लैनेट RNA का सामान धरती पर लाया था

ये नतीजे NASA के OSIRIS-REx मिशन से Bennu एस्टरॉइड के सैंपल से मिलते-जुलते हैं, जहां राइबोज मिला है। टीम का अंदाजा है कि 500 किलोमीटर चौड़ा कोई बड़ा प्रोटोप्लैनेट 4.3 अरब साल पहले RNA का सामान धरती पर लाया होगा। कुछ लोग आलोचना करते हैं कि लैब में सामान मिलाना तो इंसानी दखल है, लेकिन टीम कहती है कि ये प्राकृतिक हालात की नकल है। मजेदार बात ये कि मंगल ग्रह पर भी बोरेत मिले हैं, तो वहां भी RNA बन सकता था।

ये रिसर्च दिसंबर में Proceedings of the National Academy of Sciences में छपी है। अभी इस रिसर्च पर बहस चल रही है और इसके निष्कर्ष को अंतिम सत्य नहीं माना गया है। सरल हिंदी में- पृथ्वी पर जीवन कैसे शुरू हुआ? इस प्रश्न का उत्तर आज भी वैज्ञानिकों के पास नहीं है।
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